19 अक्टूबर 2026
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हरिद्वार में बाबा रामदेव का कन्या पूजन, बोले — संवैधानिक संस्थाएँ सड़क पर नहीं चलतीं

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हरिद्वार में बाबा रामदेव का कन्या पूजन, बोले — संवैधानिक संस्थाएँ सड़क पर नहीं चलतीं

सारांश

बाबा रामदेव ने हरिद्वार में नवरात्रि पर कन्या पूजन के मौके पर स्पष्ट संदेश दिया — संवैधानिक संस्थाएँ सड़क पर नहीं चलतीं। साथ ही चोरबागान भगदड़ पर दुख जताते हुए धार्मिक आयोजनों में कड़े सुरक्षा इंतजामों की माँग की।

मुख्य बातें

बाबा रामदेव ने 19 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में नवरात्रि पर कन्या पूजन किया।
उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का संचालन सड़क पर विरोध-प्रदर्शनों के ज़रिए नहीं किया जा सकता।
मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति और बर्खास्तगी पर बोले — संविधान में तय प्रक्रिया का पालन जरूरी।
कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ पर दुख जताया; धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और अग्नि सुरक्षा की अपील की।
सीजेपी (CJP) पर कहा — चरित्र और योगदान का आकलन अभी बाकी; युवाओं से जनहित में काम करने की उम्मीद।

योग गुरु बाबा रामदेव ने 19 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में नवरात्रि के अवसर पर कन्या पूजन किया और इस दौरान लोकतांत्रिक व्यवस्था, संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान और सनातन संस्कृति पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में विरोध और असहमति लोकतंत्र तथा संविधान की मर्यादाओं के भीतर रहकर ही व्यक्त होनी चाहिए।

संवैधानिक प्रक्रिया पर बाबा रामदेव का रुख

पत्रकारों से बातचीत में बाबा रामदेव ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति और उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया पर सवाल किए जाने पर कहा कि देश में संवैधानिक पदों के लिए एक निर्धारित लोकतांत्रिक ढाँचा मौजूद है। उनके अनुसार, किसी भी पदाधिकारी को नियुक्त करने या पद से हटाने के लिए संविधान में तय प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।

उन्होंने कहा, 'संवैधानिक संस्थाओं का संचालन सड़कों पर होने वाले विरोध-प्रदर्शनों के माध्यम से नहीं किया जा सकता।' यह ऐसे समय में आया है जब देश में कई मुद्दों पर राजनीतिक दलों और संगठनों के बीच विरोध-प्रदर्शनों को लेकर तीखी बहस चल रही है।

लोकतंत्र और अराजकता पर चेतावनी

रामदेव ने कहा कि जो राजनीतिक दल देश पर शासन की इच्छा रखते हैं, उन सभी के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना आवश्यक है। उन्होंने जोड़ा कि संवैधानिक ढाँचे की अनदेखी अराजकता को बढ़ावा दे सकती है।

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे राजनीतिक माहौल में आया है जब सत्ता परिवर्तन और संस्थागत सुधारों को लेकर विभिन्न दलों और संगठनों की ओर से माँगें उठाई जा रही हैं। सीजेपी (CJP) के संदर्भ में उन्होंने कहा कि उसके चरित्र और योगदान का आकलन अभी बाकी है और कुछ युवाओं का उससे जुड़ना सामने आया है।

चोरबागान भगदड़ पर शोक और सुरक्षा की अपील

कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ की घटना पर दुख व्यक्त करते हुए बाबा रामदेव ने मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोकसंतप्त परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की।

उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा सहित सभी धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, आग से बचाव के पर्याप्त साधन और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी पहले से सुनिश्चित होनी चाहिए। पंडालों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं, इसलिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम जरूरी हैं।

