प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की इच्छाशक्ति से भारत नक्सलवाद से मुक्त: तुहिन सिन्हा

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प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की इच्छाशक्ति से भारत नक्सलवाद से मुक्त: तुहिन सिन्हा

सारांश

तुहिन सिन्हा ने कहा है कि पीएम मोदी और अमित शाह की नीति के कारण भारत नक्सलवाद से काफी हद तक मुक्त हो गया है। उन्होंने नक्सलियों के आत्मसमर्पण और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बदलावों का जिक्र किया।

Key Takeaways

  • प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की इच्छाशक्ति ने नक्सलवाद से मुक्ति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
  • लगभग 1,000 नक्सली निष्क्रिय हुए हैं और 4,000 ने आत्मसमर्पण किया है।
  • बस्तर क्षेत्र में 'बस्तर ओलंपिक्स' का आयोजन सामाजिक समावेशन का प्रतीक है।
  • हाल के वर्षों में 100 जिलों में आर्थिक विकास की अपार संभावनाएँ हैं।
  • मोदी सरकार की नीतियों से नक्सलवाद की समस्या में काफी कमी आई है।

मुंबई, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा के प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने सोमवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण भारत नक्सलवाद से काफी हद तक मुक्त हुआ है।

उन्होंने राष्ट्र प्रेस के साथ संवाद करते हुए कहा कि सरकार के प्रयासों के नतीजे स्वरूप लगभग 1,000 नक्सलियों को निष्क्रिय किया गया है, जबकि 4,000 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में आर्थिक अवसरों का विस्तार संभव हुआ है। एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वर्ष 2014 में जो लगभग 100 जिले नक्सल आतंकवाद से प्रभावित थे, वे अब धीरे-धीरे इस समस्या से बाहर निकल रहे हैं। इन क्षेत्रों में अब विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। उदाहरण के लिए, गढ़चिरौली, जो कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, वहां लगभग 10,000 करोड़ रुपए की लागत से एक स्टील प्लांट का निर्माण हो रहा है। यह परियोजना न केवल क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करेगी, बल्कि पूर्व नक्सलियों को स्थायी आजीविका प्रदान कर उन्हें मुख्यधारा में शामिल करेगी और क्षेत्र को एक आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करेगी।

उन्होंने आगे कहा कि इसी प्रकार बस्तर क्षेत्र, जहाँ कभी नक्सली हिंसा की घटनाएँ सबसे अधिक होती थीं, वहां पिछले दो वर्षों से 'बस्तर ओलंपिक्स' का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में 40 से 50 प्रतिशत तक प्रतिभागी वे लोग हैं, जो पहले नक्सल गतिविधियों में शामिल थे और अब मुख्यधारा में लौट चुके हैं। यह बदलाव सामाजिक समावेशन और शांति की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इन लगभग 100 जिलों में आर्थिक विकास की अपार संभावनाएँ हैं और आने वाले दशकों में ‘विकसित भारत’ की दिशा में ये क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अगले तीन-चार वर्षों में केवल इन जिलों के योगदान से ही देश की जीडीपी में हर साल 0.5 से 0.7 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है।

तुहिन सिन्हा ने यह भी कहा कि नक्सलमुक्त भारत, मोदी सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। पिछले 49 वर्षों में नक्सल आतंकवाद के कारण देश ने लगभग 25,000 लोगों को खोया है, जिनमें कई राजनेता भी शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया और नक्सलवाद को आतंकवाद मानने से भी परहेज किया, जिसके कारण उस समय नक्सली हमले अपने चरम पर पहुंच गए थे।

Point of View

जिनका मानना है कि मोदी सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाए हैं। इसके परिणामस्वरूप, देश में नक्सलवाद की समस्या में कमी आई है और आर्थिक विकास के नए रास्ते खुल रहे हैं।
NationPress
05/04/2026

Frequently Asked Questions

भारत में नक्सलवाद की समस्या कब शुरू हुई?
भारत में नक्सलवाद की समस्या 1960 के दशक में शुरू हुई थी, जब नक्सली आंदोलन ने पश्चिम बंगाल में जन्म लिया।
नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में क्या विकास हो रहा है?
सरकार के प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकासात्मक परियोजनाएँ, जैसे स्टील प्लांट और बस्तर ओलंपिक्स का आयोजन हो रहा है।
सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने नक्सलियों के आत्मसमर्पण को बढ़ावा देने और विकास योजनाओं को लागू करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
क्या नक्सलवाद के खिलाफ मोदी सरकार की नीति सफल रही है?
हाँ, तुहिन सिन्हा के अनुसार, मोदी सरकार की नीति ने नक्सलवाद के खिलाफ सफलता प्राप्त की है, जिससे देश में आर्थिक विकास हो रहा है।
भारत में नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
सरकार नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए सुरक्षा बलों को मजबूत कर रही है और विकासात्मक योजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
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