क्या नोएडा में निवेश के नाम पर 12 करोड़ की साइबर ठगी हुई? चीनी गिरोह से जुड़ा आरोपी गिरफ्तार!

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क्या नोएडा में निवेश के नाम पर 12 करोड़ की साइबर ठगी हुई? चीनी गिरोह से जुड़ा आरोपी गिरफ्तार!

सारांश

नोएडा में साइबर ठगी का यह मामला एक बड़े गिरोह से जुड़ा हुआ है। आरोपी ने शेयर मार्केट में निवेश का लालच देकर 12 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई की और आरोपी को गिरफ्तार किया। जानें इस ठगी के पीछे की सच्चाई और पुलिस की कार्रवाई के बारे में।

Key Takeaways

  • साइबर ठगी में सतर्कता आवश्यक है।
  • सिर्फ प्रमाणित कंपनियों में ही निवेश करें।
  • संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत दें।
  • साइबर अपराधियों का नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है।
  • पुलिस ने त्वरित कार्रवाई से आरोपी को गिरफ्तार किया।

नोएडा, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना साइबर क्राइम पुलिस को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। शेयर मार्केट में निवेश कर बड़ा मुनाफा कमाने का लालच देकर लगभग 12 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाले अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े एक अभियुक्त को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपी का नाम राजकुमार कुमावत है, जिसे हैदराबाद से पकड़ा गया। आरोपी के पास से घटना में इस्तेमाल एक मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी शुक्रवार को मैनुअल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर की गई। जांच में पता चला कि आरोपी चीनी साइबर गिरोह से संबंधित था, जो व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को निवेश ग्रुप में शामिल करता था।

पीड़ितों को पहले बड़े मुनाफे के स्क्रीनशॉट और आंकड़े दिखाए जाते थे और फिर धीरे-धीरे भारी रकम निवेश के लिए प्रेरित किया जाता था। इस मामले में पीड़ित ने 3 दिसंबर 2025 को थाना साइबर क्राइम, गौतमबुद्धनगर में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, साइबर ठगों ने 35 करोड़ रुपये तक के मुनाफे का झांसा देकर विभिन्न खातों में कुल 12 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए। जैसे ही रकम जमा हुई, संपर्क तोड़ दिया गया।

पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए जांच के दौरान संदिग्ध बैंक खातों को तुरंत फ्रीज किया। पूछताछ में आरोपी राजकुमार कुमावत ने खुलासा किया कि उसने अपने साथी बुक्का मनोहर के साथ मिलकर “मून ब्लॉसम” नाम से एक फर्जी कंपनी बनाई थी। इस कंपनी के माध्यम से साइबर फ्रॉड कर लगभग 1.22 करोड़ रुपये हासिल किए गए, जिन्हें आपस में बांट लिया गया।

इसके अलावा, इस पूरे नेटवर्क में कई अन्य आरोपी भी शामिल थे। पुलिस पहले से इस प्रकरण में 9 अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। एनसीआरपी पोर्टल की जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह से जुड़े बैंक खातों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में शिकायतें दर्ज हैं। तमिलनाडु में निवेश फ्रॉड से जुड़ी दो शिकायतों में करीब 2.76 करोड़ रुपये, जबकि दिल्ली में दर्ज एक शिकायत में 6 लाख रुपये से अधिक की ठगी की पुष्टि हुई है।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्हाट्सएप या टेलीग्राम लिंक पर क्लिक न करें, केवल प्रमाणित कंपनियों में ही निवेश करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर क्राइम थाना या एनसीआरपी पोर्टल पर दें।

Point of View

यह घटना हमें यह सिखाती है कि हमें ऑनलाइन निवेश के मामलों में सतर्क रहना चाहिए। साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के बीच, लोगों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है। सरकार को भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
NationPress
17/01/2026

Frequently Asked Questions

इस साइबर ठगी का तरीका क्या था?
आरोपी लोगों को शेयर मार्केट में निवेश का लालच देकर उन्हें धोखा देते थे और बड़े मुनाफे के झांसे में उन्हें भारी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित करते थे।
पुलिस ने कितने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है?
पुलिस ने अभी तक इस प्रकरण में 9 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है और अन्य की तलाश जारी है।
इस गिरोह से जुड़े बैंक खातों के खिलाफ कहां-कहां शिकायतें हैं?
इस गिरोह से जुड़े बैंक खातों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें तमिलनाडु और दिल्ली शामिल हैं।
साइबर ठगों से कैसे बचा जा सकता है?
नागरिकों को अनजान व्हाट्सएप या टेलीग्राम लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए, और केवल प्रमाणित कंपनियों में ही निवेश करना चाहिए।
क्या आरोपी ने फर्जी कंपनी बनाई थी?
हाँ, आरोपी ने अपने साथी के साथ मिलकर 'मून ब्लॉसम' नाम से एक फर्जी कंपनी बनाई थी।
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