क्या पश्चिम बंगाल में हिंसा रोकने के लिए राज्यपाल ने एडवाइजरी जारी की?
सारांश
Key Takeaways
- राज्यपाल ने नई गाइडलाइन जारी की है।
- हिंसा और असामाजिक गतिविधियों को रोकने के उपाय सुझाए गए हैं।
- खुफिया तंत्र को मजबूत करने का सुझाव दिया गया है।
- स्थानीय नेताओं के साथ समन्वय पर जोर दिया गया है।
- कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ने से रोकना प्राथमिकता है।
कोलकाता, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में चुनावों से पहले कुछ क्षेत्रों में हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। इस पर विपक्ष सरकार और राज्य पुलिस पर विभिन्न आरोप लगा रहा है। अब राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने इस स्थिति को संभालने के लिए गाइडलाइन जारी की है।
गाइडलाइन में बताया गया है कि हाल की घटनाएं दर्शाती हैं कि असामाजिक और विघटनकारी ताकतें तेजी से सैकड़ों उग्र प्रदर्शनकारियों को इकट्ठा कर सकती हैं। इस तरह की घटनाएं आम लोगों के लिए संकट उत्पन्न करती हैं, सामान्य जीवन में बाधा डालती हैं और जान-माल के लिए खतरा बन सकती हैं।
राज्यपाल ने हिंसा को रोकने और इसके बढ़ने की स्थिति में नियंत्रण पाने के लिए सक्षम अधिकारियों के लिए निम्नलिखित परामर्श दिए हैं। इसमें खुफिया तंत्र को मजबूत करना, केंद्रीय और राज्य खुफिया एजेंसियों तथा स्थानीय मुखबिरों के नेटवर्क के बीच बेहतर समन्वय बरतने की सलाह दी गई है।
उन्होंने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों को वास्तविक समय में खुफिया जानकारी एकत्रित करने और उसका विश्लेषण करने की व्यवस्था बनानी चाहिए, ताकि किसी संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या का पहले से पता चल सके। मौजूदा संवेदनशील मुद्दों का अध्ययन किया जाना चाहिए और उन स्थानों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, जिन्होंने जनता को उकसाया है।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं काफी हद तक खुली और संवेदनशील हैं। सीमा के दोनों ओर से जुड़े मुद्दों को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्य के बीच संयुक्त खुफिया तंत्र को प्रभावी रूप से लागू करने की आवश्यकता है। सतर्कता बनाए रखी जाए और सक्रिय गश्त की जाए। समुदायों के साथ संवाद बनाए रखा जाए।
उन्होंने यह भी सलाह दी है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए प्रभावी उपाय किए जाएं और उकसावे में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाए। तनाव कम करने के लिए स्थानीय नेताओं के साथ समन्वय स्थापित किया जाए। संवेदनशील जिलों में निगरानी को बढ़ाया जाए।
राज्यपाल ने यह भी सुझाव दिया है कि सहायता के लिए आने वाली कॉल्स पर तत्परता से प्रतिक्रिया दी जाए। भीड़ नियंत्रण के दौरान संयम बरता जाए और स्थानीय नेताओं से बातचीत की जाए ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सके।