प्रिंस खान: झारखंड में आतंक का साम्राज्य, दुबई से पाकिस्तान तक का सफर
सारांश
Key Takeaways
- प्रिंस खान अब झारखंड में आतंक का पर्याय बन चुका है।
- वह दुबई और पाकिस्तान से रंगदारी का साम्राज्य चला रहा है।
- झारखंड पुलिस उसके गुर्गों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है।
- प्रिंस खान का नेटवर्क इंटरनेट कॉलिंग और वर्चुअल नंबरों पर निर्भर है।
- उसकी गिरफ्तारी एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।
रांची/धनबाद, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कभी धनबाद के वासेपुर की संकीर्ण गलियों में छोटे विवादों और मामूली गोलीबारी से अपने अपराध की शुरुआत करने वाला प्रिंस खान आज झारखंड में 'खौफ का दूसरा नाम' बन चुका है।
वह कभी दुबई तो कभी पाकिस्तान में बैठकर समय-समय पर रांची के एयरपोर्ट के निकट स्थित रेस्टोरेंट में गोलियां चलवा देता है, तो कभी किसी प्रमुख कारोबारी को वर्चुअल नंबर से कॉल करके 'खोपड़ी खोल देने' की धमकी देता है। धनबाद, रांची, बोकारो, जमशेदपुर, चतरा और पलामू तक के उद्योगपति उसके निशाने पर हैं। प्रिंस खान के आतंक पर रोक लगाने के झारखंड पुलिस के प्रयास विफल साबित हो रहे हैं।
तीन साल पहले जब इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुआ, तब भी वह बेखौफ रहा। झारखंड पुलिस को सूचना मिली है कि अब उसकी पनाहगाह दुबई से बदलकर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हो गई है, जहां वह न केवल रंगदारी का धंधा चला रहा है, बल्कि भारत की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन चुका है। पुलिस अब उसे आतंकवादी घोषित करने की प्रक्रिया में जुटी है। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शनिवार को इस गैंगस्टर के बढ़ते आतंक की चर्चा हुई।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सदन में सरकार को घेरते हुए कहा कि "प्रिंस खान दुबई और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रों में बैठकर अपने गुर्गों के जरिए वसूली का साम्राज्य चला रहा है। पिछले एक साल में रंगदारी और गोलीबारी की लगभग 60 घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन पुलिस केवल उसके विदेश में होने का हवाला देती है। अगर राज्य की पुलिस 10 लोगों पर भी कड़ी सख्ती दिखाए, तो किसी की हिम्मत नहीं होगी कि वह सात समंदर पार से भी रंगदारी मांग सके।"
भाजपा विधायक रागिनी सिंह, राज सिन्हा, मनोज यादव ने भी प्रिंस खान के आतंक से संबंधित घटनाओं का जिक्र किया। पिछले हफ्ते प्रिंस खान के गुर्गों ने रांची के एयरपोर्ट क्षेत्र में एक रेस्टोरेंट में गोलीबारी कर एक व्यक्ति की हत्या कर दी। इस घटना के संबंध में पुलिस जब तफ्तीश में जुटी थी, उसी दौरान उसने रेस्टोरेंट संचालक को ऑडियो मेसेज कर धमकाया कि पुलिस उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकेगी। अगर मांगी गई रंगदारी की रकम नहीं दी गई, तो उसकी हत्या करवा देगा।
इस घटना के तीन दिन बाद उसने रांची के प्रसिद्ध जय हिंद फार्मा के संचालक से एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी। उसने हाल ही में सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में बोकारो के बालीडीह औद्योगिक क्षेत्र में स्थित बीएमडब्ल्यू (बंसल मेटल वर्क्स) कंपनी में काम करने वाले अधिकारी सुरेश कुमार सिंह को रंगदारी देने के लिए धमकी दी। साल 2021 में धनबाद के वासेपुर में एक हत्या के सिलसिले में जब पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी, तब वह फर्जी पासपोर्ट के सहारे देश से फरार होने में सफल रहा था।
जांच रिपोर्टों के अनुसार, उसने पासपोर्ट कार्यालय की खामियों का फायदा उठाया और पहले दुबई में ठिकाना बनाया। लेकिन जब वहां एटीएस और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का दबाव बढ़ा, तो वह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में जाकर छिप गया। यहीं से वह अपने 'मेजर' (गुर्गों का कोड नेम) के माध्यम से 'वर्चुअल क्राइम' का एक अभेद्य साम्राज्य चला रहा है।
प्रिंस खान का अपराध करने का तरीका बिल्कुल किसी डार्क वेब थ्रिलर की तरह है। वह सीधे कॉल करने के बजाय इंटरनेट कॉलिंग और वर्चुअल नंबरों का सहारा लेता है। वह पहले थ्रेट कॉल या ऑडियो संदेश भेजता है, और यदि मांग पूरी नहीं होती, तो उसके गुर्गे संबंधित प्रतिष्ठान पर फायरिंग या बमबारी करते हैं। वारदात के तुरंत बाद वह सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेते हुए वीडियो जारी करता है और राज्य के आईपीएस अधिकारियों को खुलेआम चुनौती देता है।
रांची पुलिस ने पिछले साल प्रिंस खान के गुर्गों को गिरफ्तार किया था, जिनसे पूछताछ में पता चला कि गिरोह को अपराधियों को हथियार और गोला-बारूद पाकिस्तान से 'ड्रोन' के माध्यम से पंजाब के मोगा के रास्ते सप्लाई किए जा रहे हैं।
हालांकि एटीएस और झारखंड पुलिस ने पिछले एक साल में उसके 50 से अधिक गुर्गों को जेल भेजा है, लेकिन असली चुनौती उस 'मास्टरमाइंड' के प्रत्यर्पण की है, जो सुरक्षित पनाहगाहों में बैठकर झारखंड में मौत और वसूली का खेल खेल रहा है। पिछले हफ्ते झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्र ने हाई-लेवल मीटिंग में पुलिस को 'फ्री हैंड' देते हुए उसके गुर्गों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है।