31 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या प्रियंका चतुर्वेदी ने राज्यसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर 'जय हिंद' और 'वंदे मातरम' पर रोक को लेकर चिंता जताई?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या प्रियंका चतुर्वेदी ने राज्यसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर 'जय हिंद' और 'वंदे मातरम' पर रोक को लेकर चिंता जताई?

सारांश

प्रियंका चतुर्वेदी ने राज्यसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर 'जय हिंद' और 'वंदे मातरम' पर रोक को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि यह रोक सांसदों के बीच असंतोष का कारण बन रही है। जानें इस मुद्दे पर उनके विचार और संसद में इसके प्रभाव के बारे में।

मुख्य बातें

प्रियंका चतुर्वेदी ने पत्र के माध्यम से अपनी चिंता व्यक्त की।
'जय हिंद' और 'वंदे मातरम' पर रोक को गलत बताया।
यह रोक सांसदों की भावनाओं को प्रभावित कर सकती है।
राज्यसभा अध्यक्ष से इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने का अनुरोध किया।
लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए।

मुंबई, 2 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र से राज्यसभा सदस्य और शिवसेना (यूबीटी) की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने मंगलवार को राज्यसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर ‘जय हिंद’ और ‘वंदे मातरम’ पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह रोक सांसदों के बीच गंभीर असंतोष और चिंता का कारण बनी है।

पत्र में प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, "हमारे देश की आत्मा और भावनाओं का हिस्सा होने के कारण ऐसे अभिव्यक्ति के माध्यम पर प्रतिबंध अत्यंत चिंताजनक है। मैं अनुरोध करती हूं कि इस संबंध में जारी नोटिफिकेशन को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए और सांसदों और जनता से उचित माफी मांगी जाए।"

उन्होंने बताया कि ‘जय हिंद’ और ‘वंदे मातरम’ न केवल राष्ट्रीय भावनाओं के प्रतीक हैं, बल्कि लोकतांत्रिक ढांचे में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हिस्सा भी हैं। चतुर्वेदी ने राज्यसभा अध्यक्ष से इस पर गंभीरता से विचार करने और संसद के पारंपरिक और भावनात्मक मूल्यों का सम्मान करने का अनुरोध किया।

प्रियंका चतुर्वेदी के इस पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि उन्होंने इसे राज्यसभा सचिवालय के माध्यम से प्रस्तुत किया है ताकि नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अध्यक्ष तक यह संदेश पहुंच सके।

उन्होंने कहा कि संसद में नारेबाजी पर रोक सांसदों की लोकप्रिय और भावनात्मक अभिव्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि सांसदों का यह अधिकार है कि वे अपनी देशभक्ति और राष्ट्रीय गर्व को एक सम्मान और गरिमा के साथ व्यक्त कर सकें।

राज्यसभा में इस प्रतिबंध के बाद कई सांसदों और राजनीतिक नेताओं ने भी चिंता और असंतोष जताया है। प्रियंका चतुर्वेदी के पत्र के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्यसभा अध्यक्ष इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

राज्यसभा बुलेटिन में सांसदों को शिष्टाचार और परंपरा का हवाला देते हुए ‘जय हिंद’ और ‘वंदे मातरम’ जैसे नारे नहीं लगाने की सलाह दी गई थी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सांसदों के लिए यह जरूरी है कि वे अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकें। राज्यसभा अध्यक्ष को इस विषय पर विचार करना चाहिए, ताकि सांसदों की आवाज को सुना जा सके।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियंका चतुर्वेदी ने किस विषय पर पत्र लिखा?
प्रियंका चतुर्वेदी ने 'जय हिंद' और 'वंदे मातरम' पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर पत्र लिखा।
प्रियंका चतुर्वेदी ने पत्र में क्या कहा?
उन्होंने बताया कि यह प्रतिबंध सांसदों के बीच असंतोष और चिंता का कारण बन रहा है।
क्या यह प्रतिबंध लोकतंत्र के लिए खतरनाक है?
प्रियंका चतुर्वेदी के अनुसार, यह प्रतिबंध अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 6 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले