क्या प्रधानमंत्री पर अभद्र टिप्पणी करना सही है? कांग्रेस नेता विनोद सुल्तानपुरी का बयान

सारांश
Key Takeaways
- प्रधानमंत्री मोदी पर की गई अभद्र टिप्पणियाँ अस्वीकार्य हैं।
- कांग्रेस विधायक ने इस विषय पर जिम्मेदारी से बोलने की आवश्यकता की बात की।
- राजनीति में गरिमा बनाए रखना आवश्यक है।
- सोशल मीडिया पर अभद्रता पर नियंत्रण आवश्यक है।
- भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है।
भुवनेश्वर, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। 'वोटर अधिकार यात्रा' के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अभद्र टिप्पणी की गई, जिससे राजनीतिक हलचल मच गई है। भाजपा इसे हताशा का परिणाम मानती है, जबकि कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक के नेता इसे गलत ठहरा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के कांग्रेस विधायक विनोद सुल्तानपुरी ने कहा कि इस प्रकार की टिप्पणियाँ अस्वीकार्य हैं। उन्होंने ओडिशा में एक सम्मेलन में कहा कि यह उचित नहीं है कि कांग्रेस के लोग ऐसी बातें कहें। सोशल मीडिया पर कोई विशेष प्रतिबंध नहीं है, इसलिए हमें जिम्मेदारी से काम लेना चाहिए। किसी को भी अपनी बात ठीक से नहीं कह पाने पर अभद्र भाषा का सहारा लेने का अधिकार नहीं है। यह मुद्दा केवल कांग्रेस के सदस्यों से जोड़ना सही नहीं है।
सम्मेलन में उपस्थित हिमाचल प्रदेश कांग्रेस विधायक सुदर्शन सिंह बबलू ने कहा कि राजनीति में किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं बोलना चाहिए, बल्कि राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। वहीं, बिहार की राजद विधायक रेखा पासवान ने कहा कि बिहार में चुनाव से पहले एसआईआर प्रक्रिया का क्या मतलब है? उन्होंने कहा कि जब राहुल गांधी लोगों को जागरूक करने के लिए वोटर अधिकार यात्रा निकाल रहे हैं, तो भाजपा बौखला गई है। इसी बौखलाहट में भाजपा समर्थकों ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमला किया। इस बार बिहार की जनता बदलाव चाहती है।
गृह मंत्री अमित शाह पर महुआ मोइत्रा की विवादित टिप्पणी पर रेखा पासवान ने सवाल उठाया कि क्या इसका कोई साक्ष्य है या यह बस अफवाह है। पीएम मोदी पर की गई अभद्र टिप्पणी पर भी सवाल उठाए गए हैं। सोनिया गांधी पर की गई टिप्पणियों पर क्या कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? राजद विधायक सतीश कुमार ने सम्मेलन को एक सकारात्मक पहल बताया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सराहनीय काम किया है।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री की वोटर यात्रा को घुसपैठिया यात्रा बताने पर कहा कि ऐसा कहने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है। देश की बागडोर 11 साल से भाजपा के पास है, फिर घुसपैठिया कैसे आ गया? यह सीधे तौर पर सीमा सुरक्षा बलों की निष्ठा और ईमानदारी पर सवाल खड़ा करता है। महुआ मोइत्रा पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर उन्होंने कहा कि कोई भी हिंसक संवाद सही नहीं होता है। लोकतंत्र में सहमति और असहमति हो सकती है, लेकिन उसका रास्ता अहिंसक होना चाहिए। यह माहौल पीएम मोदी ने तैयार किया है।