क्या रानी वेलु नचियार की जयंती पर नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?

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क्या रानी वेलु नचियार की जयंती पर नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?

सारांश

3 जनवरी को रानी वेलु नचियार की जयंती पर विभिन्न नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। रानी वेलु नचियार, भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी, ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी। उनके जीवन के साहस और बलिदान की कहानियाँ आज भी प्रेरणा देती हैं।

Key Takeaways

  • रानी वेलु नचियार का जन्म 3 जनवरी 1730 को हुआ था।
  • उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
  • 1780 में अपने राज्य शिवगंगई को वापस जीता।
  • उन्हें भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी माना जाता है।
  • उनकी विरासत आज भी प्रेरणा देती है।

नई दिल्ली, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध हथियार उठाने वाली भारत की पहली रानी वीरामंगई रानी वेलु नचियार की जयंती पर कई नेताओं ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। 3 जनवरी 1730 को जन्मी रानी वेलु नचियार, ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली पहली रानी के रूप में जानी जाती हैं, जिन्होंने 1780 में अंग्रेजों को परास्त कर अपना राज्य शिवगंगई वापस प्राप्त किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्विटर पर लिखा, "रानी वेलु नचियार की जयंती पर उन्हें याद कर रहे हैं और श्रद्धांजलि दे रहे हैं। उनका जीवन भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक सुनहरा अध्याय है, जो साहस, बलिदान और अटूट संकल्प से भरा हुआ है। ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ हथियार उठाने वाली पहली भारतीय रानी के तौर पर, उन्होंने आत्म-सम्मान और कर्तव्य पर आधारित प्रतिरोध का एक उदाहरण पेश किया। एक जन-केंद्रित शासक और असाधारण दूरदर्शिता वाली नेता के रूप में, उन्होंने दिखाया कि सच्चा नेतृत्व अधिकार से नहीं, बल्कि उत्पीड़न और अन्याय के खिलाफ खड़े होने के साहस से मापा जाता है। उनकी विरासत आज भी गर्व की भावना जगाती है और पीढ़ियों को प्रेरित करती है।"

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा, "वीर रानी वेलु नचियार की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि। एक अग्रणी, विद्वान-योद्धा और महिला नेतृत्व की प्रतीक, उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के शासन को चुनौती दी और आजादी वापस पाने के लिए बहादुरी से लड़ाई लड़ी। उनकी सैन्य कुशलता, वीरता और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण हमेशा प्रेरणा बना रहेगा।"

ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने एक पोस्ट में लिखा, "उनकी जयंती पर, हम रानी वेलु नचियार को सलाम करते हैं, जो भारत की पहली रानी थीं जिन्होंने बेजोड़ बहादुरी और समझदारी से आजादी के लिए लड़ाई लड़ी। उनकी ताकत की विरासत हम सभी को प्रेरित करती रहती है।"

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने लिखा, "भारत की प्रथम महिला स्वतंत्रता सेनानी वीरामंगई रानी वेलु नचियार जी की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। तलवार और युद्ध की रणनीति में निपुण होकर उन्होंने शिवगंगा का राज्य वापस जीता। मातृभूमि की रक्षक एवं नारी शक्ति और स्वाभिमान की अमर ज्योति 'वेलु नचियार' आज भी महिला सशक्तीकरण की सबसे बड़ी मिसाल हैं।"

3 जनवरी 1730 को जन्मी वेलु नचियार 18वीं शताब्दी के दौरान वर्तमान तमिलनाडु के शिवगंगई रियासत की रानी थीं। रानी वेलु नचियार युद्ध कलाओं और तीरंदाजी में प्रशिक्षित थीं। उन्हें फ्रांसीसी, उर्दू और अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में भी निपुणता हासिल थी। रानी नचियार को ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली पहली रानी के रूप में जाना जाता है। 1780 में रानी वेलु नचियार अंग्रेजों से निडर होकर लड़ीं और उन्हें परास्त किया। तमिलनाडु के लोग आज भी उन्हें वीरामंगई यानी बहादुर रानी के नाम से जानते हैं।

Point of View

बल्कि आज की पीढ़ी को भी प्रेरित करता है कि वे अपने अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए खड़े हों।
NationPress
03/01/2026

Frequently Asked Questions

रानी वेलु नचियार कौन थीं?
रानी वेलु नचियार भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी थीं, जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
उनकी जयंती कब मनाई जाती है?
रानी वेलु नचियार की जयंती हर साल 3 जनवरी को मनाई जाती है।
रानी ने किस राज्य को वापस जीता?
रानी वेलु नचियार ने 1780 में अपने राज्य शिवगंगई को अंग्रेजों से वापस जीता।
रानी वेलु नचियार का जन्म कब हुआ था?
रानी वेलु नचियार का जन्म 3 जनवरी 1730 को हुआ था।
उनकी विरासत क्या है?
रानी वेलु नचियार की विरासत साहस, बलिदान और नारी शक्ति की प्रतीक है।
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