मुंबई में जैश के स्लीपर एजेंट अयान शेख की गिरफ्तारी, युवाओं को आईएसआईएस में भर्ती कर रहा था
सारांश
Key Takeaways
- अयान शेख को मुंबई में गिरफ्तार किया गया।
- वह जैश-ए-मोहम्मद और आईएसआईएस के लिए काम कर रहा था।
- उसे युवाओं को कट्टरपंथ की ओर मोड़ने की जिम्मेदारी दी गई थी।
- पाकिस्तान और सऊदी अरब से आर्थिक मदद मिल रही थी।
- जांच अभी जारी है और और खुलासे हो सकते हैं।
मुंबई, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र में आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े ऑनलाइन नेटवर्क की जांच में महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) ने कई हैरान करने वाले तथ्य उजागर किए हैं। मुंबई में की गई छापेमारी के दौरान एटीएस ने इंजीनियरिंग छात्र अयान शेख को गिरफ्तार किया है, जिस पर पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) से संबंध रखने का आरोप लगाया गया है।
एटीएस की प्रारंभिक जांच से पता चला है कि अयान शेख पिछले लगभग छह महीनों से मुंबई में रहकर जैश-ए-मोहम्मद के लिए एक स्लीपर एजेंट के रूप में कार्यरत था। एजेंसी का दावा है कि उसे युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने और नए सदस्यों की भर्ती करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इस कार्य के तहत, वह अपने सहपाठियों और करीबी दोस्तों को लगातार आतंकवादी संगठन के लिए काम करने के लिए प्रेरित कर रहा था।
जांच में यह भी सामने आया है कि अयान शेख ने अपने दो दोस्तों को इस कदर प्रभावित किया कि वे विदेश जाने और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने की योजना बनाने लगे थे। एटीएस ने इन दोनों छात्रों के बयान दर्ज कर लिए हैं, लेकिन जांच एजेंसी के अनुसार, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वे किसी आतंकवादी गतिविधि में सक्रिय रूप से शामिल हुए थे।
एटीएस को यह भी जानकारी मिली है कि अयान को पाकिस्तान और सऊदी अरब से फंडिंग प्राप्त हो रही थी, जो क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से भेजी जा रही थी। एजेंसी अब उसके बैंक खातों और मनी ट्रेल की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसे कुल कितनी रकम प्राप्त हुई और वह किन-किन लोगों तक पहुंची।
जांच के दौरान अयान के मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं। एटीएस को उसके फोन में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना अजहर मसूद और अन्य आतंकवादी प्रचार सामग्री से संबंधित कई ऑडियो और वीडियो मिले हैं। इसके अलावा, वह टेलीग्राम चैनलों और अन्य एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर भी सक्रिय था, जहां कट्टरपंथी सामग्री साझा की जाती थी।
एजेंसी को कई चैट रिकॉर्ड भी मिले हैं, जो दर्शाते हैं कि आतंकवादी भर्ती को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा था। अयान इन प्लेटफार्मों पर युवाओं को जोड़ने और उन्हें आतंकवादी संगठनों के प्रचार वाले समूह में शामिल कराने की कोशिश कर रहा था।
एटीएस के मुताबिक, इन एन्क्रिप्टेड समूहों में कई विदेशी नागरिक और संदिग्ध फैसिलिटेटर भी शामिल थे, जिन्हें आतंकवादी संगठनों के स्लीपर नेटवर्क और भर्ती सेल का हिस्सा माना जा रहा है। जांच में यह भी सामने आया है कि देश के विभिन्न राज्यों के कई युवा इन समूहों के सदस्य थे।
एटीएस ने इस मामले से संबंधित जानकारी अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा की है। एजेंसी का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।