ओडिशा के मुख्यमंत्री का अंबेडकर को श्रद्धांजलि, भुवनेश्वर में नया अंबेडकर भवन

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ओडिशा के मुख्यमंत्री का अंबेडकर को श्रद्धांजलि, भुवनेश्वर में नया अंबेडकर भवन

सारांश

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अंबेडकर की जयंती पर उनके विचारों की महत्ता को बताया और भुवनेश्वर में नए अंबेडकर भवन की घोषणा की। यह भवन समानता और न्याय को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

Key Takeaways

  • अंबेडकर भवन का निर्माण समानता को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा।
  • मुख्यमंत्री ने दलित और आदिवासी वर्गों के विकास पर जोर दिया।
  • नए आरक्षण प्रणाली को ऐतिहासिक बताया गया है।
  • 6,649 करोड़ रुपए का बजट अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आवंटित किया गया।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने अंबेडकर के जीवन से जुड़े पंचतीर्थ का विकास किया है।

भुवनेश्वर, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार को कहा कि बीआर अंबेडकर केवल एक नाम नहीं हैं, बल्कि वे एक विचारधारा का प्रतीक हैं जो समानता की दिशा में मार्गदर्शन करती है।

मुख्यमंत्री ने जयदेव भवन में आयोजित भारत रत्न बीआर अंबेडकर की जयंती के राज्य-स्तरीय समारोह में यह बात कही।

सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने यह घोषणा की कि भुवनेश्वर के खारवेल नगर में एक नया 'अंबेडकर भवन' बनाया जाएगा और इसके लिए सामान्य प्रशासन एवं लोक शिकायत विभाग को एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

उन्होंने कहा, "समानता और न्याय पर आधारित समाज की स्थापना करना ही बाबासाहेब को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है। उन्होंने समाज में समानता लाने के लिए अपना पूरा जीवन संघर्ष किया। भारतीय संविधान हर नागरिक के लिए समान अधिकार और न्याय सुनिश्चित करता है।"

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों का विकास केवल डॉ. अंबेडकर की दूरदृष्टि के कारण संभव हो पाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सबसे वंचित वर्ग के उत्थान के बिना 'समृद्ध ओडिशा' का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।

दलितों और अन्य वंचित समुदायों के विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा में वर्तमान भाजपा सरकार के गठन के बाद से दलितों और अन्य हाशिये पर पड़े समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए अधिकांश केंद्रीय योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया गया है।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के विकास के लिए 2026-27 के बजट में 6,649 करोड़ रुपए से अधिक का आवंटन किया गया है। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

राज्य सरकार द्वारा हाल ही में इंजीनियरिंग और चिकित्सा क्षेत्रों में घोषित नई आरक्षण प्रणाली को एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभा किसी जाति या धर्म तक सीमित नहीं होती और सही अवसर मिलने पर हर कोई प्रगति कर सकता है। उन्होंने बताया कि डॉ. अंबेडकर को 1990 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था, उस समय जब तत्कालीन सरकार को भाजपा का समर्थन प्राप्त था।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि संविधान के निर्माता और राष्ट्रीय एकता के प्रबल समर्थक होने के बावजूद, अतीत में अंबेडकर की जानबूझकर उपेक्षा की गई थी। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने के बाद से, अंबेडकर की विरासत और सम्मान को पुनर्स्थापित करने के प्रयास किए गए हैं।

मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अंबेडकर के जीवन से जुड़े पांच प्रमुख स्थलों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित किया है। साथ ही यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार की कई योजनाओं ने भारत के लिए अंबेडकर के दृष्टिकोण को साकार करने में मदद की है।

Point of View

NationPress
22/04/2026

Frequently Asked Questions

अंबेडकर भवन का उद्देश्य क्या है?
अंबेडकर भवन का उद्देश्य समानता और न्याय पर आधारित समाज का निर्माण करना है।
मुख्यमंत्री ने कब और कहाँ यह घोषणा की?
मुख्यमंत्री ने 14 अप्रैल को भुवनेश्वर में आयोजित अंबेडकर की जयंती समारोह में यह घोषणा की।
सरकार ने दलितों और गरीबों के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने दलितों और अन्य वंचित समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्रीय योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया है।
क्या नई आरक्षण प्रणाली को लेकर कोई जानकारी है?
हाल ही में इंजीनियरिंग और चिकित्सा क्षेत्रों में नई आरक्षण प्रणाली को लागू किया गया है, जो एक ऐतिहासिक कदम है।
डॉ. अंबेडकर को कब भारत रत्न से सम्मानित किया गया?
डॉ. अंबेडकर को 1990 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
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