राजस्थान: संत बन्नानाथ का शव 50 घंटे बाद समाधि से निकाला, 7 पर हत्या का मुकदमा
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के चूरू जिले के रतनगढ़ तहसील के संगसर गाँव में कथित तौर पर हत्या की आशंका के बीच संत बन्नानाथ के शव को समाधि में दफनाए जाने के लगभग 50 घंटे बाद 9 अक्टूबर 2026 को बाहर निकाला गया। पुलिस ने सात आरोपियों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मृत्यु के वास्तविक कारण का खुलासा होने की उम्मीद है।
शव निकालने की प्रक्रिया
उप-मंडल मजिस्ट्रेट के आदेश पर तहसीलदार अंकित मिमानी की देखरेख में गुरुवार को चिकित्सा एवं फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की टीमों की उपस्थिति में शव को समाधि से बाहर निकाला गया। सर्किल इंस्पेक्टर संदीप कुमार के नेतृत्व में पुलिस दल पूरी प्रक्रिया के दौरान घटनास्थल पर तैनात रहा। शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल की मॉर्चरी में भेज दिया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
हरियाणा के सिरसा जिले के धौलपालिया गाँव निवासी हंसराज — जो बन्नानाथ के बड़े भाई हैं — की पुलिस शिकायत के अनुसार, बन्नानाथ ने 2004 में सांसारिक जीवन त्यागकर साधु-जीवन अपना लिया था। वे पिछले दो वर्षों से रावतसर स्थित बालकनाथ के आश्रम में रह रहे थे। शिकायत के मुताबिक बन्नानाथ 30 सितंबर को संगसर गाँव पहुँचे थे।
शिकायत में आगे कहा गया है कि 2 अक्टूबर को बालकनाथ ने हंसराज को फोन कर सत्संग में बुलाया, जिसके बाद हंसराज 3 अक्टूबर को रावतसर पहुँचे। 4 अक्टूबर को हंसराज को जानकारी मिली कि बालकनाथ ने बन्नानाथ को संगसर गाँव में बजरंगनाथ के पास छोड़ दिया है और कथित तौर पर एक सप्ताह में वापस लाने की बात कही थी। इसके बाद बन्नानाथ से संपर्क पूरी तरह टूट गया।
आरोप और पुलिस कार्रवाई
हंसराज ने आरोप लगाया कि उनके भाई का बालकनाथ से विवाद हुआ था और कथित तौर पर उन्हें पीट-पीटकर मार डाला गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने अपराध छिपाने की नीयत से किसी को सूचित किए बिना बन्नानाथ को समाधि में दफना दिया। पुलिस ने बालकनाथ, बजरंगनाथ, मुकेशनाथ, लूननाथ, लक्ष्मीनारायण और दो अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। गौरतलब है कि ये आरोप अभी जाँच के दायरे में हैं और न्यायालय में सिद्ध नहीं हुए हैं।
आम जनता पर असर और विरोध प्रदर्शन
इस घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण शव निकालने के दौरान घटनास्थल पर एकत्र हो गए। विरोध प्रदर्शन करते हुए ग्रामीणों ने सालसर रोड को जाम कर दिया और आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की। पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुँचकर प्रदर्शनकारियों को समझाया, और लगभग एक घंटे बाद यातायात सामान्य हो सका।
आगे की जाँच
बन्नानाथ की मौत के सटीक कारण और परिस्थितियाँ पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जाँच के निष्कर्ष आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी। यह मामला इस क्षेत्र में आश्रमों के भीतर होने वाली घटनाओं पर पारदर्शिता और जवाबदेही के व्यापक सवाल भी उठाता है।