क्या नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते के खिलाफ उठाए जा रहे सवाल गुमराह करने वाले हैं?: पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग

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क्या नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते के खिलाफ उठाए जा रहे सवाल गुमराह करने वाले हैं?: पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग

सारांश

पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते चंद्र कुमार बोस को नागरिकता के लिए तलब किए जाने के दावे को गुमराह भरा बताया है। क्या यह राजनीतिक विवाद है या महज अफवाह? जानें पूरी कहानी!

Key Takeaways

  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस का परिवार भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण है।
  • चुनाव आयोग द्वारा उठाए गए सवालों का महत्व है।
  • राजनीतिक विवादों में सही जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है।
  • अल्पसंख्यक मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है।
  • सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों से बचना चाहिए।

कोलकाता, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते चंद्र कुमार बोस को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए तलब किए जाने का दावा गुमराह करने वाला है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक उपयोगकर्ता ने यह दावा किया कि चंद्र कुमार बोस को चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर सुनवाई के लिए बुलाया गया है।

इस पोस्ट में कहा गया था कि यह एसआईआर सुनवाई नहीं, बल्कि भाजपा द्वारा प्रायोजित अपमान है। यदि चुनाव आयोग के अनुसार नेताजी का परिवार 'पर्याप्त भारतीय' नहीं है, तो फिर कौन होगा?

इसके जवाब में, पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग ने कहा कि यह दावा गुमराह करने वाला है। गिनती के फॉर्म में स्पष्ट है कि वोटर ने लिंकेज कॉलम को खाली छोड़ दिया है, इसलिए चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन के अनुसार, उन्हें अन्य इसी प्रकार के वोटरों के साथ सुनवाई के लिए बुलाया गया है।

इस बीच, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) पर आरोप लगाया कि वे जानबूझकर अल्पसंख्यक मतदाताओं को निशाना बनाकर उनके नाम हटाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अल्पसंख्यक बहुल मालदा जिले में लगभग 90,000 मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय की शिकायतें पूरी तरह से जायज हैं। इस समुदाय के मतदाताओं को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अकेले मालदा जिले में 90,000 मतदाताओं के नाम हटाने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही, मतुआ, राजवंशी और आदिवासी समुदायों जैसे पिछड़े वर्गों के मतदाताओं को भी निशाना बनाया जा रहा है। यहां तक कि अमर्त्य सेन और कवि जॉय गोस्वामी जैसे प्रसिद्ध व्यक्तियों को भी नहीं बख्शा जा रहा है।

Point of View

एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम भारतीय इतिहास में अमिट है, और ऐसे आरोपों से उनकी विरासत को चोट पहुँच सकती है। यह आवश्यक है कि हम तथ्यों को ध्यान से समझें और राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर सही जानकारी प्राप्त करें।
NationPress
19/01/2026

Frequently Asked Questions

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते को क्यों तलब किया गया?
चुनाव आयोग का दावा है कि उन्हें नागरिकता साबित करने के लिए नहीं, बल्कि गिनती के फॉर्म में खामियों के कारण तलब किया गया है।
क्या यह राजनीतिक विवाद है?
हां, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे भाजपा द्वारा प्रायोजित अपमान बताया है।
अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम हटाने की जानकारी क्या है?
मुख्यमंत्री ने बताया कि मालदा जिले में लगभग 90,000 मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं।
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