नौतपा 2025: 25 मई से 2 जून तक, ज्योतिष गणना और किसानों की फसल पर गहरा असर
सारांश
Key Takeaways
- नौतपा 2025 का आरंभ 25 मई से होगा और यह 2 जून तक चलेगा।
- सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश नौतपा की शुरुआत का ज्योतिषीय आधार है; इस दौरान सूर्य का 10 से 20 फीसदी अंश इस नक्षत्र में रहता है।
- नौतपा जितना गर्म होगा, मानसून उतना अच्छा होने की संभावना — यह ज्योतिष और कृषि विज्ञान दोनों की मान्यता है।
- 2025 में नौतपा के दौरान अपेक्षित गर्मी न पड़ने से मानसून कमजोर रहा और कई राज्यों में सूखे की स्थिति बनी।
- खरीफ फसलों (धान, मक्का, सोयाबीन) को पकने के लिए नमी और गर्म तापमान दोनों की आवश्यकता होती है।
- नौतपा में पक्षियों के लिए जल रखने की परंपरा चंद्रमा को बल देने की ज्योतिषीय मान्यता पर आधारित है।
नई दिल्ली — गर्मियों के तेज होते मिजाज के बीच इस बार नौतपा 25 मई 2025 से शुरू होकर 2 जून 2025 तक चलेगा। ज्योतिषीय गणना और कृषि विज्ञान दोनों के नजरिए से ये नौ दिन न केवल भीषण गर्मी के प्रतीक हैं, बल्कि आने वाले मानसून की दिशा और खरीफ फसलों की सेहत भी इन्हीं दिनों में तय होती है।
नौतपा क्या है और कब शुरू होता है
'नौतपा' का शाब्दिक अर्थ है — नौ दिनों की भारी तपन। ज्योतिष गणना के अनुसार, ज्येष्ठ माह में जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब नौतपा का आरंभ होता है। इस बार यह प्रवेश 25 मई को होगा। इन नौ दिनों में सूर्य का 10 से 20 फीसदी अंश रोहिणी नक्षत्र में रहता है। रोहिणी नक्षत्र के अधिपति चंद्रमा हैं, और सूर्य की प्रखर उपस्थिति में चंद्रमा की शीतलता क्षीण हो जाती है, जिससे गर्मी का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
पक्षियों के लिए जल रखने की परंपरा का ज्योतिषीय आधार
नौतपा में चंद्रमा के कमजोर पड़ने के कारण सदियों से यह परंपरा चली आई है कि घरों की छतों और आँगन में पक्षियों के लिए जल रखा जाए। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार यह परंपरा चंद्रमा को बल देने में सहायक मानी जाती है। यह कार्य पर्यावरणीय दृष्टि से भी उपयोगी है, क्योंकि इन दिनों तापमान अपने चरम पर होता है।
मानसून और खरीफ फसलों पर नौतपा का असर
कृषि विशेषज्ञों और ज्योतिषियों दोनों का मानना है कि नौतपा जितना गर्म और शुष्क होता है, मानसून उतना ही अच्छा और दीर्घकालिक होता है। इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क यह है कि भूमि और समुद्र की सतह पर बढ़ती तपिश बादलों को वर्षा के लिए तैयार करती है। गौरतलब है कि खरीफ फसलों — जैसे धान, मक्का और सोयाबीन — को पकने के लिए पर्याप्त नमी और गर्म तापमान दोनों की आवश्यकता होती है। अच्छे मानसून से इन फसलों को समुचित जल मिलता है, जो उत्पादन को सीधे प्रभावित करता है।
2025 में नौतपा की स्थिति और पिछले वर्षों का अनुभव
यह ऐसे समय में आया है जब बीते कुछ वर्षों में नौतपा के दौरान अपेक्षित तपिश नहीं देखी गई। साल 2025 में नौतपा के समय उतनी गर्मी नहीं पड़ी जितनी सामान्यतः होनी चाहिए थी। इसका सीधा असर मानसून पर पड़ा — बीते साल मानसून कमजोर रहा, फसलों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया और कई राज्यों में सूखे की स्थिति बनी। यह Nवीं ऐसी घटना है जब नौतपा की कमजोरी और मानसून की विफलता के बीच सीधा संबंध देखा गया है।
किसानों के लिए क्या है संदेश
इस बार यदि 25 मई से 2 जून के बीच नौतपा के दिन अपेक्षित गर्मी लेकर आते हैं, तो यह किसानों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जाएगा। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, तेज नौतपा के बाद सामान्य या अच्छे मानसून की संभावना बढ़ जाती है, जिससे खरीफ सीजन की बुवाई और उत्पादन दोनों बेहतर हो सकते हैं। आने वाले सप्ताहों में मौसम विभाग के पूर्वानुमान इस दिशा में और स्पष्टता देंगे।