नरेंद्र मोदी @75: वडनगर की चाय की दुकान से तीसरी बार प्रधानमंत्री पद तक का ऐतिहासिक सफर
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर 2026 को अपना 75वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। गुजरात के वडनगर में 17 सितंबर 1950 को जन्मे मोदी आज भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री हैं — एक ऐसा सफर जो चाय की दुकान, संघ के शाखा मैदान और गुजरात के जनादेश से होते हुए नई दिल्ली के 7, लोक कल्याण मार्ग तक पहुँचा।
बचपन और संघ से जुड़ाव
नरेंद्र मोदी ने बचपन में अपने पिता की चाय की दुकान पर हाथ बँटाया और बाद में खुद का स्टाल भी चलाया। मात्र आठ वर्ष की आयु में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए। जीवन की इन प्रारंभिक कठिनाइयों ने उन्हें परिश्रम का मूल्य और आम लोगों की पीड़ा को समझने की दृष्टि दी।
17 वर्ष की उम्र में उन्होंने घर छोड़ा और करीब दो वर्षों तक समूचे भारत की यात्रा की — हिमालय की तलहटी से लेकर दक्षिण के समुद्री तटों तक। इस यात्रा ने उनके भीतर देश की विविधता को आत्मसात करने और एक स्पष्ट जीवन-लक्ष्य तय करने की प्रेरणा जगाई। लौटने के बाद वे अहमदाबाद में बस गए और RSS से औपचारिक रूप से जुड़ गए। 1972 में वे RSS के प्रचारक बने।
भाजपा में प्रवेश और संगठनकर्ता की भूमिका
1980 के दशक में RSS में विभिन्न दायित्व निभाते हुए मोदी एक कुशल संगठनकर्ता के रूप में उभरे। 1987 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के गुजरात प्रदेश महासचिव के रूप में काम शुरू किया।
मोदी आर्काइव के अनुसार, उसी वर्ष 36 वर्षीय नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनावों में BJP का चुनाव प्रचार सँभाला — एक ऐसा काम जिसे लगभग असंभव माना जा रहा था। उनकी सटीक रणनीति और प्रभावी संवाद-कौशल के बलबूते BJP ने दो-तिहाई सीटें और मेयर का पद जीता। यही वह क्षण था जब मोदी की राजनीतिक पहचान ने रफ्तार पकड़ी।
1990 के गुजरात विधानसभा चुनावों में उनके मार्गदर्शन में BJP राज्य में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी। 1995 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने 121 सीटें जीतीं। 1995 में ही उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पाँच प्रमुख राज्यों में संगठन की जिम्मेदारी सौंपी गई। 1998 में उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बनाया गया, जो पद उन्होंने अक्टूबर 2001 तक सँभाला।
गुजरात के मुख्यमंत्री: चार कार्यकाल
जनवरी 2001 में गुजरात में आए विनाशकारी भूकंप के बाद, तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के बिगड़ते स्वास्थ्य और कमज़ोर पड़ती सार्वजनिक छवि के बीच, मोदी को राज्य का नेतृत्व सँभालने का अवसर मिला। 7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली — ऐसे समय में जब राज्य की अर्थव्यवस्था भूकंप सहित कई प्राकृतिक आपदाओं के बोझ तले दबी थी।
दिसंबर 2002 के विधानसभा चुनावों में उनके नेतृत्व में BJP ने 182 सदस्यीय विधानसभा में 128 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया। 25 दिसंबर 2007 को उन्होंने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद 2012 से लेकर 22 मई 2014 तक वे चौथी बार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे।
प्रधानमंत्री: तीन जनादेश, एक ऐतिहासिक यात्रा
26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने भारत के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। वे भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म स्वतंत्रता के बाद हुआ। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में BJP ने उनके नेतृत्व में पूर्ण बहुमत हासिल किया — इससे पहले किसी एकल दल को 1984 के चुनावों में ऐसा जनादेश मिला था।
2024 के संसदीय चुनावों में एक और निर्णायक जीत के बाद 9 जून 2024 को मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। यह उन्हें भारत के सबसे लंबे समय तक सेवारत निर्वाचित प्रधानमंत्रियों में स्थान दिलाता है। 75वें जन्मदिन पर उनका यह सफर — वडनगर की गली से लेकर विश्व मंच तक — भारतीय राजनीति के सबसे असाधारण अध्यायों में से एक बना हुआ है।