रतलाम में मिठाई खाने से ढाई साल के आर्यन की मौत, खाद्य सुरक्षा विभाग ने की सैंपलिंग
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के बिनोली गाँव में मिठाई खाने के बाद ढाई वर्षीय बच्चे आर्यन की मौत हो गई, जबकि उसके माता-पिता अभी भी उपचाररत हैं। 10 अक्टूबर 2026 को सामने आई इस घटना ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
जितेंद्र गोस्वामी के पुत्र आर्यन समेत पूरे परिवार की तबीयत मिठाई खाने के बाद अचानक बिगड़ गई। परिजनों ने बताया कि बच्चे और उसके माता-पिता को तत्काल मंदसौर के शासकीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहाँ उपचार के दौरान आर्यन ने दम तोड़ दिया। उसके माता-पिता अभी भी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।
गौरतलब है कि जावरा क्षेत्र में इससे पहले भी कथित तौर पर नकली दूध के कारोबार को लेकर सवाल उठ चुके हैं। यह घटना उस श्रृंखला में एक और गंभीर कड़ी बनकर सामने आई है जो खाद्य मिलावट की व्यापक समस्या की ओर इशारा करती है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की प्रतिक्रिया
खाद्य सुरक्षा अधिकारी ज्योति बघेल ने संबंधित दुकान पर पहुँचकर सैंपलिंग की है। अधिकारियों के अनुसार, प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही मिलावट या दूषण की पुष्टि हो सकेगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल मामले की जाँच जारी है।
यह ऐसे समय में आया है जब त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ बाज़ारों में मिठाइयों की बिक्री तेज़ी से बढ़ने वाली है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान खाद्य पदार्थों की नियमित और सघन जाँच अत्यंत आवश्यक हो जाती है।
सामाजिक संगठनों की माँग
करनी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर ने सोशल मीडिया पर खाद्य विभाग की कथित लापरवाही पर नाराज़गी जताई और ढाई वर्षीय आर्यन की मौत के मामले में निष्पक्ष जाँच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की माँग की। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप का आग्रह किया।
स्थानीय निवासियों और परिजनों की माँग है कि मामले की पारदर्शी जाँच हो, वास्तविक कारणों का खुलासा किया जाए और यदि मिलावट या दूषण सिद्ध हो तो दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
आम जनता पर असर
आलोचकों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा विभाग केवल बड़ी घटनाओं के बाद ही सक्रिय होता है, जबकि नियमित जाँच अभियान की सख्त ज़रूरत है। त्योहारों से पहले जिला प्रशासन को मिठाई दुकानों, दूध विक्रेताओं और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों से नमूने लेकर प्रयोगशाला में जाँच करानी चाहिए।
यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि खाद्य मिलावट केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि जीवन के लिए सीधा खतरा है। प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में अगली कार्रवाई की दिशा तय होगी।