राकेश सिन्हा ने केंद्र सरकार के दावों को किया खारिज: सच का सामना
सारांश
Key Takeaways
- केंद्र सरकार के दावे पर सवाल उठाया गया है।
- भारत में तेल की किल्लत का मुद्दा गंभीर है।
- ईरान ने भारत के लोगों के प्यार की प्रशंसा की है।
- सरकार की विदेश नीति विफल रही है।
- आम जनता की परेशानियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
रांची, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने उन दावों को पूरी तरह से खारिज किया है, जिसमें कहा गया है कि अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते भारत के संबंध मध्य एशिया के अन्य देशों के साथ मजबूत हुए हैं।
राकेश सिन्हा ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यदि यह कहा जा रहा है कि अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान भारत के संबंध खाड़ी देशों के साथ मजबूत हुए हैं, तो फिर भारत में तेल की किल्लत क्यों है?
उन्होंने बताया कि इन दावों का सहारा लेकर केंद्र सरकार अपनी विफलताओं को छुपा रही है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। आज की स्थिति ऐसी है कि केंद्र सरकार की विफलता का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन केंद्र सरकार का इस पर कोई ध्यान नहीं है।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि हम न तो खाड़ी देशों का विश्वास जीत पाए हैं और न ही उनका दिल। ईरान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि हमने भारत के लोगों के प्यार के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का निर्णय लिया है, न कि भारत की विदेश नीति की वजह से।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में केवल झूठ और भ्रम का माहौल उत्पन्न किया जा रहा है। जो स्थिति बनी हुई है, उससे हमें किसी भी प्रकार का लाभ नहीं मिल रहा है। आज की तारीख में गैस की किल्लत अपने चरम पर पहुंच चुकी है, इस पर केंद्र सरकार को जवाब देना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में भारत की विदेश नीति पूरी तरह से विफल रही है। मौजूदा सरकार सत्ता में बने रहने के लायक नहीं है। इस सरकार ने किसी भी क्षेत्र में कोई भी उपलब्धि हासिल नहीं की है।