पुणे हत्याकांड: गाली-गलौज के विवाद में युवक का गला घोंटा, शव कुएं में फेंका; आरोपी गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
पुणे के दौंड तालुका स्थित डालिंब गाँव में एकささ मामूली गाली-गलौज के विवाद ने जानलेवा मोड़ ले लिया, जब 35 वर्षीय भीमाशंकर धोंडीबा खंडागले की गला दबाकर हत्या कर दी गई और सबूत मिटाने के लिए उनके शव को लोहे के तार व पत्थर से बाँधकर एक कुएं में फेंक दिया गया। पुलिस ने गुरुवार, 16 अक्टूबर 2026 को संदिग्ध विजय लेचरूड को गिरफ्तार कर लिया है।
मुख्य घटनाक्रम
3 अक्टूबर 2026 को शाम करीब छह बजे भीमाशंकर खंडागले के लापता होने की सूचना उनकी माँ नंदा धोंडीबा खंडागले ने यवत पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई। पुलिस ने प्रारंभ में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 140(3) के तहत लापता व्यक्ति का मामला दर्ज कर जाँच शुरू की।
जाँच को निर्णायक मोड़ 8 अक्टूबर को मिला, जब रमेश म्हस्के के कुएं से भीमाशंकर का शव बरामद हुआ। पुलिस के अनुसार, मृतक के हाथ-पैर लोहे के तार से बाँधे गए थे और शव के साथ एक बड़ा पत्थर बाँधकर उसे कुएं में डुबोया गया था — यह सुनियोजित तरीके से सबूत नष्ट करने की कोशिश थी। शव मिलने के बाद पुलिस ने मामले में हत्या एवं साक्ष्य विनाश से संबंधित धाराएँ जोड़कर जाँच तेज कर दी।
आरोपी की गिरफ्तारी और पूछताछ
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार को जाँच के दौरान संदिग्ध विजय लेचरूड को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की गई। पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि भीमाशंकर की ओर से गाली-गलौज किए जाने से क्रोधित होकर आरोपी ने उनका गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद, शव की पहचान छुपाने और जाँच को गुमराह करने के इरादे से, हाथ-पैर बाँधकर पत्थर के साथ शव कुएं में फेंक दिया गया।
गौरतलब है कि लापता होने की शिकायत से लेकर शव बरामदगी तक पाँच दिन बीत गए — इस दौरान सबूत मिटाने की कोशिश हुई, लेकिन पुलिस जाँच से आरोपी बच नहीं सका।
पुलिस टीम और जाँच का नेतृत्व
यह कार्रवाई पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक संदीपसिंह गिल, अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. शुभम कुमार, बारामती विभाग के अपर पुलिस अधीक्षक गणेश बिरादार और दौंड के उपविभागीय पुलिस अधिकारी बापुराव दडस के मार्गदर्शन में की गई। मामले की आगे की जाँच पुलिस उपनिरीक्षक अक्षय मोरे द्वारा की जा रही है।
आम जनता पर असर और सामाजिक परिप्रेक्ष्य
यह घटना ग्रामीण महाराष्ट्र में मामूली विवादों के हिंसक रूप लेने की प्रवृत्ति को एक बार फिर उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे-छोटे विवादों में संयम और सामुदायिक मध्यस्थता की कमी ऐसी त्रासदियों को जन्म देती है। डालिंब जैसे छोटे गाँवों में सबूत मिटाने की इतनी सुनियोजित कोशिश यह भी दर्शाती है कि अपराधी कानूनी प्रक्रियाओं को कमज़ोर करने की कोशिश में कितनी दूर तक जा सकते हैं।
क्या होगा आगे
पुलिस के अनुसार, आरोपी विजय लेचरूड को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया है और न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा। जाँच में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि क्या इस घटना में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था। शव को कुएं में छुपाने की सोची-समझी कार्यप्रणाली के मद्देनज़र पुलिस अदालत में पुख्ता साक्ष्य पेश करने की तैयारी में है।