ऐतिहासिक एफटीए: भारत-न्यूजीलैंड 27 अप्रैल को करेंगे हस्ताक्षर, 5 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य
सारांश
Key Takeaways
- 27 अप्रैल 2025 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में भारत-न्यूजीलैंड एफटीए पर हस्ताक्षर होंगे।
- अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- 15 वर्षों में न्यूजीलैंड से भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा।
- प्रतिवर्ष 5,000 भारतीय पेशेवरों को न्यूजीलैंड में 3 साल के अस्थायी रोजगार वीजा की सुविधा मिलेगी।
- न्यूजीलैंड को 95%25 उत्पादों पर शुल्क रियायत, जबकि भारत ने डेयरी, प्याज, चीनी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा।
- पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के टॉड मैक्ले की उपस्थिति में होगा यह ऐतिहासिक समझौता।
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत और न्यूजीलैंड के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) सोमवार, 27 अप्रैल 2025 को औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित होगा। यह ऐतिहासिक करार दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और बाजार पहुंच को नई ऊंचाई देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इस समझौते का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में कुल व्यापार को दोगुना कर 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
समझौते पर हस्ताक्षर का समारोह
यह ऐतिहासिक एफटीए भारत मंडपम, नई दिल्ली में संपन्न होगा। इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के उनके समकक्ष टॉड मैक्ले उपस्थित रहेंगे। दोनों देशों के शीर्ष व्यापार प्रतिनिधियों की मौजूदगी में होने वाला यह समारोह दोनों राष्ट्रों के आर्थिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है।
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने रविवार को सोशल मीडिया पर साझा किए एक वीडियो संदेश में कहा कि "भारत के साथ एफटीए न्यूजीलैंड के निर्यातकों को 1.4 अरब की आबादी वाले विशाल बाजार में प्रवेश का अवसर देता है — यह एक पीढ़ी में एक बार मिलने वाला मौका है।" उनके इस बयान ने समझौते के रणनीतिक महत्व को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया।
निवेश और व्यापार का रोडमैप
इस समझौते के तहत विनिर्माण, अवसंरचना, सेवाएं, नवाचार और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों में अगले 15 वर्षों में न्यूजीलैंड से भारत में अनुमानित 20 अरब डॉलर का निवेश आने का मार्ग प्रशस्त होगा। भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड के बाजारों में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा।
वहीं न्यूजीलैंड को भारत को निर्यात होने वाले अपने करीब 95 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क में छूट या कटौती का लाभ प्राप्त होगा। इन उत्पादों में ऊन, कोयला, लकड़ी, शराब, समुद्री भोजन, चेरी, एवोकाडो और ब्लूबेरी प्रमुख हैं।
कीवी फल और सेब जैसे प्रमुख न्यूजीलैंड निर्यातों पर कोटा-आधारित शुल्क में कमी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त भेड़ का मांस, ऊन, वानिकी उत्पाद, मनुका शहद, बेबी फुड्स और कुछ समुद्री खाद्य पदार्थों पर भी शुल्क रियायतें मिलेंगी।
संवेदनशील क्षेत्रों को मिली सुरक्षा
भारत ने अपने घरेलू किसानों और उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए डेयरी, प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल और रबर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को शुल्क छूट के दायरे से बाहर रखा है। यह निर्णय भारत की उस परंपरागत रणनीति के अनुरूप है जिसमें वह एफटीए वार्ताओं में कृषि क्षेत्र को विशेष संरक्षण देता आया है।
गौरतलब है कि भारत ने इससे पहले आसियान एफटीए (2009) में भी इसी प्रकार कृषि उत्पादों को संरक्षित रखा था, जिसकी बाद में आलोचना हुई थी कि घरेलू उद्योग को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। इस बार भारत ने उन अनुभवों से सीख लेते हुए अधिक सतर्क और संतुलित रुख अपनाया है।
भारतीय पेशेवरों के लिए नई राह
समझौते की एक महत्वपूर्ण विशेषता भारतीय पेशेवरों की सुगम आवाजाही है। न्यूजीलैंड ने प्रतिवर्ष 5,000 भारतीय पेशेवरों को अस्थायी रोजगार वीजा देने पर सहमति जताई है, जिसके तहत उन्हें तीन वर्ष तक वहां रहने की अनुमति होगी।
इसमें आईटी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और निर्माण जैसे पारंपरिक पेशों के साथ-साथ योग प्रशिक्षक, आयुष चिकित्सक, रसोइया और संगीत शिक्षक जैसे भारतीय सांस्कृतिक पेशों को भी शामिल किया गया है। यह प्रावधान भारत की सॉफ्ट पावर को वैश्विक मंच पर और मजबूत करेगा।
भौगोलिक संकेतक और कृषि सहयोग
न्यूजीलैंड ने भारतीय वाइन और स्पिरिट के पंजीकरण को सुगम बनाने के लिए अपने कानूनों में संशोधन कर भारत के भौगोलिक संकेतकों (जीआई टैग) को समर्थन देने की प्रतिबद्धता जताई है। यह भारतीय उत्पादों की वैश्विक ब्रांडिंग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
इसके अलावा कीवी, सेब और शहद पर केंद्रित एक विशेष कृषि-प्रौद्योगिकी कार्य योजना के माध्यम से दोनों देशों के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग को और प्रगाढ़ बनाया जाएगा। समझौते में गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने के लिए बेहतर नियामक सहयोग, सुव्यवस्थित सीमा शुल्क प्रक्रियाएं और उन्नत स्वच्छता एवं पौध स्वच्छता उपायों के प्रावधान भी शामिल हैं।
वैश्विक अनिश्चितता में रणनीतिक महत्व
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के कारण भारत अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है। भारत-न्यूजीलैंड एफटीए इस रणनीति का एक अहम हिस्सा है जो भारतीय निर्यातकों को नए और स्थिर बाजार उपलब्ध कराएगा।
उल्लेखनीय है कि भारत इस समय यूके, यूरोपीय संघ और कनाडा के साथ भी एफटीए वार्ता में संलग्न है। न्यूजीलैंड के साथ यह समझौता भारत की बहुआयामी व्यापार नीति को गति देगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा।
अब सभी की नजरें 27 अप्रैल के हस्ताक्षर समारोह पर टिकी हैं, जिसके बाद दोनों देशों की संसदों में इस समझौते की अनुसमर्थन प्रक्रिया शुरू होगी और इसे लागू करने की समयसीमा तय की जाएगी।