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राहुल गांधी इलाहाबाद हाई कोर्ट में दोहरी नागरिकता पर अपना पक्ष रखेंगे 20 अप्रैल को

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राहुल गांधी इलाहाबाद हाई कोर्ट में दोहरी नागरिकता पर अपना पक्ष रखेंगे 20 अप्रैल को

सारांश

राहुल गांधी को इलाहाबाद हाई कोर्ट में दोहरी नागरिकता के मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी है। भाजपा कार्यकर्ता द्वारा दायर याचिका में आरोप है कि वह ब्रिटिश नागरिक हैं। सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।

मुख्य बातें

राहुल गांधी को दोहरी नागरिकता के मामले में सुनवाई में उपस्थित होना है।
कोर्ट ने पुलिस को जांच के लिए निर्देश दिए हैं।
सुनवाई में सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।
यह मामला राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है।
याचिकाकर्ता ने कार्रवाई की मांग की है।

लखनऊ, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दोहरी नागरिकता के मामले में, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सोमवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। इस मामले की उत्पत्ति एक भाजपा कार्यकर्ता द्वारा दायर याचिका से हुई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं और उनके पास दोहरी नागरिकता है।

जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ के समक्ष होने वाली यह महत्वपूर्ण सुनवाई ऐसे समय पर हो रही है जब हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को कर्नाटक में भाजपा कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर की शिकायत की जांच करने का निर्देश दिया है।

शुक्रवार को हाई कोर्ट ने मौखिक आदेश दिया था कि पुलिस को जांच शुरू करने की अनुमति है और जरूरत पड़ने पर राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने पर विचार किया जा सकता है।

कोर्ट ने शनिवार को अपने आदेश में बदलाव करते हुए कहा कि संभावित आरोपी को किसी भी निर्देश से पहले सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।

इससे पहले, 2019 में राहुल गांधी को कथित दोहरी नागरिकता के मुद्दे पर लोकसभा चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिका को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की पीठ ने खारिज कर दिया था।

जस्टिस विद्यार्थी ने शनिवार को कहा कि प्रस्तावित आरोपी को नोटिस दिए बिना कोई भी निर्णय अंतिम नहीं किया जा सकता।

हाई कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए गए आदेश में जस्टिस विद्यार्थी ने बताया कि सुनवाई के दौरान सभी पक्षों ने स्वीकार किया था कि बीएनएसएस की धारा 528 के तहत आवेदन पर निर्णय लेते समय आरोपी को नोटिस देना आवश्यक नहीं है, लेकिन आदेश के टाइप और साइन होने से पहले एक पुराने फैसले (जगन्नाथ वर्मा बनाम उत्तर प्रदेश सरकार) का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया है कि एफआईआर दर्ज करने से इनकार करने वाला आदेश अंतिम नहीं होता और इसे बदला जा सकता है। साथ ही, संभावित आरोपी को सुनवाई का अधिकार है।

जस्टिस विद्यार्थी ने कहा कि इस कानूनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए राहुल गांधी को नोटिस दिए बिना धारा 528 के तहत आवेदन पर निर्णय नहीं किया जाना चाहिए, और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना चाहिए।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता के आरोपों की जांच करने और एफआईआर दर्ज करने पर विचार करने के लिए कहा था। यह सुनवाई लखनऊ की एक विशेष एमपी/एमएलए अदालत के 28 जनवरी के आदेश को चुनौती देने के संदर्भ में है, जिसमें एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया गया था।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं, इसलिए वे चुनाव लड़ने या सांसद बने रहने के योग्य नहीं हैं। इसके लिए उसने कथित दस्तावेजों और ब्रिटेन की एजेंसियों से मिली जानकारी का उल्लेख किया है।

याचिकाकर्ता ने भारतीय न्याय संहिता, आधिकारिक गोपनीयता कानून, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट कानून के तहत कार्रवाई की मांग की है।

यह शिकायत पहले रायबरेली की विशेष एमपी/एमएलए अदालत में प्रस्तुत की गई थी, जिसे बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट में लाया गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन न्यायालय में सुनवाई का सही तरीका सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर देना है। इससे लोकतंत्र की मजबूती बढ़ती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी पर दोहरी नागरिकता का आरोप क्यों लगाया गया है?
आरोप है कि राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं, जिससे उनकी चुनावी योग्यता पर सवाल उठता है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट में कब सुनवाई होगी?
सुनवाई 20 अप्रैल को होने वाली है।
क्या राहुल गांधी को नोटिस दिया जाएगा?
जस्टिस विद्यार्थी ने कहा है कि निर्णय लेने से पहले राहुल गांधी को नोटिस दिया जाना चाहिए।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मामला राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह चुनावी प्रक्रिया और नागरिकता के मुद्दों को लेकर सवाल उठाता है।
क्या कोर्ट ने जांच के लिए पुलिस को निर्देश दिया?
हाँ, हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को जांच करने का निर्देश दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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