चारधाम यात्रा: ऋषिकेश में 1,000 से अधिक श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य जांच, 5 मेडिकल टीमें तैनात

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चारधाम यात्रा: ऋषिकेश में 1,000 से अधिक श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य जांच, 5 मेडिकल टीमें तैनात

सारांश

चारधाम यात्रा 2025 में ऋषिकेश के ट्रांजिट कैंपों पर 5 मेडिकल टीमें तैनात हैं और अब तक 1,000 से अधिक श्रद्धालुओं की बीपी, शुगर व अन्य बीमारियों की जांच हो चुकी है। 50 वर्ष से अधिक उम्र के यात्रियों की जांच अनिवार्य है।

Key Takeaways

  • ऋषिकेश के ट्रांजिट कैंपों में अब तक 1,000 से अधिक श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य जांच हो चुकी है।
  • 5 मेडिकल टीमें दिन-रात तीर्थयात्रियों की बीपी, शुगर और अन्य बीमारियों की जांच में लगी हैं।
  • 50 वर्ष से अधिक आयु के सभी यात्रियों की स्वास्थ्य जांच अनिवार्य की गई है।
  • 70 वर्ष से अधिक उम्र के बीपी-शुगर रोगियों को विशेष दवाएं और चिकित्सा परामर्श दिया जा रहा है।
  • सांस की बीमारी वाले मरीजों को रुक-रुककर यात्रा करने की सलाह दी गई है।
  • ओएसडी प्रजापति नौटियाल ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वयं चारधाम यात्रा व्यवस्था पर नजर बनाए हुए हैं।

चारधाम यात्रा 2025: ऋषिकेश बना स्वास्थ्य सुरक्षा का पहला पड़ाव

ऋषिकेश, 26 अप्रैल 2025 — उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2025 पूरी तरह गति पकड़ चुकी है और इस बार स्वास्थ्य विभाग ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पहले से कहीं अधिक सतर्कता बरती है। ऋषिकेश में स्थापित ट्रांजिट कैंपों में अब तक एक हजार से अधिक तीर्थयात्रियों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है, जो इस यात्रा सीजन में स्वास्थ्य प्रबंधन की गंभीरता को दर्शाता है।

ट्रांजिट कैंप में क्या है व्यवस्था

चारधाम यात्रा प्रशासन के ओएसडी प्रजापति नौटियाल ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने यात्रा के लिए एक विस्तृत स्वास्थ्य परामर्श जारी किया है। उन्होंने सभी तीर्थयात्रियों से अपील की कि वे यात्रा शुरू करने से पहले इस परामर्श को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उसी के अनुसार अपनी योजना तैयार करें।

ऋषिकेश में 5 मेडिकल टीमें चौबीसों घंटे श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य जांच में सक्रिय हैं। विशेष रूप से 50 वर्ष से अधिक आयु के तीर्थयात्रियों की ब्लड प्रेशर (बीपी) और ब्लड शुगर की अनिवार्य जांच की जा रही है। इसके साथ ही ओपीडी में जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क दवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

किन बीमारियों के मरीज सबसे अधिक

चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशोदा पाल ने बताया कि अब तक जांच के लिए आए अधिकांश मरीजों में घुटने और कमर दर्द की शिकायत सबसे आम रही है। इसके अलावा सांस की बीमारी, उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) और मधुमेह (शुगर) के ऐसे मरीज भी सामने आए हैं जिनका पहले से उपचार चल रहा है।

70 वर्ष से अधिक आयु के बीपी और शुगर रोगियों को विशेष दवाएं दी जा रही हैं और उन्हें समय पर दवा लेने की सख्त हिदायत दी गई है। डॉ. यशोदा पाल ने स्पष्ट किया कि बीपी और शुगर नियंत्रण में रहने पर ही मरीजों को आगे यात्रा की अनुमति दी जाती है।

