भारत में छात्रों के लिए जैश-ए-मोहम्मद की लोन वुल्फ नेटवर्क बनाने की खतरनाक योजना का खुलासा
सारांश
Key Takeaways
- जैश-ए-मोहम्मद का छात्रों को लक्ष्य बनाना एक गंभीर चिंता है।
- इस संगठन ने पहले ही 2,500 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट जुटा लिया है।
- छात्रों को कट्टरपंथी बनाने की योजना दीर्घकालिक है।
- संगठन लोन वुल्फ रणनीति पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
- अगर यह साजिश सफल होती है, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनेगा।
नई दिल्ली, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस):। जैश-ए-मोहम्मद के फरीदाबाद मॉड्यूल मामले की जांच में यह सामने आया है कि इस आतंकी संगठन ने एक मेडिकल संस्थान में घुसपैठ की और डॉक्टरों को भारत में हमले करने के लिए अपने साथ जोड़ लिया था।
इस मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस “व्हाइट-कॉलर मॉड्यूल” ने लगभग 2,500 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट एकत्र किया था और दिल्ली एवं आस-पास के क्षेत्रों में कई हमले करने की योजना बना रहा था।
खुफिया एजेंसियों को एक और साजिश का पता चला है, जिसमें जेईएम स्कूलों और कॉलेजों में घुसपैठ कर छात्रों को कट्टरपंथ की ओर मोड़ने की योजना बना रही थी। संगठन ने अपने प्रचार सामग्री के माध्यम से कुछ छात्रों को भर्ती करने की कोशिश की है, जिससे वे अपने मित्रों के बीच भी उसकी विचारधारा फैला सकें।
एक अधिकारी के अनुसार, छात्रों को शामिल करने की यह रणनीति दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है। यह रणनीति पहले जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा द्वारा पाकिस्तान में अपनाई गई थी और अब इसे भारत में लागू करने का प्रयास किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, युवा छात्रों को कट्टरपंथ की ओर मोड़ने से इन संगठनों को लंबे समय में लाभ होता है। जब ये छात्र 20-25 वर्ष के होते हैं, तब वे इतने कट्टर बन चुके होते हैं कि देशभर में हमले करने के लिए तैयार हो जाते हैं।
हाल ही में, महाराष्ट्र एटीएस ने इस सप्ताह मुंबई से एक छात्र को गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान अयान शेख के रूप में हुई है, जो पिछले छह महीनों से मुंबई में रह रहा था।
जांच में यह पता चला कि वह कई युवाओं के संपर्क में था और उन्हें कट्टरपंथ की ओर मोड़ने तथा जेईएम में भर्ती करने की कोशिश कर रहा था। उसने दो छात्रों को कट्टरपंथी बना लिया था और उन्हें आतंकवादी प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजने के लिए भी राजी कर लिया था। एटीएस ने समय पर इस साजिश को नाकाम कर दिया।
इंटेलीजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि इस प्रकार के प्रयास देश के कई राज्यों में किए जा रहे हैं। जैश-ए-मोहम्मद को लगता है कि छात्र आसानी से सुरक्षा एजेंसियों की नजर में नहीं आते, इसलिए वह धीरे-धीरे कट्टरपंथी युवाओं की एक “फौज” तैयार करना चाहता है।
अधिकारियों के अनुसार, संगठन अचानक बड़ी संख्या में भर्ती नहीं करना चाहता, बल्कि अगले 5 से 10 वर्षों की योजना बनाकर धीरे-धीरे युवाओं को जोड़ रहा है, ताकि समय-समय पर हमले करने के लिए उसके पास पर्याप्त लोग मौजूद रहें।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इस योजना में बड़े मॉड्यूल बनाने के बजाय ‘लोन वुल्फ’ या दो लोगों की छोटी टीम पर जोर दिया जा रहा है। फरीदाबाद मामले से संगठन ने यह सीखा कि बड़े मॉड्यूल में ज्यादा लोगों के शामिल होने से संचार का ट्रैक खोने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे मॉड्यूल का पर्दाफाश हो सकता है।
इसलिए छात्र मॉड्यूल में हमलावरों को अकेले या ‘बडी पेयर’ के रूप में काम करने के लिए तैयार किया जाएगा। कई मामलों में हमलावर खुद लक्ष्य चुन सकते हैं या फिर उन्हें किसी हैंडलर से निर्देश मिल सकते हैं।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि संगठन आने वाले वर्षों में छात्रों का ऐसा नेटवर्क बनाने में सफल हो गया, तो यह देश की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक स्थिति बन सकती है। लंबे समय तक कट्टरपंथी बनाए गए इन युवाओं की प्रतिबद्धता बहुत मजबूत हो जाती है और उन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है।