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ओडिशा में महिला आरक्षण बिल पर सीएम का विपक्ष पर हमला, 17 अप्रैल को कहा 'काला दिवस'

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ओडिशा में महिला आरक्षण बिल पर सीएम का विपक्ष पर हमला, 17 अप्रैल को कहा 'काला दिवस'

सारांश

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने महिलाओं के लिए आरक्षण देने वाले संविधान संशोधन बिल को रोका है। 17 अप्रैल को उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया। क्या यह महिलाओं के अधिकारों के लिए एक बड़ा झटका है?

मुख्य बातें

महिलाओं के अधिकार को लेकर सीएम का बयान विपक्षी दलों का विरोध और आरोप 17 अप्रैल को काला दिन बताया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम का महत्व परिसीमन के बिना आरक्षण की स्थिति

भुवनेश्वर, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने रविवार को कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में आरक्षण देने वाले संविधान (131वां संशोधन) बिल को रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं इसका जवाब वोट के माध्यम से देंगी।

मुख्यमंत्री माझी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 17 अप्रैल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काला दिन बताया और कहा कि विपक्ष ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को रोककर देश की महिलाओं के लिए एक बड़ा अन्याय किया।

उन्होंने कहा, "17 अप्रैल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काला दिन था क्योंकि इसी दिन कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी दलों ने करोड़ों महिलाओं के सपनों को कुचल दिया और 131वां संविधान संशोधन गिरा दिया। इसके साथ ही, उन्होंने इस हार को मुस्कान के साथ मनाया।"

सीएम ने स्पष्ट किया कि यह महिलाओं की हार नहीं है, बल्कि विपक्षीय दलों के अहंकार और गलत सोच का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि महिलाएं इस विश्वासघात का जवाब वोट के माध्यम से देंगी।

उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम की हार के बाद विपक्ष के जश्न को 25 जून 1975 को आपातकाल के दौरान कांग्रेस के जश्न से तुलना की।

मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि इतिहास से यह स्पष्ट होता है कि विपक्षी दलों की महिला सशक्तिकरण की बातें केवल नारों तक सीमित हैं और कई बार यह एक दिखावा भी लगता है। जब महिलाओं को असली अधिकार देने की बात आती है, तो वे कुछ और कहते हैं और करते कुछ और हैं।

उन्होंने कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी पर भी आरोप लगाया कि महिला होने के बावजूद उन्होंने इस अधिनियम का विरोध किया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित भाजपा नेता और सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की इच्छा जताई थी, ताकि इसका प्रभाव आगामी चुनावों में दिखाई दे, लेकिन विपक्ष ने इसे रोककर देश की महिलाओं के साथ विश्वासघात किया।

उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा, "ममता बनर्जी जैसी महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद, पार्टी ने इस बिल का समर्थन नहीं किया।"

परिसीमन बिल को लेकर उठाए गए सवालों पर उन्होंने कहा कि सरकार ने देरी से बचने के लिए 2011 की जनगणना के आधार पर काम करने का प्रस्ताव रखा था और सीटों की संख्या को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का सुझाव दिया था। इस तरह से दक्षिणी राज्यों के हितों की रक्षा होगी, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परिसीमन के बिना महिला आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि वर्तमान जनसंख्या के आधार पर सीटों का निर्धारण आवश्यक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह देखना दिलचस्प होगा कि महिलाएं इस पर कैसे प्रतिक्रिया देती हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण बिल क्या है?
महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण प्रदान करना है।
17 अप्रैल को क्या हुआ?
17 अप्रैल को विपक्ष ने महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन बिल को रोक दिया, जिसे सीएम ने काला दिन बताया।
सीएम का क्या कहना है?
सीएम मोहन चरण माझी ने कहा है कि यह महिलाओं की हार नहीं, बल्कि विपक्ष के अहंकार का प्रतीक है।
क्या कांग्रेस ने इस बिल का विरोध किया?
जी हां, कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी दलों ने इस बिल का विरोध किया।
महिला आरक्षण कब लागू होगा?
महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन आवश्यक है, जो जनसंख्या के आधार पर किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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