क्या शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के विधायक उनके नियंत्रण में नहीं हैं, इसीलिए उम्मीदवारी वापस ली: रामकदम?

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क्या शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के विधायक उनके नियंत्रण में नहीं हैं, इसीलिए उम्मीदवारी वापस ली: रामकदम?

सारांश

भाजपा नेता रामकदम ने शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उम्मीदवारों ने स्वेच्छा से अपनी उम्मीदवारी वापस ली है। क्या यह सच है या राजनीतिक खेल का हिस्सा है? जानें इस विवाद के पीछे की सच्चाई।

Key Takeaways

  • रामकदम ने शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के आरोपों को खारिज किया।
  • उम्मीदवारों ने स्वेच्छा से अपनी उम्मीदवारी वापस ली।
  • शिवसेना (यूबीटी) का महाराष्ट्र में कोई अस्तित्व नहीं रह गया है।
  • राजनीतिक दलों को आत्मचिंतन की आवश्यकता है।
  • आरोप राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित हैं।

मुंबई, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा नेता रामकदम ने उन आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के उम्मीदवारों को अपनी उम्मीदवारी वापस लेने के लिए मजबूर किया गया। रामकदम ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि इन आरोपों में कोई भी सच्चाई नहीं है।

रामकदम ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यह आरोप राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित हैं, जिन्हें किसी भी स्थिति में मान्यता नहीं दी जा सकती। असलियत यह है कि आज की तारीख में शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के विधायक खुद को उनके नियंत्रण में नहीं मानते हैं। यही कारण है कि वे अपनी उम्मीदवारी स्वत: वापस ले रहे हैं।

भाजपा नेता ने यह भी कहा कि शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के उम्मीदवारों ने किसी प्रकार के दबाव में अपना नाम वापस नहीं लिया है। वस्तुतः, उन्हें यह अच्छी तरह से ज्ञात है कि अब शिवसेना (यूबीटी) का महाराष्ट्र में कोई अस्तित्व नहीं बचा है और मनसे का कोई जनाधार नहीं है। ऐसी स्थिति में चुनाव लड़ने का कोई लाभ नहीं है। आज की तारीख में इन राजनीतिक दलों की विश्वसनीयता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। इसीलिए उनके नेताओं ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है।

रामकदम ने तंज करते हुए कहा कि सच्चाई यह है कि अब ये पार्टियां अपने नेता को नियंत्रित नहीं कर पा रही हैं, फिर भी आरोप हम पर लगा रहे हैं। यह तो वैसा ही है जैसे एक पिता का बच्चा उसके नियंत्रण में नहीं है, लेकिन पड़ोसी को डांटने जाता है। क्या इसका कोई अर्थ है? मुझे लगता है कि वर्तमान समय में शिवसेना (यूबीटी) और मनसे को आत्मचिंतन करना चाहिए ताकि उन्हें अपनी विसंगतियों का अहसास हो सके।

रामकदम ने कहा कि अगर आपके नेताओं ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है तो आप हमसे सवाल क्यों कर रहे हैं? यदि सवाल करना है, तो अपने पार्टी के नेताओं को बुलाकर सवाल पूछिए। स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, लेकिन आप ऐसा नहीं करेंगे, केवल बेबुनियाद आरोप लगाएंगे, जिससे कुछ भी हासिल नहीं होगा।

Point of View

यह कहा जा सकता है कि रामकदम के बयान में कुछ सच्चाई हो सकती है, लेकिन राजनीतिक आरोपों और प्रतिशोध के खेल में सत्यता को पहचानना चुनौतीपूर्ण है। यह आवश्यक है कि राजनीतिक दल आत्मविश्लेषण करें और अपने कार्यों के परिणामों को समझें।
NationPress
11/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या रामकदम ने शिवसेना और मनसे के आरोपों को खारिज किया?
हाँ, रामकदम ने स्पष्ट किया है कि शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है।
क्यों उम्मीदवारों ने अपनी उम्मीदवारी वापस ली?
रामकदम के अनुसार, उम्मीदवारों ने स्वेच्छा से अपनी उम्मीदवारी वापस ली है क्योंकि शिवसेना (यूबीटी) का महाराष्ट्र में कोई अस्तित्व नहीं रह गया है।
क्या यह आरोप राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित हैं?
रामकदम ने आरोप लगाया है कि ये सभी आरोप राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित हैं।
क्या शिवसेना और मनसे के नेता अपने काबू में हैं?
रामकदम का कहना है कि इन दोनों ही पार्टियों के नेता अब अपने नियंत्रण में नहीं हैं।
क्या रामकदम ने किसी दबाव का जिक्र किया?
उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों ने किसी भी दबाव में अपनी उम्मीदवारी वापस नहीं ली।
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