हरिद्वार में बाबा रामदेव का कन्या पूजन, बोले — संवैधानिक संस्थाएँ सड़क पर नहीं चलतीं
सारांश
मुख्य बातें
योग गुरु बाबा रामदेव ने 19 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में नवरात्रि के अवसर पर कन्या पूजन किया और इस दौरान लोकतांत्रिक व्यवस्था, संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान और सनातन संस्कृति पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में विरोध और असहमति लोकतंत्र तथा संविधान की मर्यादाओं के भीतर रहकर ही व्यक्त होनी चाहिए।
संवैधानिक प्रक्रिया पर बाबा रामदेव का रुख
पत्रकारों से बातचीत में बाबा रामदेव ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति और उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया पर सवाल किए जाने पर कहा कि देश में संवैधानिक पदों के लिए एक निर्धारित लोकतांत्रिक ढाँचा मौजूद है। उनके अनुसार, किसी भी पदाधिकारी को नियुक्त करने या पद से हटाने के लिए संविधान में तय प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा, 'संवैधानिक संस्थाओं का संचालन सड़कों पर होने वाले विरोध-प्रदर्शनों के माध्यम से नहीं किया जा सकता।' यह ऐसे समय में आया है जब देश में कई मुद्दों पर राजनीतिक दलों और संगठनों के बीच विरोध-प्रदर्शनों को लेकर तीखी बहस चल रही है।
लोकतंत्र और अराजकता पर चेतावनी
रामदेव ने कहा कि जो राजनीतिक दल देश पर शासन की इच्छा रखते हैं, उन सभी के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना आवश्यक है। उन्होंने जोड़ा कि संवैधानिक ढाँचे की अनदेखी अराजकता को बढ़ावा दे सकती है।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे राजनीतिक माहौल में आया है जब सत्ता परिवर्तन और संस्थागत सुधारों को लेकर विभिन्न दलों और संगठनों की ओर से माँगें उठाई जा रही हैं। सीजेपी (CJP) के संदर्भ में उन्होंने कहा कि उसके चरित्र और योगदान का आकलन अभी बाकी है और कुछ युवाओं का उससे जुड़ना सामने आया है।
चोरबागान भगदड़ पर शोक और सुरक्षा की अपील
कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ की घटना पर दुख व्यक्त करते हुए बाबा रामदेव ने मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोकसंतप्त परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की।
उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा सहित सभी धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, आग से बचाव के पर्याप्त साधन और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी पहले से सुनिश्चित होनी चाहिए। पंडालों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं, इसलिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम जरूरी हैं।
कन्या पूजन और सनातन संस्कृति पर विचार
नवरात्रि के अवसर पर कन्या पूजन के दौरान रामदेव ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में देवी को हर रूप, हर नाम और हर अस्तित्व में देखने की दृष्टि है। उनके अनुसार, नारी शक्ति और दिव्यता को स्वीकार करना केवल छोटी बच्चियों तक सीमित नहीं, बल्कि प्रत्येक रूप में इसे मान्यता देना सनातन संस्कृति की विशेषता है।
उन्होंने कहा कि ऐसी आध्यात्मिक दृष्टि रखने वाले व्यक्ति के मन में वासना और अनैतिक विचारों का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। सनातन मूल्यों का वास्तविक अर्थ नैतिकता, सदाचार और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पवित्रता बनाए रखना है।
युवाओं और जनहित से जुड़ी उम्मीद
रामदेव ने कहा कि जब जनता का सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों से विश्वास डगमगाने लगता है, तब कुछ व्यक्ति और संगठन जनहित के मुद्दे उठाने का प्रयास करते हैं। उनकी पहचान उनके चरित्र और कार्यों से होती है।
उन्होंने युवाओं से उम्मीद जताई कि वे अच्छे मुद्दों को उठाएँगे और देश के नागरिकों के हित में काम करेंगे। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर रहते हुए राजनीतिक और सामाजिक असहमति की यह बहस किस दिशा में जाती है।