क्या पुणे में एमपीएससी भर्ती विज्ञापन की देरी से छात्र चिंतित हैं, और आयु सीमा में एक साल की छूट मांगी जा रही है?
सारांश
Key Takeaways
- छात्रों ने एक साल की आयु सीमा में छूट की मांग की है।
- एमपीएससी भर्ती विज्ञापन में छह महीने की देरी हुई है।
- यह आंदोलन गैर-राजनीतिक है।
पुणे, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों ने भर्ती विज्ञापन में हुई देरी को लेकर एक साल की आयु-सीमा में छूट की मांग को और तेज कर दिया है। पुणे में बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे और सरकार से राहत देने की अपील की। खास तौर पर पीएसआई (पुलिस सब-इंस्पेक्टर) पद के उम्मीदवार चाहते हैं कि आयुसीमा की कट-ऑफ तिथि 1 जनवरी तक बढ़ाई जाए।
छात्रों का कहना है कि सरकार हर साल समय पर भर्ती विज्ञापन जारी करती है, लेकिन इस बार विज्ञापन करीब छह महीने की देरी से जारी हुआ है। इससे हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। प्रदर्शन कर रहे एक छात्र ने न्यूज एजेंसी राष्ट्र प्रेस से कहा, "एमपीएससी छात्रों की सिर्फ एक ही मांग है। जो विज्ञापन हर साल तय समय पर आता था, वह इस बार छह महीने देर से जारी हुआ। इस देरी की वजह से कई छात्र आयु-सीमा पार कर चुके हैं, जो पूरी तरह अन्याय है।"
छात्रों ने यह भी साफ किया कि यह आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक है। एक अन्य छात्र ने कहा, "इसमें किसी राजनीतिक पार्टी का कोई हाथ नहीं है। यह सिर्फ उन छात्रों का मुद्दा है जिनका भविष्य इस भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। हमारी एकमात्र मांग एक साल की आयु सीमा में छूट है।"
इस मुद्दे को लेकर छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी मिला। मुलाकात के बाद एक छात्र ने बताया, "हमारे प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में दोनों पक्षों के दबाव में हैं। हालांकि छात्रों को उम्मीद है कि सरकार उनकी परेशानी को समझेगी और सकारात्मक फैसला लेगी।"
महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग भारतीय संविधान के तहत गठित एक संवैधानिक संस्था है। इसका काम महाराष्ट्र में विभिन्न लोकसेवा पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन उनकी योग्यता और आरक्षण नियमों के आधार पर करना है। एमपीएससी का मुख्यालय मुंबई में स्थित है।
फिलहाल छात्रों की निगाहें सरकार के फैसले पर टिकी हैं। उनका कहना है कि अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो हजारों मेहनती छात्रों के सपने टूट सकते हैं।