क्या झारखंड में नकली आईएएस अधिकारी बनकर लोगों को ठगने वाला आरोपी गिरफ्तार हुआ?
सारांश
Key Takeaways
- फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर ठगी करना एक गंभीर अपराध है।
- पुलिस को ऐसी घटनाओं की जांच करनी चाहिए।
- समाज को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
- संविधान की गरिमा को बनाए रखना जरूरी है।
- यूपीएससी परीक्षा में असफलता के बाद भी ठगने का प्रयास करना गलत है।
पलामू, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के पलामू जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ हुसैनाबाद पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो पिछले कई वर्षों से खुद को आईएएस और आईपीटीएएफएस अधिकारी बताकर लोगों को ठग रहा था। आरोपी राजेश कुमार ने यूपीएससी परीक्षा में असफल रहने के बाद यह फर्जीवाड़ा शुरू किया था।
हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के कुकही गांव निवासी राजेश कुमार शुक्रवार को जमीन विवाद की पैरवी कराने के लिए थाने पहुंचा। उसने खुद को 2014 बैच के ओडिशा कैडर का आईएएस अधिकारी बताते हुए भुवनेश्वर में सीएओ पद पर तैनात होने का दावा किया। थाना प्रभारी के सामने बातचीत के दौरान उसकी पोस्टिंग, अधिकारियों और अन्य जानकारी में कई विरोधाभास नजर आए। शक होने पर सख्त पूछताछ की गई, तो राजेश फंस गया।
जांच में पता चला कि राजेश कुमार ने चार बार यूपीएससी परीक्षा दी, लेकिन सफल नहीं हो सका। समाज और परिवार के सामने सफल दिखने के लिए उसने फर्जी आईएएस अधिकारी बनने का नाटक रचा। वह फर्जी आईडी कार्ड, चाणक्य आईएएस एकेडमी का कार्ड, लाइब्रेरी कार्ड और ‘भारत सरकार’ लिखी कार (जिस पर फर्जी नीला नेम बोर्ड लगा था, जिसमें ‘सीएओ दूरसंचार विभाग’ लिखा था) से घूमता था। वह खुद को आईएएस के साथ-साथ आईपीटीएएफएस (भारतीय डाक और टेलीग्राफ सेवा) अधिकारी भी बताता था।
एसडीपीओ हुसैनाबाद एस. मोहम्मद याकूब ने बताया कि तलाशी के दौरान आरोपी के पास से फर्जी आईडी कार्ड, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज बरामद हुए। जांच से पुष्टि हुई कि वह वर्षों से इस फर्जीवाड़े से लोगों को प्रभावित कर रहा था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि आरोपी ने कितने लोगों को ठगा, किन-किन जगहों पर खुद को अधिकारी बताकर लाभ उठाया और क्या कोई आर्थिक ठगी भी की गई।
एसडीपीओ याकूब ने कहा, "यह मामला संवैधानिक पदों की गरिमा से खिलवाड़ जैसा है। हम विधिसम्मत कार्रवाई कर रहे हैं। आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और आगे की जांच जारी है।"