परिसीमन से दक्षिण भारतीय राज्यों की शक्ति में होगी वृद्धि, भ्रांतियों से बचें: अमित शाह

Click to start listening
परिसीमन से दक्षिण भारतीय राज्यों की शक्ति में होगी वृद्धि, भ्रांतियों से बचें: अमित शाह

सारांश

संसद में विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने परिसीमन के प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों की ताकत घटेगी नहीं, बल्कि बढ़ेगी। जानें इस महत्वपूर्ण बयान के पीछे की सच्चाई।

Key Takeaways

  • परिसीमन से दक्षिण राज्यों की शक्ति में सुधार होगा।
  • आंध्र प्रदेश की सीटें बढ़कर 38 होंगी।
  • तेलंगाना की सीटें 26 तक पहुंचेंगी।
  • तमिलनाडु की सीटें 59 होंगी।
  • जाति जनगणना का निर्णय लिया गया है।

नई दिल्ली, १६ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन पर चल रही बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का विस्तार से उत्तर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन के बाद दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक शक्ति में कमी नहीं आएगी, बल्कि यह और अधिक मजबूत होगी। साथ ही, उन्होंने विपक्ष को भ्रांति फैलाने से बचने की सलाह दी।

संसद में सदस्यों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि आंध्र प्रदेश की वर्तमान २५ सीटें, जो अभी ४.६० प्रतिशत प्रतिनिधित्व देती हैं, बढ़कर ३८ सीटें हो जाएंगी और उनकी हिस्सेदारी ४.६५ प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। इसी तरह, तेलंगाना की १७ सीटें, जिनकी मौजूदा क्षमता ३.१३ प्रतिशत है, बढ़कर २६ हो जाएंगी और ३.१८ प्रतिशत हो जाएंगी। केरल की २० सीटें, जो अभी ३.६८ प्रतिशत प्रतिनिधित्व देती हैं, बढ़कर ३० हो जाएंगी और लगभग ३.६७ प्रतिशत बनी रहेंगी, जबकि कर्नाटक की २८ सीटें ५.१५ प्रतिशत से बढ़कर ४२ सीटें हो जाएंगी और ५.१४ प्रतिशत के आसपास रहेंगी।

तमिलनाडु के संबंध में अमित शाह ने कहा कि वहां की ३९ सीटें, जिनकी वर्तमान क्षमता ७.१८ प्रतिशत है, बढ़कर ५९ हो जाएंगी और उनकी हिस्सेदारी ७.२३ प्रतिशत तक पहुंच जाएगी, जिससे राज्य को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के बारे में जो नैरेटिव फैलाया जा रहा है, वह पूरी तरह भ्रामक है, क्योंकि वर्तमान में ५४३ सदस्यीय लोकसभा में दक्षिण से १२९ सांसद हैं, जो २३.७६ प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। परिसीमन के बाद यह संख्या बढ़कर १९५ हो जाएगी और हिस्सेदारी २३.८७ प्रतिशत तक पहुंच जाएगी, यानी स्पष्ट रूप से दक्षिण की शक्ति में वृद्धि होगी।

गृह मंत्री ने अपने बयान में यह भी बताया कि मोदी कैबिनेट ने जाति जनगणना कराने का निर्णय लिया है और वर्तमान में जो जनगणना प्रक्रिया चल रही है, वह इसी आधार पर हो रही है, इसलिए इस मुद्दे पर किसी प्रकार का भ्रम फैलाने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परिसीमन आयोग से संबंधित कानून पहले की तरह ही है और उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का मौजूदा चुनावों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

Point of View

जो कि विपक्ष द्वारा फैलाए गए भ्रांतियों के विपरीत है। यह जानकारी महत्वपूर्ण है और यह दर्शाती है कि कैसे परिसीमन से राज्यों की शक्ति में वृद्धि संभव है।
NationPress
22/04/2026

Frequently Asked Questions

परिसीमन क्या है?
परिसीमन एक प्रक्रिया है जिसके तहत चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से निर्धारित किया जाता है।
अमित शाह ने परिसीमन पर क्या कहा?
अमित शाह ने कहा कि परिसीमन के बाद दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक ताकत में कमी नहीं आएगी, बल्कि यह बढ़ेगी।
जाति जनगणना का क्या महत्व है?
जाति जनगणना का महत्व सामाजिक और आर्थिक नीतियों के निर्माण में है, यह सही डेटा प्रदान करता है।
क्या परिसीमन का मौजूदा चुनावों पर प्रभाव पड़ेगा?
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि परिसीमन प्रक्रिया का मौजूदा चुनावों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
दक्षिण भारत में सीटों की संख्या कैसे बदलेगी?
दक्षिण भारत के राज्यों की सीटों की संख्या परिसीमन के बाद बढ़ जाएगी, जिससे उनकी राजनीतिक ताकत में वृद्धि होगी।
Nation Press