सांस की बीमारी से पीड़ित श्रद्धालुओं को रुक-रुककर यात्रा करने की सलाह दी गई है ताकि ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी से कोई गंभीर स्थिति न बने।

चक्कर, सीने में दर्द — तुरंत लें चिकित्सा सहायता

ओएसडी प्रजापति नौटियाल ने चेताया कि यदि किसी तीर्थयात्री को यात्रा के दौरान चक्कर आना, सीने में दर्द या तेज सिरदर्द जैसे लक्षण महसूस हों, तो वे तुरंत यात्रा मार्ग पर तैनात मेडिकल टीमों से संपर्क करें या नजदीकी ओपीडी में जाएं। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है।

मुख्यमंत्री की नजर, प्रशासन सतर्क

ओएसडी नौटियाल ने बताया कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी चारधाम यात्रा की पूरी व्यवस्था पर लगातार निगरानी रख रहे हैं। यात्रा को सुगम, सुरक्षित और मंगलमय बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में चारधाम यात्रा के दौरान हृदयाघात और ऊंचाई से जुड़ी बीमारियों से होने वाली मौतों की संख्या चिंताजनक रही है, जिसके बाद सरकार ने इस वर्ष अनिवार्य स्वास्थ्य जांच को सख्ती से लागू किया है। यह कदम न केवल जरूरी है बल्कि समय की मांग भी है।

आने वाले हफ्तों में जैसे-जैसे बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट पूरी तरह खुल जाएंगे और तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ेगी, स्वास्थ्य जांच की यह व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Point of View

लेकिन मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर दब जाता है। इस बार अनिवार्य स्वास्थ्य जांच का कदम सराहनीय है, पर सवाल यह है कि क्या यह व्यवस्था केवल ऋषिकेश तक सीमित रहेगी या केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे दुर्गम मार्गों पर भी उतनी ही प्रभावी होगी? जब लाखों श्रद्धालु एक साथ उमड़ते हैं तो 5 टीमें पर्याप्त नहीं लगतीं — प्रशासन को इस क्षमता को कई गुना बढ़ाना होगा।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

चारधाम यात्रा 2025 में स्वास्थ्य जांच क्यों अनिवार्य की गई है?
पिछले वर्षों में चारधाम यात्रा के दौरान हृदयाघात और ऊंचाई से जुड़ी बीमारियों से कई श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई थी। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इस वर्ष यात्रा शुरू करने से पहले स्वास्थ्य जांच को अनिवार्य किया है।
ऋषिकेश में चारधाम यात्रियों के लिए कौन-कौन सी जांच होती है?
ऋषिकेश के ट्रांजिट कैंप में मुख्यतः ब्लड प्रेशर (बीपी) और ब्लड शुगर की जांच की जाती है। इसके अलावा घुटने-कमर दर्द और सांस की बीमारी के मरीजों को भी परामर्श और दवाएं दी जाती हैं।
चारधाम यात्रा में किस उम्र के लोगों की जांच जरूरी है?
50 वर्ष से अधिक आयु के सभी तीर्थयात्रियों की स्वास्थ्य जांच अनिवार्य है। 70 वर्ष से अधिक उम्र के बीपी और शुगर रोगियों को विशेष दवाएं और सख्त चिकित्सा सलाह दी जाती है।
चारधाम यात्रा के दौरान सांस की बीमारी वाले मरीजों को क्या सलाह है?
सांस की बीमारी से पीड़ित श्रद्धालुओं को रुक-रुककर यात्रा करने की सलाह दी गई है। ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी से स्थिति गंभीर हो सकती है, इसलिए चिकित्सक की सलाह के बिना यात्रा न करें।
ऋषिकेश में चारधाम यात्रा के लिए कितनी मेडिकल टीमें तैनात हैं?
ऋषिकेश में फिलहाल 5 मेडिकल टीमें श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य जांच में तैनात हैं। अब तक एक हजार से अधिक तीर्थयात्रियों की जांच और ओपीडी में उपचार किया जा चुका है।
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