कन्या पूजन और सनातन संस्कृति पर विचार

नवरात्रि के अवसर पर कन्या पूजन के दौरान रामदेव ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में देवी को हर रूप, हर नाम और हर अस्तित्व में देखने की दृष्टि है। उनके अनुसार, नारी शक्ति और दिव्यता को स्वीकार करना केवल छोटी बच्चियों तक सीमित नहीं, बल्कि प्रत्येक रूप में इसे मान्यता देना सनातन संस्कृति की विशेषता है।

उन्होंने कहा कि ऐसी आध्यात्मिक दृष्टि रखने वाले व्यक्ति के मन में वासना और अनैतिक विचारों का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। सनातन मूल्यों का वास्तविक अर्थ नैतिकता, सदाचार और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पवित्रता बनाए रखना है।

युवाओं और जनहित से जुड़ी उम्मीद

रामदेव ने कहा कि जब जनता का सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों से विश्वास डगमगाने लगता है, तब कुछ व्यक्ति और संगठन जनहित के मुद्दे उठाने का प्रयास करते हैं। उनकी पहचान उनके चरित्र और कार्यों से होती है।

उन्होंने युवाओं से उम्मीद जताई कि वे अच्छे मुद्दों को उठाएँगे और देश के नागरिकों के हित में काम करेंगे। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर रहते हुए राजनीतिक और सामाजिक असहमति की यह बहस किस दिशा में जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे उस राजनीतिक संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए जिसमें विपक्ष और नागरिक संगठन सरकारी संस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं। 'सड़क पर नहीं चलतीं' वाली टिप्पणी सैद्धांतिक रूप से सही है, लेकिन यह उन लोगों की आवाज़ को भी निशाना बनाती है जो संसदीय रास्ते बंद पाते हैं। सीजेपी पर की गई अस्पष्ट टिप्पणी — न पूरी मंजूरी, न स्पष्ट आलोचना — यह संकेत देती है कि रामदेव अपना राजनीतिक लचीलापन बनाए रखना चाहते हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि एक धार्मिक व्यक्तित्व द्वारा चुनाव आयोग जैसे संस्थागत विषयों पर टिप्पणी — स्वयं एक राजनीतिक हस्तक्षेप है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाबा रामदेव ने हरिद्वार में कन्या पूजन के दौरान क्या कहा?
बाबा रामदेव ने 19 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में नवरात्रि पर कन्या पूजन के दौरान कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का संचालन सड़क पर विरोध-प्रदर्शनों से नहीं होता। उन्होंने लोकतंत्र में असहमति के अधिकार को महत्वपूर्ण बताते हुए इसे संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर रखने पर जोर दिया।
रामदेव ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर क्या प्रतिक्रिया दी?
रामदेव ने कहा कि देश में संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और बर्खास्तगी के लिए संविधान में एक निर्धारित प्रक्रिया है। उनके अनुसार इस प्रक्रिया को दरकिनार करना और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान न करना अराजकता को बढ़ावा दे सकता है।
चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ पर रामदेव की क्या प्रतिक्रिया रही?
रामदेव ने कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ पर दुख व्यक्त किया और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने सभी धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन तैयारी सुनिश्चित करने की अपील की।
बाबा रामदेव ने सनातन संस्कृति और नारी शक्ति पर क्या विचार रखे?
रामदेव ने कहा कि सनातन परंपरा में देवी को हर रूप और हर अस्तित्व में देखने की दृष्टि है और नारी शक्ति को प्रत्येक रूप में मान्यता देना इस संस्कृति की विशेषता है। उन्होंने कहा कि सनातन मूल्यों का वास्तविक अर्थ नैतिकता, सदाचार और पवित्रता बनाए रखना है।
रामदेव ने सीजेपी और युवाओं के बारे में क्या कहा?
रामदेव ने कहा कि सीजेपी के चरित्र और योगदान का आकलन अभी बाकी है और कुछ युवाओं का उससे जुड़ना सामने आया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि युवा अच्छे मुद्दे उठाएँगे और देश के नागरिकों के हित में काम करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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