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क्या एनसीपी नेता अमोल मिटकरी का बयान महाराष्ट्र में भाषा विवाद को बढ़ाएगा?

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क्या एनसीपी नेता अमोल मिटकरी का बयान महाराष्ट्र में भाषा विवाद को बढ़ाएगा?

सारांश

क्या एनसीपी नेता अमोल मिटकरी का बयान महाराष्ट्र में चल रहे भाषा विवाद को और बढ़ाएगा? जानें इस बयान के पीछे की सच्चाई और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य।

मुख्य बातें

मराठी बोलने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
भाषा विवाद ने सियासत में हलचल मचाई है।
गांधी के विचारों की महत्ता को दोहराया गया है।
सामाजिक एकता के लिए जिम्मेदारी की आवश्यकता है।
ठाकरे बंधुओं की एकता पर सवाल उठाए गए हैं।

मुंबई, 7 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र में चल रहे भाषा विवाद के बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ के बयानों ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। भाजपा के इन वरिष्ठ नेताओं के बयानों पर अजित पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता अमोल मिटकरी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि आप महाराष्ट्र में रहना चाहते हैं, तो मराठी बोलना आवश्यक है।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा था, "हिंदी भाषी लोगों को मुंबई में मारने वाले, यदि हिम्मत है तो महाराष्ट्र में उर्दू भाषियों को मार कर दिखाओ।" वहीं, पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ ने कहा था, "दम है तो मुझे महाराष्ट्र से निकालकर दिखाए।"

ये बयानों उस समय आए हैं जब हाल ही में मुंबई के एक दुकानदार पर मनसे के कार्यकर्ताओं द्वारा हमला किया गया था।

एनसीपी नेता अमोल मिटकरी ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "मुझे अपनी मातृभाषा मराठी पर गर्व है। महाराष्ट्र में रहने वाले 90 प्रतिशत मुसलमान भी मराठी में बात करते हैं। यदि आप महाराष्ट्र में रहते हैं और यहां का भोजन करते हैं, लेकिन फिर भी मराठी नहीं बोलते, तो यह बिल्कुल गलत है। यदि मराठी नहीं आती तो ट्यूशन लीजिए। महाराष्ट्र में रहना है तो मराठी तो बोलनी ही होगी।"

धीरेंद्र शास्त्री के हिंदू राष्ट्र वाले बयान पर एनसीपी नेता ने कहा कि भगवा वस्त्र पहनकर कोई संत नहीं बन जाता। यह हिंदू राष्ट्र नहीं है, यह भारत राष्ट्र है जो संविधान से चलता है। वे प्रवचन देकर धन कमाते हैं, लेकिन बांटने का प्रयास न करें तो अच्छा है। हिंदू राष्ट्र बनाने का सपना पूरा नहीं होगा।

पुणे में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर हुए हमले पर उन्होंने कहा कि जब तक सूरज-चांद रहेगा, गांधी के विचार भी जीवित रहेंगे। 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' जैसी फिल्मों में भी गांधी के विचार जीवित हैं। गांधी को कोई नहीं मिटा सकता।

ठाकरे बंधुओं के एक साथ आने पर महा विकास अघाड़ी में दरार को लेकर उन्होंने कहा कि दरार तो आ चुकी है। जिस दिन ठाकरे बंधु एक मंच पर थे, वहां पर कांग्रेस की ओर से कोई नेता मौजूद नहीं था। उन्होंने कहा कि मंच पर सुप्रिया सुले और अन्य नेता उपस्थित थे।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं दूसरी ओर यह पहचान और संस्कृति का भी सवाल है। ऐसे में, नेताओं को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और समाज में एकता बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।
RashtraPress
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