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क्या पुडुक्कोट्टई में किसानों का गुस्सा सोलर प्लांट के खिलाफ सही है?

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क्या पुडुक्कोट्टई में किसानों का गुस्सा सोलर प्लांट के खिलाफ सही है?

सारांश

क्या पुडुक्कोट्टई के किसानों का गुस्सा सोलर प्लांट के खिलाफ है? जानें कैसे एक निजी कंपनी ने उनके उपजाऊ खेतों पर सोलर पैनल लगाने की कोशिश की और किसानों ने इसका विरोध किया।

मुख्य बातें

शंकरनपट्टी के किसान पिछले सौ वर्षों से खेती कर रहे हैं।
कंपनी ने किसानों की जमीन पर सोलर पैनल लगाने का काम शुरू किया।
किसानों ने कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया।
जिला प्रशासन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है।
किसानों की आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है।

पुडुक्कोट्टई, 22 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु के पुडुक्कोट्टई जिले के पोन्नामारावती तालुका के करैयूर पंचायत में शंकरनपट्टी गांव में उस समय हंगामा हुआ, जब एक निजी सोलर कंपनी ने लगभग 100 एकड़ उपजाऊ खेती की जमीन पर सोलर पैनल लगाने का कार्य शुरू किया। गांव के 70 से अधिक किसानों और महिलाओं ने मौके पर पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

शंकरनपट्टी के लोग पिछले सौ वर्षों से इस जमीन पर खेती कर रहे हैं। यहां नारियल, धान, उड़द, चना, तिल, मूंगफली सहित कई फसलें पैदा की जाती हैं।

किसानों का कहना है कि कंपनी ने कुछ व्यक्तियों पर दबाव डालकर या लालच देकर जमीन खरीदी और अब न केवल अपनी खरीदी गई जमीन पर, बल्कि आस-पास के अन्य खेतों में भी जबरदस्ती सोलर पैनल लगा रही है। इससे खेती पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी और आने वाली पीढ़ियों का पेट भरना मुश्किल हो जाएगा।

प्रदर्शनकारियों ने कंपनी के खिलाफ नारेबाजी की और काम रोकने की मांग की। जब ग्रामीणों ने कंपनी के प्रतिनिधियों से बात की, तो उन्हें बताया गया कि यह प्रोजेक्ट डीएमके के पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी के करीबी रिश्तेदार का है और उनकी राजनीतिक पहुंच के कारण कोई कुछ नहीं कर सकता। किसानों ने इस बयान को अत्यंत आपत्तिजनक बताया और कहा कि राजनीतिक रसूख के बल पर उनकी आजीविका छीनने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि खेती की जमीन को सोलर प्लांट के लिए उपयोग करने की अनुमति तुरंत रद्द की जाए। साथ ही कंपनी द्वारा की गई जबरन खरीद-फरोख्त की जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए। फिलहाल प्रदर्शन के बाद कंपनी ने काम कुछ समय के लिए रोक दिया है, लेकिन ग्रामीण चौकस हैं और आगे भी विरोध जारी रखने की बात कह रहे हैं।

जिला कलेक्टर ने मामले की जानकारी मिलने की पुष्टि की है और कहा है कि जल्द ही राजस्व और पुलिस की टीम मौके पर जाकर जांच करेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किसानों का विरोध क्यों हो रहा है?
किसानों का विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि एक निजी सोलर कंपनी ने उनकी उपजाऊ खेती की जमीन पर सोलर पैनल लगाने का काम शुरू किया है।
इस जमीन पर किसानों ने कितने वर्षों से खेती की है?
किसान पिछले सौ वर्षों से इस जमीन पर खेती कर रहे हैं।
कंपनी के खिलाफ किसानों के क्या आरोप हैं?
किसानों का आरोप है कि कंपनी ने दबाव या लालच देकर जमीन खरीदी और अब जबरदस्ती सोलर पैनल लगा रही है।
क्या प्रशासन इस मामले में कुछ करेगा?
जिला कलेक्टर ने मामले की जानकारी मिलने की पुष्टि की है और जल्द ही जांच करने का आश्वासन दिया है।
ग्रामीणों ने क्या मांग की है?
ग्रामीणों ने मांग की है कि खेती की जमीन को सोलर प्लांट के लिए उपयोग करने की अनुमति तुरंत रद्द की जाए।
राष्ट्र प्रेस
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