पीलीभीत में पॉलीहाउस खेती: किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि का नया रास्ता

Click to start listening
पीलीभीत में पॉलीहाउस खेती: किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि का नया रास्ता

सारांश

पीलीभीत में पॉलीहाउस खेती का बढ़ता रुझान किसानों को आर्थिक लाभ की ओर ले जा रहा है। यह सरकार की योजनाओं का सकारात्मक परिणाम है, जो ग्रामीण विकास और रोजगार के अवसर पैदा कर रहा है।

Key Takeaways

  • पॉलीहाउस खेती से किसानों की आय में वृद्धि हो रही है।
  • सरकार द्वारा आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
  • आधुनिक तकनीक से उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
  • पॉलीहाउस खेती में कम निवेश पर अधिक मुनाफा संभव है।

पीलीभीत, १० मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में किसानों का पॉलीहाउस खेती की ओर रुझान तेजी से बढ़ रहा है। इस प्रकार की खेती से किसानों को विशाल लाभ हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'हर हाथ को रोजगार' और किसानों की आय में वृद्धि का विजन अब जमीनी स्तर पर साकार होता नजर आ रहा है।

यहां के महावीर सिंह, सहारनपुर के किसान, पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक तकनीक पर आधारित पॉलीहाउस खेती अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित कर रहे हैं।

राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत इस पहल से किसानों की आय में महत्वपूर्ण वृद्धि हो रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

महावीर सिंह ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि कोरोना महामारी के दौरान वे पीलीभीत आए और यहां के किसानों को पॉलीहाउस खेती की नई तकनीक सिखाने लगे। इसके परिणामस्वरूप, किसान अब ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और लाल एवं पीली शिमला मिर्च जैसी उन्नत और मुनाफे वाली फसलों का उत्पादन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अधिकतर किसानों को इस प्रबंधन के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन जो किसान इसे समझते हैं, वे इस खेती से लाभ उठा रहे हैं। यदि किसान ५ से ६ लाख रुपए का निवेश करता है, तो वह सालाना २५ लाख रुपए की कमाई कर सकता है। पारंपरिक खेती में कम आय होती है, इसलिए पॉलीहाउस खेती को अपनाना अधिक लाभकारी है।

किसान नामचंद्र वर्मा ने कहा कि इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ मिल रहा है और स्थानीय स्तर पर नए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न हो रहे हैं। कई किसान अब पॉलीहाउस के जरिए उन्नत और उच्च मूल्य वाली सब्जियों की खेती कर रहे हैं।

जिला उद्यान अधिकारी रामेश्वर दयाल ने बताया कि उद्यान विभाग के अनुसार, केंद्र सरकार की राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत पॉलीहाउस लगाने के लिए किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना में लगभग ५० प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है।

पॉलीहाउस में ऑफ-सीजन सब्जियों जैसे शिमला मिर्च, टमाटर और अन्य सब्जियों की खेती की जाती है, जो खुले खेतों में उस समय उपलब्ध नहीं होतीं। ऑफ-सीजन होने के कारण इन फसलों की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है और किसानों की आय में वृद्धि होती है।

पीलीभीत में पॉलीहाउस के माध्यम से हो रही आधुनिक खेती किसानों के लिए नई आशा बनकर उभरी है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि गांवों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिल रही है।

किसान आयुष अग्रवाल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष उन्होंने २९ लाख की शिमला मिर्च बेची थी। विभाग की ओर से किसानों को पौध और बीज भी उपलब्ध कराए जाते हैं और अनुदान पर निशुल्क बीज भी दिए जाते हैं।

Point of View

बल्कि यह ग्रामीण विकास के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है। यह एक सकारात्मक कदम है जो प्रधानमंत्री के विकास के विजन को साकार करता है।
NationPress
13/03/2026

Frequently Asked Questions

पॉलीहाउस खेती क्या है?
पॉलीहाउस खेती एक आधुनिक खेती की तकनीक है, जिसमें फसलों को नियंत्रित वातावरण में उगाया जाता है।
क्या पॉलीहाउस खेती से किसानों को लाभ होता है?
हां, पॉलीहाउस खेती से किसानों को अधिक मुनाफा और बेहतर फसल उत्पादकता मिलती है।
सरकार पॉलीहाउस खेती के लिए क्या सहायता देती है?
सरकार राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत किसानों को ५० प्रतिशत तक अनुदान प्रदान करती है।
पॉलीहाउस खेती में कौन-कौन सी फसलें उगाई जा सकती हैं?
पॉलीहाउस में ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी, शिमला मिर्च, टमाटर आदि फसलें उगाई जा सकती हैं।
किसान पॉलीहाउस खेती में कितना निवेश कर सकते हैं?
किसान ५ से ६ लाख रुपए का निवेश करके सालाना २५ लाख रुपए तक की कमाई कर सकते हैं।
Nation Press