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क्या छठ के बाद बिहार में आपके बच्चों के शिक्षा-रोजगार का इंतजाम होगा? : प्रशांत किशोर

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क्या छठ के बाद बिहार में आपके बच्चों के शिक्षा-रोजगार का इंतजाम होगा? : प्रशांत किशोर

सारांश

प्रशांत किशोर ने पूर्णिया में बिहार बदलाव सभा में लोगों को जागरूक किया। उन्होंने शिक्षा और रोजगार की कमी पर चिंता जताई और राजनीतिक नेताओं से अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने का आव्हान किया। क्या बिहार में बदलाव संभव है?

मुख्य बातें

प्रशांत किशोर का बिहार बदलाव यात्रा लोगों के लिए एक जागरूकता अभियान है।
बिहार में शिक्षा और रोजगार की कमी एक गंभीर मुद्दा है।
जनता को अपने बच्चों के भविष्य के लिए वोट देना चाहिए।
सरकारी विद्यालयों में सुधार की आवश्यकता है।
60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए पेंशन का वादा।

पूर्णिया, 16 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। जन सुराज के मुख्य सूत्रधार प्रशांत किशोर अपनी 'बिहार बदलाव यात्रा' के तहत विभिन्न जिलों और प्रखंडों में लोगों के साथ संवाद कर रहे हैं और स्थानीय पत्रकारों से भी चर्चा कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने बुधवार को पूर्णिया के धमदाहा नगर पंचायत मैदान में आयोजित बिहार बदलाव सभा को संबोधित किया।

प्रशांत किशोर ने भारी बारिश के बावजूद मौजूद जनसभा में उमड़ी भीड़ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बिहार के लोगों ने पीएम मोदी को मंदिर के विकास के लिए वोट दिया, और वो बन गया। जाति के नाम पर वोट दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप नीतीश कुमार ने जाति गणना कराई। पीएम मोदी बिहार के लोगों का वोट लेकर और देशभर का पैसा लेकर अपने राज्य गुजरात में फैक्ट्रियाँ स्थापित कर रहे हैं। आपने अपने बच्चों के लिए अब तक वोट नहीं दिया, इसलिए आपके बच्चे मोदी के गुजरात में जाकर उन्हीं फैक्ट्रियों में काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आज यहाँ लोगों को जागरूक करने आए हैं, उन्हें अपने बच्चों के भविष्य के लिए वोट करना चाहिए। जनता इस बात से संतुष्ट है कि उसे पांच किलो अनाज, सिलेंडर और बिजली मिल रही है, लेकिन यह नहीं सोचती कि उनके बच्चों को शिक्षा और रोजगार नहीं मिल रहा है। यदि विधानसभा चुनाव के बाद आपके बच्चों को बिहार में अच्छी शिक्षा और रोजगार नहीं मिला, तो आकर प्रशांत किशोर की गर्दन पकड़ लेना।

प्रशांत किशोर ने लालू यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मैं पिछले 3 वर्षों से बिहार के गांव-गांव घूम रहा हूं, लेकिन बच्चों के शरीर पर सूती कपड़ा या पैरों में चप्पल नहीं है। इसलिए आपको अपने बच्चों के भविष्य के लिए चिंतित होना चाहिए, क्योंकि कोई नेता आपके बच्चों की चिंता नहीं करेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि बिहार के लोगों को लालू से यह सीखना चाहिए कि बच्चों की चिंता क्या होती है। उन्होंने कहा कि लालू का बेटा 9वीं पास भी नहीं है, फिर भी वे चाहते हैं कि उनका बेटा राजा बने, जबकि बिहार के लोग जिनके बच्चे मैट्रिक, बीए, एमए कर चुके हैं, उन्हें नौकरी नहीं मिल रही है।

उन्होंने जनता से वादा किया कि दिसंबर 2025 से 60 वर्ष से अधिक उम्र के हर पुरुष और महिला को 2000 रुपये मासिक पेंशन दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस साल छठ के बाद पूर्णिया या धमदाहा के युवाओं को 10-12 हजार रुपये की मजदूरी के लिए अपना घर-परिवार छोड़कर नहीं जाना पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब तक सरकारी विद्यालयों में सुधार नहीं होगा, तब तक आप अपने 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाएं और उनकी फीस सरकार भरेगी, ताकि गरीब का बच्चा भी अंग्रेजी मीडियम स्कूल में पढ़ सके।

उन्होंने जनता से अपील की कि उन्हें और उनके बच्चों को लूटने वाले नेताओं को वोट न दें। अगली बार अपने बच्चों के लिए वोट दें और बिहार में जनता का राज स्थापित करें। बिहार में व्यवस्था परिवर्तन कर जनता का राज स्थापित करने के लिए नेताओं के चेहरे देखकर वोट न करें। अगली बार अपने बच्चों की शिक्षा और रोजगार के लिए वोट करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि बिहार में शिक्षा और रोजगार की कमी एक गंभीर मुद्दा है। प्रशांत किशोर का यह प्रयास निश्चित रूप से लोगों को जागरूक करने में सहायक होगा। जो बदलाव की आवश्यकता है, उसके लिए जनता को अपने अधिकारों के लिए खड़ा होना होगा।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रशांत किशोर का बिहार बदलाव यात्रा क्या है?
प्रशांत किशोर की बिहार बदलाव यात्रा एक अभियान है जिसमें वे लोगों से संवाद कर रहे हैं और बिहार के विकास पर चर्चा कर रहे हैं।
बिहार में शिक्षा और रोजगार की स्थिति कैसी है?
बिहार में शिक्षा और रोजगार की स्थिति चिंताजनक है, और प्रशांत किशोर इसके सुधार के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
क्या प्रशांत किशोर का वादा वास्तविकता में बदल सकेगा?
यदि जनता एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए खड़ी होती है, तो प्रशांत किशोर का वादा वास्तविकता में बदल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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