अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू ने खोला फाउंडेशनल लिटरेसी और न्यूमेरेसी सेंटर
सारांश
Key Takeaways
ईटानगर, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने गुरुवार को पापुम पारे जिले के दोइमुख में फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (एफएलएन) सेंटर का उद्घाटन किया। यह पहल राज्य में प्रारंभिक बाल्यावस्था और प्राथमिक शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह एफएलएन सेंटर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और भारत सरकार के निपुण भारत मिशन के दृष्टिकोण के अनुसार स्थापित किया गया है। यह देश में अपनी तरह की पहली पहल है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक बच्चा कक्षा 3 के अंत तक बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक कौशल को हासिल कर सके। इसे अरुणाचल प्रदेश की स्थानीय संस्कृति और शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया गया है।
उद्घाटन के समय, मुख्यमंत्री ने कहा कि बुनियादी कौशल भविष्य की सभी शिक्षा की नींव हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जो बच्चा प्राथमिक कक्षाओं में समझदारी से पढ़ नहीं पाता या बुनियादी गणितीय क्रियाएं नहीं कर पाता, वह आगे की कक्षाओं में पिछड़ने के जोखिम में रहता है।
उन्होंने इस सेंटर को एक परिवर्तनकारी सुधार के रूप में वर्णित किया, जिसका लक्ष्य सरकारी स्कूलों में संरचित, गतिविधि-आधारित और बाल-केंद्रित पद्धति के माध्यम से प्रारंभिक सीखने के परिणामों को मजबूत करना है।
सेंटर में खेल-आधारित शिक्षण पद्धति अपनाई गई है और प्रारंभिक कक्षाओं में मातृभाषा या स्थानीय भाषाओं का उपयोग करने को प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि बच्चों को बेहतर समझ और सीखने में आसानी हो सके।
यहां सतत मूल्यांकन और सुधारात्मक सहायता की व्यवस्था की गई है। साथ ही, शिक्षकों की क्षमता निर्माण और समुदाय की सक्रिय भागीदारी पर भी विशेष जोर दिया गया है।
शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि साक्षरता घटक में कहानी सुनाने और संवाद के माध्यम से मौखिक भाषा विकास, ध्वन्यात्मक पद्धति से पढ़ाई, मार्गदर्शित पठन समझ, श्रुतिलेख अभ्यास और लेखन कौशल विकास पर ध्यान दिया जाता है।
गतिविधि-आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुरूप डिजिटल व्याख्यान से युक्त एक अनुकूलित एंड्रॉयड बोर्ड भी शुरू किया गया है।
संख्यात्मक घटक में कंक्रीट-पिक्टोरियल-एब्सट्रैक्ट पद्धति के माध्यम से संख्या ज्ञान और बुनियादी अंकगणितीय दक्षता विकसित की जाती है। साथ ही, समस्या-समाधान कौशल और सहपाठी अधिगम को भी प्रोत्साहित किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, सेंटर में एक सांस्कृतिक विरासत केंद्र भी स्थापित किया गया है, जहां बच्चों को अरुणाचल प्रदेश की समृद्ध पारंपरिक ज्ञान और विविध जनजातीय विरासत से अवगत कराया जाएगा, ताकि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें।