क्या पोंगल अब वैश्विक पर्व बन गया है, तमिल संस्कृति पूरी मानवता की साझा विरासत है?

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क्या पोंगल अब वैश्विक पर्व बन गया है, तमिल संस्कृति पूरी मानवता की साझा विरासत है?

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने पोंगल उत्सव में भाग लेकर बताया कि यह पर्व अब एक वैश्विक पहचान बना चुका है। उन्होंने तमिल संस्कृति को मानवता की साझा विरासत बताते हुए इसके महत्व पर जोर दिया। जानिए पीएम मोदी ने इस अवसर पर क्या कहा और पोंगल का सांस्कृतिक महत्व क्या है।

Key Takeaways

  • पोंगल अब एक वैश्विक पर्व बन चुका है।
  • यह तमिल संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • किसानों की मेहनत का प्रतीक है।
  • प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश देता है।
  • सांस्कृतिक विविधता और एकता को दर्शाता है।

नई दिल्ली, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री डॉ. एल मुरुगन के निवास पर आयोजित पोंगल उत्सव में भाग लिया। पीएम मोदी ने इस अवसर पर सोशल मीडिया पर कुछ झलकियां साझा कीं और कहा कि पोंगल अब एक वैश्विक पर्व बन चुका है, जिसे विश्वभर में तमिल संस्कृति के प्रति प्रेम रखने वाले लोग बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अलग-अलग पोस्ट में उल्लेख किया, 'यहां केंद्रीय मंत्री श्री एल. मुरुगन जी के आवास पर पोंगल उत्सव की कुछ झलकियां हैं।'

उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया जिसमें उन्होंने तमिल भाषा में शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्हें तमिल संस्कृति से गहरा जुड़ाव है और इस पर्व को सभी के साथ मनाना उनके लिए सौभाग्य की बात है। पोंगल केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह किसानों के परिश्रम, धरती और सूर्य के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। यह पर्व प्रकृति, परिवार और समाज के बीच संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि इस समय देश के विभिन्न हिस्सों में लोहड़ी, मकर संक्रांति और माघ बिहू जैसे कई पर्व मनाए जा रहे हैं, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता को दर्शाते हैं।

पीएम मोदी ने पिछले वर्ष तमिल संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेने के अनुभव साझा किए। उन्होंने गंगईकोंडा चोलपुरम के प्राचीन मंदिर में पूजा-अर्चना, काशी तमिल संगमम में सांस्कृतिक एकता की अनुभूति और रामेश्वरम में पंबन सेतु के उद्घाटन के दौरान तमिल इतिहास की महानता को स्मरण किया।

उन्होंने कहा कि तमिल संस्कृति न केवल भारत बल्कि पूरी मानवता की साझा विरासत है और पोंगल जैसे पर्व 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को मजबूत करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि विश्व की लगभग सभी सभ्यताओं में फसल से जुड़े पर्व मनाए जाते हैं। तमिल संस्कृति में किसान को जीवन का आधार माना गया है, जिसका उल्लेख तिरुक्कुरल में भी मिलता है। उन्होंने कहा कि किसान राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और आत्मनिर्भर भारत अभियान को शक्ति प्रदान कर रहे हैं।

उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और सतत कृषि की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि पोंगल हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता को व्यवहार में उतारने की प्रेरणा देता है। मिशन लाइफ, 'एक पेड़ मां के नाम' और अमृत सरोवर जैसे अभियान इसी दिशा में कदम हैं। टिकाऊ कृषि, जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती और कृषि प्रौद्योगिकी में युवा अहम भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने तमिल संस्कृति को विश्व की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक बताते हुए कहा कि भारत अपनी जड़ों से शक्ति लेकर भविष्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने तमिल में शुभकामनाएं देते हुए सभी को पोंगल की हार्दिक बधाई दी।

Point of View

बल्कि वे हमारी सांस्कृतिक विविधता और एकता का प्रतीक भी बनते हैं। यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश देता है और हमें एकजुट होने की प्रेरणा देता है।
NationPress
14/01/2026

Frequently Asked Questions

पोंगल कब मनाया जाता है?
पोंगल हर वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता है, जो फसल के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है।
पोंगल का महत्व क्या है?
पोंगल किसानों की मेहनत और धरती-आसमान के प्रति कृतज्ञता का पर्व है।
क्या पोंगल केवल तमिलनाडु में मनाया जाता है?
नहीं, पोंगल आज विश्वभर में तमिल संस्कृति से प्रेम करने वाले लोगों द्वारा मनाया जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने पोंगल पर क्या कहा?
पीएम मोदी ने इसे एक वैश्विक पर्व बताते हुए किसानों की भूमिका पर जोर दिया।
पोंगल के साथ कौन से अन्य पर्व मनाए जाते हैं?
लोहड़ी, मकर संक्रांति और माघ बिहू जैसे पर्व भी इसी समय मनाए जाते हैं।
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