क्या बांग्लादेश के आगामी चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बेहद कम है?
सारांश
Key Takeaways
- महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी अब भी बहुत कम है।
- 30 राजनीतिक पार्टियों ने महिलाओं के लिए कोई उम्मीदवार नहीं रखा।
- महिला उम्मीदवारों का प्रतिशत केवल 4.2 है।
- पितृसत्तात्मक समाज के कारण महिलाओं को हतोत्साहित किया गया है।
- सुधार की आवश्यकता है ताकि महिलाओं की भूमिका बढ़ सके।
ढाका, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश की राजनीतिक परिदृश्य में महिलाओं की भूमिका अब भी पुरुष-प्रधान बनी हुई है। पितृसत्तात्मक सामाजिक ढांचे के कारण महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बाधित किया गया है, जिसके फलस्वरूप राजनीतिक दलों के हर स्तर पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में प्रस्तुत की गई है।
बांग्लादेश के प्रमुख दैनिक प्रथम आलो में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के ह्यूमन डेवलपमेंट रिपोर्ट ऑफिस (एचडीआरओ) के पूर्व निदेशक सलीम जहान ने बताया कि 12 फरवरी को होने वाले चुनावों के लिए कुल 2,568 नामांकन पत्र दाखिल किए गए हैं, जिनमें से केवल 109 महिला उम्मीदवार हैं। यह कुल उम्मीदवारों का 4.2 प्रतिशत है।
उन्होंने आगे बताया कि इनमें से 72 को राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त है, जबकि 37 महिलाएं निर्दलीय उम्मीदवार हैं। इसका तात्पर्य यह है कि हर तीन में से एक महिला उम्मीदवार को किसी भी पार्टी का समर्थन नहीं मिला है।
रिपोर्ट के अनुसार, आगामी चुनावों में बांग्लादेश की कुल 50 राजनीतिक पार्टियां हिस्सा ले रही हैं, जिनमें से 30 पार्टियों ने एक भी महिला उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा है। इसका मतलब है कि देश की तीन-पांचवीं राजनीतिक पार्टियों ने किसी भी योग्य महिला को टिकट नहीं दिया, जबकि बांग्लादेश की कुल आबादी का आधा हिस्सा महिलाएं हैं। रिपोर्ट ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।
जिन पार्टियों ने महिला उम्मीदवार उतारे हैं, उनमें बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और मार्क्सवादी बांग्लादेश सोशलिस्ट पार्टी (बीएसपी) सबसे प्रमुख हैं, लेकिन दोनों ने ही केवल 10-10 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बीएनपी द्वारा अपने 328 उम्मीदवारों में से सिर्फ 10 महिलाओं (करीब 3 प्रतिशत) को शामिल करना बेहद निराशाजनक है।
इसके अतिरिक्त, कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने अपने 279 उम्मीदवारों में से एक भी महिला को टिकट नहीं दिया है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि राजनीतिक दलों के बीच चुनावों में कम से कम पांच प्रतिशत महिला उम्मीदवार उतारने पर सहमति बनी थी, लेकिन अधिकांश दल इस प्रतिबद्धता को पूरा करने में विफल रहे हैं।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि बांग्लादेश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अब भी बहुत सीमित है। बहुत कम महिलाएं सक्रिय रूप से राजनीति में शामिल होती हैं, जिसके परिणामस्वरूप चुनावों में महिला उम्मीदवारों की संख्या कम रहती है।