पीयूष गोयल का बड़ा बयान: कांग्रेस के भारत-दक्षिण कोरिया FTA से बढ़ा व्यापार घाटा
सारांश
Key Takeaways
- पीयूष गोयल ने 23 अप्रैल 2025 को कांग्रेस के भारत-दक्षिण कोरिया FTA (2010) को 'खराब बातचीत' का परिणाम बताया।
- FTA लागू होने के बाद भारत का आयात 103.7%25 बढ़ा, जबकि द्विपक्षीय व्यापार 92.7%25 बढ़ा।
- 2015 में PM मोदी और कोरियाई राष्ट्रपति की बैठक के बाद CEPA संशोधन वार्ता शुरू हुई।
- अब तक ग्यारह दौर की पुनर्विचार वार्ता हो चुकी है और 'अर्ली हार्वेस्ट पैकेज' पर सहमति बनी है।
- नई वार्ता 2026 के अंत या 2027 के मध्य तक पूरी होने की उम्मीद है।
- कोरियाई कंपनियों के स्वदेशीकरण और आयात निर्भरता घटाने के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम आने शुरू हुए हैं।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 2010 में लागू हुए भारत-दक्षिण कोरिया मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को 'खराब कूटनीतिक बातचीत' का परिणाम करार दिया। उन्होंने कहा कि इस समझौते ने भारत के व्यापार घाटे को गंभीर रूप से बढ़ाया और देश को आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
गोयल ने 'एक्स' पर साधा कांग्रेस पर निशाना
पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर एक विस्तृत पोस्ट में लिखा कि कांग्रेस शासनकाल में 2009 में यह एफटीए हस्ताक्षरित हुआ था और 2010 में इसे लागू किया गया था। उन्होंने इसे 'असंतुलित और एकतरफा' समझौता बताया, जिसमें व्यापार का झुकाव भारत के विपरीत था।
गोयल ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि एफटीए लागू होने के बाद से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में 92.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि भारत के आयात में 103.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ। यह असमानता स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि इस समझौते से भारत को अपेक्षित लाभ नहीं मिला।
मोदी सरकार की पहल और सुधार की दिशा
2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के तत्कालीन राष्ट्रपति के बीच हुई बैठक में भारत-कोरिया सीईपीए (व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता) में संशोधन की प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति बनी। इसका उद्देश्य व्यापार में गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों प्रकार की संतुलित वृद्धि सुनिश्चित करना था।
इसके बाद आईकेसीईपीए (IKCЕPA) के तहत संयुक्त समिति की मंत्रिस्तरीय बैठक में पुनर्विचार वार्ता आरंभ की गई। इस प्रक्रिया में ग्यारह दौर की बातचीत हुई और एक 'अर्ली हार्वेस्ट पैकेज' पर सहमति बनी, जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद रहा।
2026-27 तक पूरी होगी पुनर्विचार वार्ता
गोयल ने बताया कि निरंतर और समन्वित प्रयासों के जरिए दोनों देशों ने पुराने समझौते से आगे बढ़कर अधिक पारस्परिक और लाभकारी साझेदारी को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इसमें गैर-टैरिफ बाधाओं और मूल नियमों (Rules of Origin) को विशेष रूप से संबोधित किया जाएगा।
यह पुनर्विचार वार्ता 2026 के अंत तक या अधिकतम 2027 के मध्य तक पूरी होने की उम्मीद है। साथ ही, भारत में कार्यरत कोरियाई कंपनियों के स्थानीयकरण को बढ़ावा देने और आयात निर्भरता घटाने के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे हैं।
स्वदेशीकरण की ओर बढ़ते कदम
वाणिज्य मंत्री ने जोर देकर कहा कि अब भारत वास्तविक स्वदेशीकरण और बेहतर पारस्परिक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कोरियाई कंपनियों द्वारा भारत में स्थानीय उत्पादन बढ़ाने की प्रवृत्ति देश के व्यापार संतुलन को सुधारने में सहायक होगी।
आने वाले समय में भारत-कोरिया व्यापार समझौते की पुनर्विचार वार्ता के परिणाम भारतीय उद्योग, निर्यातकों और उपभोक्ताओं के लिए निर्णायक साबित होंगे। सरकार का स्पष्ट संकेत है कि नए समझौते में भारत के हितों की पूरी रक्षा की जाएगी।