एआर रहमान को काम क्यों नहीं मिल रहा?
सारांश
Key Takeaways
- गुनगुनालो ऐप नए सिंगर्स के लिए एक अनूठा मंच है।
- संगीत में स्वतंत्रता की आवश्यकता है।
- ए.आर. रहमान की स्थिति पर विचार।
- रीमेक का अर्थ बेहतर प्रस्तुति है।
- क्रिएटिविटी को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
मुंबई, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। 600 से अधिक फिल्मों को अद्भुत गाने देने वाले लिरिक्स लेखक समीर अंजान, भारतीय संगीतकार और गिटारवादक एहसान नूरानी तथा भारतीय सिनेमा के गीतकार प्रसून जोशी ने नए गायक-गायिकाओं के लिए एक नया मंच "गुनगुनालो" ऐप लॉन्च किया है।
लॉन्च के अवसर पर, समीर अंजान ने ऐप के बारे में और ए.आर. रहमान के हिंदी सिनेमा को लेकर दिए गए बयान पर अपनी राय व्यक्त की।
"गुनगुनालो" ऐप के बारे में बात करते हुए समीर अंजान ने कहा, "म्यूजिक इंडस्ट्री इतनी fragmented हो गई है कि गायक और कलाकार नहीं समझ पा रहे हैं कि उन्हें कहां जाना है, कहां काम करना है। कई प्रतिभाशाली सिंगर्स हैं जिन्हें पहचान नहीं मिल रही। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए जावेद अख्तर और शंकर महादेवन ने सोचा कि क्यों न कलाकारों के लिए कुछ ऐसा किया जाए जो उनका अपना हो। विचार-विमर्श के बाद, गुनगुनालो ऐप बनाने का निर्णय लिया गया। यह एक ऐसा मंच है जहां कोई भी कलाकार बंधा हुआ नहीं है। कोई भी गायक यहां अपना गाना अपलोड कर सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि अगर गायक सोचते हैं कि उनका गाना या संगीत बहुत अच्छा है लेकिन उसे कोई नहीं ले रहा, तो वे इस मंच का उपयोग कर सकते हैं। यह सभी के लिए उपलब्ध है। मुझे उम्मीद है कि हमारी यह पहल बहुत आगे बढ़ेगी और हर किसी को सराहना मिलेगी।
गानों के रीमेक पर समीर अंजान ने कहा कि रीमेक का अर्थ गानों को बेहतर तरीके से पेश करना है, न कि बिगाड़ना। यदि कुछ अच्छे पुराने गानों के साथ ऐसा किया जा रहा है, तो यह आपके लिए अच्छी बात है। पीढ़ी बदल रही है और पीढ़ी को समझना आवश्यक है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से सभी को स्वतंत्रता से काम करने का अवसर मिलेगा।
ए.आर. रहमान के कम्युनिज्म पर दिए गए बयान पर समीर अंजान का कहना है कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है और जो उन्होंने महसूस किया, उसे उन्होंने व्यक्त किया। उन्हें क्रिएटिव फ्रीडम नहीं मिली होगी, और यही कारण हो सकता है कि उन्हें काम कम मिल रहा है। हम इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से सभी को अपनी प्रतिभा दिखाने का समान अवसर देंगे।
भारतीय संगीतकार और गिटारवादक एहसान नूरानी ने कहा, "संगीत वैश्विक है, इसका जातिवाद या किसी विशेष जाति से कोई लेना-देना नहीं है। आपको सिर्फ अच्छे गानों से मतलब होना चाहिए, और मुझे लगता है कि उनका भी यही कहना होगा।"
लेखक, पटकथा लेखक और भारतीय सिनेमा के गीतकार प्रसून जोशी ने भी "गुनगुनालो" ऐप के बारे में बताया कि सिंगर्स को अब तक बंदिशों के साथ गाते हुए देखा गया है, लेकिन यह ऐप स्वतंत्र रूप से गाने का मौका प्रदान करता है। हर किसी की अपनी क्रिएटिविटी होती है, और इस ऐप के माध्यम से सबके सपनों को पूरा करने का हौसला मिलता है।