प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना: पलामू में मछली उत्पादन का नया युग

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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना: पलामू में मछली उत्पादन का नया युग

सारांश

पलामू में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत बायोफ्लॉक तकनीक ने मछली उत्पादन में एक नई दिशा दी है, जिससे किसानों की आय में अत्यधिक वृद्धि हुई है। जानें इस योजना के प्रभाव और लाभों के बारे में।

Key Takeaways

  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त किया है।
  • बायोफ्लॉक तकनीक से कम पानी में अधिक उत्पादन संभव हुआ है।
  • किसानों की आय में 30%25 तक वृद्धि हुई है।
  • इस योजना से रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हुए हैं।
  • स्थानीय स्तर पर फीड की उपलब्धता से लागत में कमी आई है।

पलामू, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। झारखंड के पलामू जिले में इस योजना के तहत बायोफ्लॉक तकनीकआय में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है।

पलामू जिला लंबे समय से पानी की कमी से प्रभावित था, लेकिन प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत स्थापित आरएस बायोफ्लॉक टैंक ने यहाँ मछली उत्पादन में एक नई पहचान स्थापित की है। विशेषकर चैनपुर क्षेत्र में इस तकनीक का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

योजना के लाभार्थी मुकेश कुमार ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "इस योजना की शुरुआत लगभग छह साल पहले हुई थी। बायोफ्लॉक टैंक के माध्यम से कम पानी में अधिक मछली उत्पादन संभव हो रहा है। पहले मरी हुई मछली 100 रुपये प्रति किलो बिकती थी, अब जीवित मछली 200 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। इससे हमारी आय में लगभग 30 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।"

मुकेश कुमार ने आगे कहा कि वे चाहते हैं कि आदिवासियों की तरह ओबीसी वर्ग के किसानों को भी 90 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ मिले, ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना से जुड़ सकें।

इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और कच्चे माल की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है। अन्य लाभार्थी शशिकांत गुप्ता ने बताया, "पहले मछली पालन के लिए फीड आंध्र प्रदेश, बंगाल और छत्तीसगढ़ से मंगाना पड़ता था, जिससे लागत बढ़ जाती थी। अब स्थानीय स्तर पर फीड उपलब्ध होने से परिवहन खर्च कम हो गया है और उत्पादन भी आसान हो गया है। कम पूंजी में व्यवसाय शुरू करने वाले लोगों के लिए यह योजना बेहद लाभकारी साबित हो रही है।"

बायोफ्लॉक तकनीक में बैक्टीरिया की मदद से मछली के अपशिष्ट को पोषक तत्वों में बदला जाता है, जो मछलियों के लिए प्राकृतिक भोजन का काम करता है। इससे पानी को बार-बार बदलने की जरूरत नहीं पड़ती और उत्पादन लागत काफी कम हो जाती है। पलामू में यह तकनीक सूखा प्रभावित क्षेत्र के लिए एक वरदान साबित हो रही है।

केंद्र सरकार की इस योजना ने न केवल मछली उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि ग्रामीण युवाओं को नौकरी के नए अवसर भी प्रदान किए हैं। पलामू के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ मछली पालन को अतिरिक्त आय का साधन बना रहे हैं।

Point of View

बल्कि किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण भी देती है। इससे किसानों की आय में वृद्धि और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
NationPress
18/04/2026

Frequently Asked Questions

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना क्या है?
यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई है, जिसमें मछली उत्पादन के लिए तकनीकी और आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
बायोफ्लॉक तकनीक कैसे काम करती है?
इस तकनीक में बैक्टीरिया की मदद से मछली के अपशिष्ट को पोषक तत्वों में बदला जाता है, जो मछलियों के लिए प्राकृतिक भोजन का काम करता है।
इस योजना से किसानों को क्या लाभ होता है?
किसानों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और कच्चे माल की उपलब्धता जैसी सुविधाएँ मिलती हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है।
क्या योजना से रोजगार के अवसर बढ़े हैं?
हां, योजना ने ग्रामीण युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं।
पलामू में मछली उत्पादन की स्थिति क्या है?
पलामू में बायोफ्लॉक तकनीक ने मछली उत्पादन को बढ़ावा दिया है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
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