क्या सुदर्शन पटनायक ने संविधान दिवस पर पुरी बीच पर बनाया अनोखा सैंड आर्ट?
सारांश
Key Takeaways
- संविधान दिवस 26 नवंबर को मनाया जाता है।
- सुदर्शन पटनायक ने 6 टन रेत से सैंड आर्ट बनाई।
- इस कला में भारतीय संविधान की महत्ता को दर्शाया गया।
- सैंड आर्ट में 'हैप्पी कॉन्स्टिट्यूशन डे' लिखा गया था।
- यह सैंड आर्ट 6 फीट ऊँची थी।
पुरी, 26 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। संविधान दिवस के अवसर पर पुरी के प्रसिद्ध समुद्र तट पर एक बार फिर एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। अपनी अनोखी सैंड आर्ट के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध और पद्म श्री से सम्मानित सुदर्शन पटनायक ने इस बार भी अपनी कला से सभी का मन मोह लिया। बुधवार को उन्होंने पुरी बीच पर एक आकर्षक और प्रभावशाली रेत की मूर्ति बनाई, जिसमें भारतीय संविधान का अद्भुत चित्रण किया गया। इस कला पर बड़े अक्षरों में 'हैप्पी कॉन्स्टिट्यूशन डे' लिखा गया था।
सुदर्शन पटनायक की इस बार की सैंड आर्ट इसलिए भी खास थी क्योंकि यह लगभग 6 टन रेत से निर्मित थी और इसकी ऊंचाई करीब 6 फीट थी। यह दूर से ही एक शानदार स्कल्पचर की तरह दिखाई दे रहा था, जो भारत की लोकतांत्रिक भावना की शक्ति और सुंदरता को प्रस्तुत कर रहा था। पटनायक का उद्देश्य केवल एक कलात्मक मूर्ति बनाना नहीं था, बल्कि लोगों को यह याद दिलाना था कि हमारा संविधान ही हमारे लोकतंत्र की असली ताकत है और इसे मजबूत रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
इस सैंड स्कल्पचर के निर्माण में पटनायक को उनके सैंड आर्ट इंस्टीट्यूट के छात्रों का भी पूरा सहयोग मिला। टीम ने मिलकर इसे बहुत कम समय में तैयार किया और बीच पर आने वाले लोग इसे देखकर तस्वीरें खींचने लगे। कई लोग इस इंस्टॉलेशन के पास जाकर संविधान दिवस की शुभकामनाएं देते हुए वीडियो बनाते भी नजर आए।
सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने कहा कि संविधान दिवस के अवसर पर हमने 'हैप्पी कॉन्स्टिट्यूशन डे' संदेश के साथ यह छह फुट ऊंची रेत की मूर्ति बनाई है। आज हर भारतीय के लिए गर्व का दिन है, क्योंकि यह भारत के संविधान को अपनाने का दिन है। अपनी कला के माध्यम से, मैं इस पवित्र दिन पर सभी को अपनी शुभकामनाएं देना चाहता हूं।
गौरतलब है कि भारत में हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है। इसी दिन 1949 में हमारा संविधान अपनाया गया था। देशभर में इस दिन को बड़े सम्मान के साथ मनाया जाता है। स्कूलों और कॉलेजों में प्रस्तावना पढ़ी जाती है, जागरूकता कार्यक्रम होते हैं और कई प्रकार की शैक्षिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। इन सभी का उद्देश्य यही होता है कि लोग हमारे संविधान के मूल सिद्धांतों (न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व) को समझें और अपनाएं। साथ ही, नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में भी जागरूकता बढ़ाई जाती है।