पीएम मोदी के शिक्षक एच.सी. पटेल ने सुनाई स्कूली यादें: तालाब से मगरमच्छ का बच्चा उठा लाए थे नरेंद्र
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर उनके स्कूली दिनों की एक दुर्लभ झलक सामने आई है। बी.एन. हाई स्कूल, वडनगर में 1965 से 1967 तक मोदी को गणित और विज्ञान पढ़ाने वाले उनके शिक्षक एच.सी. पटेल ने अपने उस होनहार छात्र के बारे में कई अनसुनी बातें साझा कीं। पटेल के अनुसार, युवा नरेंद्र असाधारण वक्ता, साहसी और गहरी समावेशी सोच वाले विद्यार्थी थे।
साधारण परिवार, असाधारण लगन
एच.सी. पटेल ने बताया कि मोदी के पिता दामोदरदास मोदी वडनगर के बी.एन. हाई स्कूल और स्थानीय रेलवे स्टेशन के पास एक बरगद के पेड़ से मात्र 50 फीट की दूरी पर चाय की एक छोटी सी दुकान चलाते थे। पटेल ने स्वयं युवा नरेंद्र को दिन में दो बार वडनगर रेलवे स्टेशन जाकर यात्रियों को चाय बेचते देखा था। परिवार की इस साधारण पृष्ठभूमि के बावजूद, नरेंद्र की पढ़ाई के प्रति लगन और स्कूल की गतिविधियों में भागीदारी अटूट रही।
मंच पर जादू, 10,000 लोगों की तालियाँ
पटेल के अनुसार, मोदी हर गुरुवार को होने वाले सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विशेष रूप से सक्रिय रहते थे। वे स्वामी विवेकानंद जैसे महान व्यक्तित्वों पर ओजस्वी भाषण देते थे। पटेल ने याद किया कि स्कूल की बाउंड्री वॉल के निर्माण के लिए धन जुटाने हेतु आयोजित एक नाटक में नरेंद्र ने लोकनायक जोगिदास खुमान की मुख्य भूमिका निभाई थी। हाथ में तलवार लेकर और काठियावाड़ी बोली के जीवंत उपयोग के साथ उनके अभिनय ने 10,000 लोगों की भीड़ को खड़े होकर 10 मिनट तक तालियाँ बजाने पर मजबूर कर दिया था।
तालाब से मगरमच्छ का बच्चा और माँ की सीख
पटेल ने मोदी के बचपन का एक रोमांचक किस्सा सुनाया। वडनगर के ऐतिहासिक शर्मिष्ठा तालाब — जो साल के बारहों महीने जल से भरा रहता है — के किनारे खेलते हुए एक बार युवा नरेंद्र मगरमच्छ का एक बच्चा उठाकर घर ले आए। जब उनकी माँ हीराबा को उस जीव के प्रति स्नेह हुआ और उन्होंने चेतावनी दी कि वह काट सकता है, तो नरेंद्र ने बिना देर किए उसे वापस तालाब में छोड़ दिया। यह प्रसंग बाल-मोदी के साहस के साथ-साथ माँ की बात मानने की उनकी प्रवृत्ति को भी दर्शाता है।
समावेशी सोच और सांप्रदायिक सौहार्द
पटेल ने बताया कि 11वीं कक्षा में नरेंद्र अक्सर एक मुस्लिम सहपाठी को अपने घर लाते थे ताकि वे साथ मिलकर खाना खा सकें। उनके अनुसार, यह समावेशी दृष्टिकोण उनकी माँ हीराबा के संस्कारों की देन था। पटेल ने यह भी उल्लेख किया कि नरेंद्र सभी गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे, किंतु एक शर्त रखते थे — यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखा का कोई कार्यक्रम हो तो वे उसमें उपस्थित नहीं हो सकेंगे, क्योंकि संघ का कार्य उनकी प्राथमिकता रहती थी।
शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता
पटेल ने याद किया कि मुख्यमंत्री बनने से पूर्व मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान मोदी ने मंच से ही अपने पुराने प्रिंसिपल रसवैद्य मनियार का सार्वजनिक रूप से सम्मान किया था। 2005 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने अहमदाबाद के गुजरात कॉलेज में प्राइमरी और हाई स्कूल के 26 पुराने शिक्षकों को आमंत्रित कर सम्मानित किया। एच.सी. पटेल और उनकी पत्नी को लाने के लिए विशेष रूप से ड्राइवर भेजा गया, उन्हें 5-स्टार होटल में ठहराया गया और प्रत्येक शिक्षक को विशेष उपहार भेंट किए गए। गर्व से भरे पटेल ने प्रधानमंत्री के दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और भारत के लिए रिकॉर्ड-तोड़ सेवा की कामना की।