क्या प्रदूषण के कारण सांस लेना कठिन हो गया है? ये घरेलू उपाय करें आजमाएं
सारांश
Key Takeaways
- गर्म खारे पानी से गरारे करें।
- अदरक, तुलसी, काली मिर्च की चाय पिएं।
- भाप लें नाक और छाती की जकड़न के लिए।
- घर के अंदर धुएं से बचें।
- समस्याओं की बढ़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
नई दिल्ली, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान में बढ़ते प्रदूषण के कारण श्वसन नली में जलन, खांसी, जुकाम, गले में खराश और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। इन समस्याओं से निपटने के लिए प्रभावी उपाय हमारी रोजाना की आदतों में ही छिपे हैं।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर श्वसन तंत्र को मजबूत किया जा सकता है और प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से सुरक्षित रहा जा सकता है।
आयुष मंत्रालय ने श्वसन स्वास्थ्य के लिए कुछ व्यावहारिक और सरल उपाय सुझाए हैं। पहला उपाय है गर्म खारे पानी से गरारे करना। इससे गले की जलन, खराश और संक्रमण कम होता है। रोजाना सुबह-शाम गुनगुने पानी में नमक मिलाकर गरारे करने से प्रदूषण के कण गले में जम नहीं पाते और सांस की नली साफ रहती है। दूसरा उपाय है अदरक, तुलसी और काली मिर्च की हर्बल चाय पीना। यह चाय इम्यूनिटी बढ़ाती है और सांस की तकलीफ को दूर करती है। अदरक सूजन कम करता है, तुलसी एंटी-वायरल गुणों से भरपूर है और काली मिर्च बलगम को पतला करती है। रोज एक-दो कप यह चाय पीने से ठंड, खांसी और प्रदूषण के असर से राहत मिलती है।
तीसरा आसान तरीका है कंजेशन (नाक बंद होना) के लिए भाप लेना। गर्म पानी में कुछ बूंदें यूकेलिप्टस ऑयल या सादा पानी लेकर भाप लें। इससे नाक और छाती की जकड़न खुलती है, बलगम बाहर निकलता है और सांस लेना आसान हो जाता है। यह प्रदूषण से होने वाली एलर्जी और साइनस की समस्या में बहुत फायदेमंद है।
चौथा महत्वपूर्ण सुझाव है घर के अंदर कचरा या अगरबत्ती जलाने से बचना। अगरबत्ती और कचरा जलाने से घर के अंदर धुआं फैलता है, जो बाहर के प्रदूषण से भी ज्यादा नुकसानदेह होता है। इससे फेफड़ों पर बोझ पड़ता है और सांस की बीमारियां बढ़ सकती हैं। घर को हवादार रखें और ऐसे धुएं से दूर रहें।
ये सभी उपाय बेहद सरल और घरेलू हैं। इन्हें अपनाने से प्रदूषण के कारण होने वाली सांस की समस्याएं जैसे खांसी, अस्थमा आदि को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। समस्या ज्यादा होने पर डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।