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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस: सीवी रमन की अनोखी यात्रा और उनकी खोज की महत्ता

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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस: सीवी रमन की अनोखी यात्रा और उनकी खोज की महत्ता

सारांश

सीवी रमन की अद्वितीय यात्रा और उनकी खोज ने भौतिकी में नई दिशा दी। जानिए कैसे उन्होंने सपनों के लिए संघर्ष किया और भारत को गर्वित किया।

मुख्य बातें

सीवी रमन का जन्म 7 नवंबर 1888 को हुआ।
उन्होंने 'रमन प्रभाव' की खोज की।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 28 फरवरी को मनाया जाता है।
सीवी रमन को 1930 में नोबेल पुरस्कार मिला।

नई दिल्ली, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्राचीन भारत को ऋषियों, संतों के साथ-साथ विद्वानों और वैज्ञानिकों की भूमि माना जाता है। अनुसंधान से यह स्पष्ट होता है कि भारत ने दुनिया का सर्वश्रेष्ठ स्टील बनाने से लेकर गिनती सिखाने तक, आधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना से पहले ही गणित और प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस इसी वैज्ञानिक प्रगति और नवाचार के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का उत्सव है।

इसकी शुरुआत महान वैज्ञानिक और भौतिकज्ञ सीवी रमन से होती है, जिनका जन्म 7 नवंबर 1888 को तिरुचिरापल्ली, दक्षिण भारत में हुआ था। उन्होंने 'रमन प्रभाव' की खोज की, जो बताता है कि जब प्रकाश किसी पारदर्शी पदार्थ से गुजरता है, तो उसके प्रकीर्णित प्रकाश का रंग और ऊर्जा परिवर्तित हो जाती है।

समुद्र का रंग नीला क्यों होता है? आकाश नीला क्यों दिखता है? जब सीवी रमन ने इसके कारणों को समझा, तो उन्होंने इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करने का निर्णय लिया, लेकिन आर्थिक समस्याएं उनके मार्ग में अवरोध बन गईं।

पैसों की कमी के कारण, सीवी रमन ने सरकारी नौकरी की राह अपनाई। उन्होंने सरकार के वित्त विभाग की प्रतियोगिता परीक्षा दी और सफल हुए। 1907 में, उन्हें कोलकाता में सहायक लेखा जनरल के पद पर नियुक्त किया गया, लेकिन उनका विज्ञान के प्रति लगाव बना रहा।

1917 में, उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर अध्यापन शुरू किया और कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बने। यहां, उन्हें अपनी खोजों के लिए अवसर प्राप्त हुए और वे इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस (आईएसीएस) में अनुसंधान कार्य में लगे रहे।

हालांकि उन्हें खोज के लिए स्पेक्ट्रोमीटर की आवश्यकता थी, लेकिन पैसों की कमी एक बाधा थी। उन्होंने जीडी बिड़ला को एक पत्र लिखा, जिसमें अनुरोध किया कि यदि वे उन्हें 22,000 रुपये की मदद कर सकें, तो वह उन्हें एक साल में नोबेल पुरस्कार दिला सकते हैं।

जीडी बिड़ला ने विश्वास जताया और सीवी रमन की आर्थिक मदद की। एक साल बाद, सीवी रमन ने अपनी थ्योरी को सिद्ध किया और प्रकाश की स्कैटरिंग नेचर को साबित किया, जिसे 'रमन प्रभाव' नाम दिया गया।

इस खोज को मान्यता दी गई और इसी के सम्मान में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की स्थापना की गई। भारत सरकार ने 1986 में 28 फरवरी को इसे राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (एनएसडी) के रूप में घोषित किया, इस दिन 1928 में सीवी रमन ने 'रमन प्रभाव' की घोषणा की थी, जिसके लिए उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार मिला। वह पूरे एशिया में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले वैज्ञानिक बने।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूरे विश्व में महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कब मनाया जाता है?
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 28 फरवरी को मनाया जाता है।
सीवी रमन ने किस खोज के लिए नोबेल पुरस्कार जीता?
सीवी रमन ने 'रमन प्रभाव' की खोज के लिए 1930 में नोबेल पुरस्कार जीता।
राष्ट्र प्रेस
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