10 जून को PM मोदी बनेंगे सबसे लंबे समय तक सेवारत PM, शिवसेना की मनीषा कायंदे ने की सराहना
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 जून 2026 को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्री बनने वाले हैं, जब वे पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का ऐतिहासिक रिकॉर्ड पीछे छोड़ देंगे। इस अवसर पर शिवसेना की एमएलसी और प्रवक्ता मनीषा कायंदे ने मोदी के कार्यकाल और समर्पण की प्रशंसा की।
ऐतिहासिक मील का पत्थर
मनीषा कायंदे ने कहा, 'यह देश के लिए गर्व की बात है कि किसी ने जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।' उन्होंने आगे जोड़ा कि मोदी एक दिन की भी छुट्टी नहीं लेते, न थकते हैं और न रुकते हैं। उनके अनुसार, देश को ऐसे प्रधानमंत्री मिलना वास्तव में गौरव का विषय है।
गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी मई 2014 से लगातार तीन कार्यकालों में प्रधानमंत्री पद पर आसीन हैं और 12 वर्षों से देश का नेतृत्व कर रहे हैं। यह उपलब्धि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक अभूतपूर्व निरंतरता का प्रतीक मानी जा रही है।
जीडीपी और आर्थिक विकास पर कायंदे का पक्ष
देश की जीडीपी में हुई बढ़ोतरी का उल्लेख करते हुए कायंदे ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति का सबसे बड़ा पैमाना उसकी जीडीपी होती है, और भारत की जीडीपी स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि देश विकास के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का विजन भारत को एक महाशक्ति के रूप में स्थापित करना है, और इस दिशा में उनके प्रयास जारी हैं।
विपक्ष पर तीखा हमला
कायंदे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे देश और विदेश में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर नकारात्मक प्रचार करते हैं और युवाओं को भड़काने की कोशिश करते हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान संविधान बदले जाने की कथित भ्रामक बातों का भी उल्लेख किया, जिन्हें उनके अनुसार मोदी ने गलत साबित कर दिया।
कायंदे ने कहा, 'राहुल गांधी कहते थे कि देश में भूकंप आएगा, लेकिन मुझे लगता है कि अस्थिरता खुद उनमें है — उन्हें समझ नहीं आ रहा कि अपनी पार्टी को किस दिशा में ले जाएं।' उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस में ही एक बड़ा संकट आने वाला है।
मोदी का विजन और आगे की राह
मनीषा कायंदे के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी का स्पष्ट लक्ष्य है कि भारत अन्य देशों की तुलना में एक महाशक्ति बनकर उभरे। 10 जून की यह तारीख न केवल एक व्यक्तिगत रिकॉर्ड है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक स्थिरता और निरंतर नीति-निर्माण का भी प्रतीक है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस ऐतिहासिक पड़ाव पर सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों की ओर से क्या प्रतिक्रियाएँ सामने आती हैं।