क्या संविधान लोकतंत्र की आत्मा है और मतदाता इसकी रीढ़ हैं? : राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य

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क्या संविधान लोकतंत्र की आत्मा है और मतदाता इसकी रीढ़ हैं? : राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य

सारांश

राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर मतदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संविधान लोकतंत्र की आत्मा है और मतदाता इसकी रीढ़ हैं। मतदान के अधिकार पर जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।

मुख्य बातें

संविधान लोकतंत्र की आत्मा है।
मतदाता लोकतंत्र की रीढ़ हैं।
मतदान के अधिकार के प्रति जागरूकता जरूरी है।
नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

गुवाहाटी, 25 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने रविवार को भारत के लोकतंत्र को सशक्त बनाने में मतदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय चुनावों को बनाए रखने के लिए नागरिकों की जागरूक और सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।

दिसपुर में स्थित राष्ट्रीय मतदाता दिवस भवन में 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी की याद दिलाने वाला अवसर बताया।

उन्होंने असम के सभी मतदाताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन भारतीय लोकतंत्र की जिवंतता और शक्ति का प्रतीक है।

आचार्य ने कहा कि 25 जनवरी का ऐतिहासिक महत्व है, क्योंकि इसी तारीख को 1950 में भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना हुई थी, जो संविधान लागू होने से एक दिन पहले का दिन था।

उन्होंने बताया कि संविधान निर्माताओं ने चुनावी प्रक्रिया की अखंडता की रक्षा के लिए निर्वाचन आयोग को एक मजबूत और स्वतंत्र संवैधानिक निकाय के रूप में परिकल्पित किया था।

नागरिक भागीदारी पर जोर देते हुए राज्यपाल ने कहा कि संविधान लोकतंत्र की आत्मा है, जबकि मतदाता इसकी रीढ़ हैं।

उन्होंने कहा कि जागरूक, जिम्मेदार और सहभागी मतदाता लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करते हैं और जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय मतदाता दिवस का उद्देश्य मतदान के अधिकार के बारे में जागरूकता बढ़ाना और व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है, विशेषकर नए मतदाताओं के बीच।

मतदान के अधिकार को सबसे शक्तिशाली लोकतांत्रिक उपकरणों में से एक बताते हुए आचार्य ने कहा कि एक वोट में भी देश के वर्तमान और भविष्य को प्रभावित करने की क्षमता है।

उन्होंने आगाह किया कि मतदान से दूर रहना नागरिकों की सामूहिक आवाज को कमजोर करता है, जबकि सोच-समझकर की गई भागीदारी लोकतंत्र को मजबूत करती है और शासन को आकार देती है।

इस वर्ष के विषय, 'मेरा भारत, मेरा वोट,' का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह एक लोकतांत्रिक समाज में नागरिकों के अधिकार और जिम्मेदारी दोनों को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम में नए मतदाताओं को दिए गए संदेश का हवाला देते हुए आचार्य ने कहा कि पहला वोट आत्मसम्मान और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है, और युवा मतदाताओं से जागरूकता और विवेक के साथ अपने विकल्प का प्रयोग करने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और हाशिए पर पड़े समूहों की बढ़ती भागीदारी का भी स्वागत किया और कहा कि यह भारतीय लोकतंत्र के समावेशी और परिपक्व स्वरूप को दर्शाता है।

उन्होंने विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में विश्वसनीयता और पारदर्शिता के साथ चुनाव कराने के लिए भारत निर्वाचन आयोग की सराहना की और सटीक मतदाता सूची और साल भर चलने वाले मतदाता जागरूकता अभियानों के महत्व पर जोर दिया।

कार्यक्रम में असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुराग गोयल, वरिष्ठ जिला अधिकारी, चुनाव जगत की जानी-मानी हस्तियां, चुनाव साक्षरता क्लबों के सदस्य और वरिष्ठ मतदाता उपस्थित थे।

संपादकीय दृष्टिकोण

मेरा मानना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए नागरिकों की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। असम के राज्यपाल का यह संदेश न केवल असम बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है। हमें अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए और सक्रिय रूप से चुनावों में भाग लेना चाहिए।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मतदाता दिवस क्यों मनाया जाता है?
मतदाता दिवस का उद्देश्य मतदान के अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।
मतदाता की भूमिका क्या होती है?
मतदाता की भूमिका चुनावी प्रक्रिया में भाग लेकर लोकतंत्र को सशक्त बनाना है।
संविधान का महत्व क्या है?
संविधान लोकतंत्र की आत्मा है और यह नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा करता है।
नए मतदाताओं के लिए क्या संदेश है?
नए मतदाताओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और चुनावों में भाग लेना चाहिए।
मतदान का अधिकार क्यों महत्वपूर्ण है?
मतदान का अधिकार लोकतंत्र का सबसे शक्तिशाली उपकरण है, जिससे नागरिक अपने भविष्य को आकार दे सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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