प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल चुनाव में आरएसपी की सफलता पर दी बधाई, बढ़ाएंगे सहयोग
सारांश
Key Takeaways
- आरएसपी की जीत नेपाल की राजनीति में एक नया अध्याय है।
- प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत करने का आश्वासन दिया।
- महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में वृद्धि ने नई संभावनाएं खोली हैं।
- बालेंद्र शाह की नागरिकता को लेकर चर्चाएं जारी हैं।
- राजनीतिक दलों को महिलाओं के लिए उपयुक्त अवसर प्रदान करने की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। नेपाल के हालिया संसदीय चुनावों में राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी (आरएसपी) की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी के नेताओं को बधाई दी। उन्होंने पार्टी के सदस्यों से बातचीत करते हुए चुनावी सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं और भारत-नेपाल संबंधों को और मजबूत करने की आशा व्यक्त की।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' पर लिखा, "आरएसपी के चेयरमैन रबी लामिछाने और सीनियर नेता बालेंद्र शाह से फोन पर संवाद हुआ। दोनों को उनकी चुनावी जीत और आरएसपी की शानदार सफलता के लिए बधाई दी। उन्होंने नई सरकार के लिए शुभकामनाएं दीं और भारत के वादे के बारे में बताया कि हम दोनों देशों की खुशहाली और तरक्की के लिए मिलकर काम करेंगे। मुझे विश्वास है कि हमारे प्रयासों से भारत-नेपाल के रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंचेंगे।"
गौरतलब है कि राजनीतिक दलों पर अक्सर यह आरोप लगाया जाता है कि वे महिलाओं को उन सीटों पर चुनाव लड़ाने के लिए प्रेरित करते हैं, जहां जीत की संभावना कम होती है। लेकिन नेपाल के हालिया चुनावों में आरएसपी का प्रदर्शन इस धारणा को चुनौती देता है।
पार्टी की 16 महिला उम्मीदवारों में से 13 ने जीत हासिल की है, जो नेपाल की चुनावी राजनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
द काठमांडू पोस्ट के अनुसार, 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' चुनाव में पार्टी की महिला उम्मीदवारों को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हुआ और अधिकांश विजेताओं ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को बड़े अंतर से हराया।
नेपाल चुनावों के परिणामों से यह स्पष्ट होता है कि नेपाल की नई राजनीति में महिलाओं की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। आरएसपी की महिला उम्मीदवारों की सफलता न केवल पार्टी के संगठनात्मक विस्तार को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि नेपाली मतदाता अब नए चेहरों और महिला नेतृत्व को स्वीकारने के लिए अधिक तैयार हैं।
हालांकि, बालेंद्र शाह की जीत के बाद उनकी नागरिकता और कलाकार से राजनीतिक छवि पर चर्चाएं भी हो रही हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बालेंद्र शाह के उपनाम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनके मूल नागरिकता प्रमाण पत्र (2006) में पहले 'साह' नाम था, जिसे बाद में 'शाह' में बदल दिया गया।