क्या राहुल गांधी केवल भ्रम फैलाने का काम करते हैं? : शाजिया इल्मी
सारांश
Key Takeaways
- राहुल गांधी के बयानों पर भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण है।
- शाजिया इल्मी ने कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी पर भी चर्चा की।
- टेक्सटाइल सेक्टर में जीएसटी 2.0 सुधारों का प्रभाव सकारात्मक रहा है।
नई दिल्ली, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के एक्स पोस्ट पर जवाब देते हुए कहा है कि वे केवल भ्रम फैलाने का कार्य करते हैं।
राहुल गांधी ने एक्स पोस्ट में यह बताया था कि 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ और अनिश्चितता भारत के टेक्सटाइल निर्यातकों को बहुत अधिक नुकसान पहुँचा रही है। नौकरियों का जाना, फैक्ट्रियां बंद होना और ऑर्डर कम होना हमारी 'खराब अर्थव्यवस्था' की कड़वी सच्चाई है।
शाजिया इल्मी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी न तो पढ़ते हैं और न ही समझते हैं। मुझे लगता है कि उन्होंने शायद कभी अखबार नहीं पढ़ा होगा। उन्हें भारत की सच्चाई को समझने के लिए अपने आईपैड पर एक साधारण सर्च करना चाहिए। सितंबर 2025 में लागू जीएसटी 2.0 सुधारों ने टेक्सटाइल सेक्टर में ड्यूटी संरचना को सही किया है, ताकि इस क्षेत्र को आवश्यक राहत और सुधार मिल सके। इससे निवेश की समस्याओं को काफी लाभ हुआ है। टेक्सटाइल उद्योग कांग्रेस के समय में बुरी स्थिति में था। हमारी सरकार में निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इसके बावजूद, राहुल गांधी झूठ बोलते रहते हैं। वे हमेशा 'डेड इकोनॉमी' कहकर विदेशी आकाओं को खुश करते हैं। उन्हें यह जानना चाहिए कि भारत की जीडीपी बढ़ी है।
शाजिया इल्मी ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर के केरल चुनाव मीटिंग में शामिल न होने पर कहा कि राहुल गांधी अत्यधिक असुरक्षा की भावना से जूझ रहे हैं और यही कारण है कि कांग्रेस के सीनियर नेता उन्हें किनारे करने की कोशिश कर रहे हैं। शशि थरूर ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के समय भारत की विदेश नीति और भारतीय सेना के समर्थन में जो किया, उससे राहुल गांधी को परेशानी हुई है। यह इस बात का प्रतीक है कि कांग्रेस में संगठन नहीं है। इसे उनकी कमजोरी के रूप में देखा जा सकता है। कांग्रेस में लीडरशिप की कमी है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर भाजपा नेता ने कहा कि यह बेशर्मी की पराकाष्ठा है। ममता बनर्जी खुद को सुभाष चंद्र बोस से तुलना कर रही हैं। यह सुनकर समझ नहीं आता कि हंसी आए या रोना। एक तरफ नेताजी थे, जिन्होंने एक क्रांतिकारी के रूप में अपना जीवन भारत की आजादी की लड़ाई के लिए समर्पित किया और युवाओं में देशभक्ति की भावना जगाई। दूसरी तरफ, ममता बनर्जी संविधान का मजाक उड़ाती हैं। रैलियों में एसआईआर को नकारती हैं, केंद्रीय एजेंसियों से झगड़ा करती हैं और देश की मर्यादा की कभी फिक्र नहीं करतीं। उन्होंने कभी संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान नहीं किया।