30 जुलाई 2026
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नौतपा 2026: सूर्यदेव को प्रसन्न करने के उपाय, 25 मई से 2 जून तक रहेगा प्रभाव

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नौतपा 2026: सूर्यदेव को प्रसन्न करने के उपाय, 25 मई से 2 जून तक रहेगा प्रभाव

सारांश

नौतपा 2026 में 25 मई से 2 जून तक सूर्य पृथ्वी के सबसे करीब रहेगा। लोक मान्यता है कि इन नौ दिनों की तपन जितनी तीव्र, मानसून उतना प्रबल। सूर्योदय से पहले जलार्पण, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ और दान-पुण्य से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं।

मुख्य बातें

नौतपा 2026 की शुरुआत 25 मई से होगी और यह 2 जून तक रहेगा।
इन नौ दिनों में सूर्य पृथ्वी के सबसे करीब होता है, जिससे भीषण गर्मी पड़ती है।
लोक मान्यता के अनुसार नौतपा की तीव्र गर्मी अच्छे मानसून का संकेत है।
तांबे के लोटे से जलार्पण , पक्षियों को पानी पिलाना और गुड़, घी, लाल कपड़े का दान शुभ माना जाता है।
आदित्य हृदय स्तोत्र और सूर्य गायत्री मंत्र का जाप सूर्यदेव की कृपा दिलाता है।
सूर्य को पिता का कारक माना जाता है — पिता की सेवा और आदर से सूर्य की स्थिति मज़बूत होती है।

इस वर्ष नौतपा 25 मई से 2 जून 2026 तक रहेगा — वे नौ दिन जब सूर्य पृथ्वी के सबसे करीब होता है और तापमान अपने चरम पर पहुँचता है। धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं के अनुसार, इन नौ दिनों में जितनी तेज़ गर्मी पड़ती है, आने वाला मानसून उतना ही प्रबल होता है — जो सीधे तौर पर किसानों की फसलों और देश की कृषि अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। अप्रैल 2026 में ही भीषण गर्मी के संकेत मिलने लगे हैं, और ऐसे में नौतपा के महत्व को समझना ज़रूरी हो जाता है।

नौतपा और मानसून का संबंध

लोक परंपरा में एक पुरानी कहावत प्रचलित है —

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय कृषि-जीवन की सदियों पुरानी मौसम-समझ का प्रतिबिंब है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह सत्य है कि तीव्र गर्मी से समुद्री वाष्पीकरण बढ़ता है, जो मानसूनी बादलों के निर्माण में सहायक होता है। लोक परंपराओं ने इस प्राकृतिक चक्र को धार्मिक अनुष्ठानों से जोड़कर समाज में पर्यावरण-चेतना बनाए रखी है। आज जब जलवायु परिवर्तन मानसून की अनिश्चितता बढ़ा रहा है, नौतपा जैसी परंपराएँ जल-संरक्षण और प्रकृति-सम्मान का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाती हैं।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नौतपा 2026 कब से कब तक है?
नौतपा 2026 की शुरुआत 25 मई से होगी और यह 2 जून तक रहेगा। इन नौ दिनों में सूर्य पृथ्वी के सबसे करीब होता है और गर्मी अपने चरम पर होती है।
नौतपा में सूर्यदेव को प्रसन्न करने के क्या उपाय हैं?
नौतपा में सूर्योदय से पहले स्नान कर तांबे के लोटे से जलार्पण करना, पक्षियों को पानी पिलाना और गुड़, घी, गेहूँ, लाल कपड़े व मिट्टी के मटके का दान करना शुभ माना जाता है। आदित्य हृदय स्तोत्र और सूर्य गायत्री मंत्र का जाप भी सूर्यदेव की कृपा दिलाता है।
नौतपा और मानसून का क्या संबंध है?
लोक परंपरा के अनुसार 'तपै नवतपा नव दिन जोय, तौ पुन बरखा पूरन होय' — यानी नौतपा के नौ दिनों में जितनी अधिक गर्मी पड़ती है, मानसून उतना ही अच्छा होता है। वैज्ञानिक रूप से भी तीव्र गर्मी से समुद्री वाष्पीकरण बढ़ता है, जिससे मानसूनी बादलों के बनने की संभावना बढ़ जाती है।
ज्येष्ठ माह में पानी और गुड़ का दान क्यों महत्वपूर्ण है?
मान्यता है कि ज्येष्ठ माह में पानी और गुड़ का दान करने से 100 गुना पुण्य मिलता है। यह परंपरा गर्मी के मौसम में ज़रूरतमंदों और पशु-पक्षियों को राहत देने की सामाजिक चेतना से भी जुड़ी है।
सूर्य को पिता का कारक क्यों माना जाता है?
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को पिता का कारक ग्रह माना जाता है। मान्यता है कि जो लोग अपने पिता का सम्मान और सेवा करते हैं, उनकी कुंडली में सूर्य की स्थिति मज़बूत होती है, जिससे जीवन में सफलता और स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
राष्ट्र प्रेस
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