पंजाब विधानसभा ने 14 साल बाद न्यूनतम मजदूरी में 15% की वृद्धि की, मजदूर दिवस पर ऐतिहासिक फैसला
सारांश
Key Takeaways
पंजाब विधानसभा ने 1 मई 2026 को अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष 'कीर्ति दिवस' सत्र में श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी की आधार दर में 15 प्रतिशत की वृद्धि को सर्वसम्मति से पारित किया। यह 14 वर्षों में पहली बार है जब राज्य में न्यूनतम वेतन की मूल दर में संशोधन किया गया है, क्योंकि इसमें अंतिम बदलाव 2012 में हुआ था।
प्रस्ताव का विवरण और पृष्ठभूमि
यह प्रस्ताव पंजाब के श्रम मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंद ने सदन के समक्ष पेश किया, जिसे सभी दलों के विधायकों ने बिना किसी विरोध के स्वीकार किया। मंत्री सोंद ने सदन को बताया कि हालाँकि महंगाई भत्ते में समय-समय पर वृद्धि होती रही है, परंतु मूल दर 2012 से अपरिवर्तित रही है, जिसके कारण राज्य के श्रमिक वर्ग के एक बड़े हिस्से को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था।
गौरतलब है कि यह सत्र लगभग 69 वर्षों के बाद आयोजित एक ऐतिहासिक विधानसभा सत्र था, जिसे विशेष रूप से श्रमिकों के सम्मान में बुलाया गया था। मंत्री ने इसे राष्ट्र, समाज और अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले श्रमिकों के अमूल्य योगदान को श्रद्धांजलि बताया।
मजदूर दिवस का ऐतिहासिक संदर्भ
सोंद ने सदन में 1886 के शिकागो हेमार्केट स्क्वायर आंदोलन का उल्लेख किया, जिसमें श्रमिकों ने आठ घंटे के कार्यदिवस की माँग के लिए बलिदान दिया था। उन्होंने कहा कि मई दिवस सामाजिक न्याय, बेहतर कामकाजी परिस्थितियों और श्रम अधिकारों की निरंतर खोज का प्रतीक है।
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