संघ प्रचारक से तीन बार प्रधानमंत्री तक: नरेंद्र मोदी का 74 साल का संघर्ष और सफलता का सफर
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के छोटे से कस्बे वडनगर में हुआ था। एक साधारण परिवार में पले-बढ़े मोदी आज भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री हैं — 2014 से लगातार तीसरे कार्यकाल में देश की बागडोर थामे हुए। चाय की दुकान से लेकर नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक तक का यह सफर भारतीय राजनीति के इतिहास में एक अभूतपूर्व अध्याय है।
बचपन और शुरुआती जीवन
बालक नरेंद्र ने अपने पिता के साथ रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने में हाथ बँटाया और बाद में खुद का स्टॉल चलाया। आठ वर्ष की आयु में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संपर्क में आए और संगठन से जुड़ गए। जीवन की इन आरंभिक कठिनाइयों ने उन्हें परिश्रम का मूल्य और आम नागरिक की पीड़ा को समझने की दृष्टि दी।
17 वर्ष की आयु में उन्होंने घर छोड़कर संपूर्ण भारत की यात्रा का संकल्प लिया। लगभग दो वर्षों तक उन्होंने देश के विभिन्न भू-भागों, संस्कृतियों और समाजों को करीब से देखा। इस यात्रा ने उनके जीवन की दिशा तय कर दी। घर लौटने के बाद वे अहमदाबाद चले गए और आरएसएस के साथ पूर्णकालिक जुड़ाव कर लिया। 1972 में वे अहमदाबाद में आरएसएस के प्रचारक नियुक्त हुए।
भाजपा में प्रवेश और संगठन कौशल का उदय
1987 में 36 वर्षीय नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के गुजरात महासचिव के रूप में कार्यभार संभाला। उसी वर्ष उन्होंने अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनावों में भाजपा के अभियान की कमान सँभाली — एक ऐसा काम जिसे उस समय लगभग असंभव माना जा रहा था। मोदी आर्काइव के अनुसार, उनकी सुनियोजित रणनीति और प्रभावशाली जनसंपर्क के बल पर भाजपा ने दो-तिहाई सीटें और मेयर का पद जीत लिया। यह जीत गुजरात की राजनीति में भाजपा के नए युग की शुरुआत थी।
1990 के गुजरात विधानसभा चुनावों में उनके संगठन कौशल से भाजपा कांग्रेस के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी। 1995 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने 121 सीटें जीतीं। 1995 में ही उन्हें राष्ट्रीय मंत्री के रूप में पाँच प्रमुख राज्यों में पार्टी संगठन की जिम्मेदारी सौंपी गई। 1998 में उन्हें पदोन्नत कर राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बनाया गया, जिस पद पर वे अक्टूबर 2001 तक रहे।
गुजरात का मुख्यमंत्री काल
जनवरी 2001 में भुज में आए भीषण भूकंप के बाद गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के बिगड़ते स्वास्थ्य और कमज़ोर होती सार्वजनिक छवि के बीच नरेंद्र मोदी को राज्य की कमान सँभालने का अवसर मिला। 7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली — ऐसे समय में जब राज्य की अर्थव्यवस्था प्राकृतिक आपदाओं के गहरे घावों से उबर रही थी।
दिसंबर 2002 के विधानसभा चुनावों में मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने 182 सदस्यीय विधानसभा में 128 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया। 25 दिसंबर 2007 को उन्होंने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद 2012 से 22 मई 2014 तक वे चौथी बार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। गौरतलब है कि यह कार्यकाल 'गुजरात मॉडल' की राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बना।
प्रधानमंत्री पद तक का ऐतिहासिक सफर
26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने भारत के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। वे भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म देश की आज़ादी के बाद हुआ। 2014 और 2019 के आम चुनावों में भाजपा ने उनके नेतृत्व में लोकसभा में पूर्ण बहुमत प्राप्त किया — इससे पहले किसी एकल दल ने 1984 के चुनावों में ऐसा बहुमत हासिल किया था।
2024 के आम चुनावों में एक और निर्णायक जीत के बाद 9 जून 2024 को नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इस प्रकार वे भारत के सबसे लंबे समय तक सेवारत निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए। यह सफर — वडनगर की चाय की दुकान से लेकर लगातार तीन प्रधानमंत्री कार्यकाल तक — भारतीय लोकतंत्र में व्यक्तिगत संघर्ष और राजनीतिक दूरदर्शिता का एक विरल उदाहरण प्रस्तुत करता है।