बेहाला पश्चिम विवाद: एफआईआर के बाद रत्ना चटर्जी ने आरोपों को झूठा बताया
सारांश
Key Takeaways
- एफआईआर: रत्ना चटर्जी पर भाजपा कार्यालय में हंगामे के लिए एफआईआर दर्ज।
- सफाई: रत्ना ने कहा, वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं थीं।
- महिला आरक्षण: टीएमसी की नेताओं ने विधेयक का समर्थन किया।
कोलकाता, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के बेहाला पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में भाजपा कार्यालय में हुए हंगामे और बैनर तोड़ने की घटना के संबंध में तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार रत्ना चटर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस पर रत्ना चटर्जी ने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि जब यह हंगामा हुआ, तब वह वहां मौजूद नहीं थीं और वह कानूनी रूप से इस एफआईआर का सामना करेंगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बैनर तोड़े जाने के बाद उनके समर्थकों को हिरासत में ले लिया गया था।
रत्ना चटर्जी ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि वह 131वें वार्ड की पार्षद हैं और बेहाला पश्चिम क्षेत्र से टीएमसी की उम्मीदवार हैं। उनके अनुसार, जिस घटना को लेकर विवाद खड़ा हुआ, उसमें उनका कोई संबंध नहीं था। उन्होंने कहा कि पहले उनके पार्टी का बैनर फाड़कर फेंका गया था। जब उन्हें इसकी जानकारी मिली, तो वह मौके पर पहुंचीं और देखा कि बैनर को नुकसान पहुंचाया गया है। इस घटना के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई और बड़ी संख्या में समर्थक वहां इकट्ठा हो गए। इसी दौरान, कथित तौर पर भाजपा के कार्यालय में लगे बैनर को भी क्षति पहुंचाई गई।
उन्होंने आगे कहा कि बाद में उन्हें पता चला कि इस मामले में टीएमसी के कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वह अपने समर्थकों की रिहाई के लिए थाने गई थीं। रत्ना चटर्जी ने दावा किया कि पुलिस द्वारा प्रस्तुत किए गए सीसीटीवी फुटेज में 10 किलोमीटर की दूरी पर उनकी मौजूदगी नहीं दिखती। इसके बावजूद उनका नाम एफआईआर में जोड़ दिया गया, जो पूरी तरह से अनुचित है।
इस बीच, महिला आरक्षण के मुद्दे पर टीएमसी नेताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। मालदा से टीएमसी की वरिष्ठ नेता मौसम नूर ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करते हुए इसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने इस विधेयक को पेश करने का श्रेय सोनिया गांधी को दिया और कहा कि यह केवल चुनावी मुद्दा नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे वास्तविकता में लागू किया जाना चाहिए।
मौसम नूर ने राष्ट्र प्रेस से कहा कि एक महिला के नाते वह इस बिल का समर्थन करती हैं। उन्होंने याद दिलाया कि यह विधेयक राज्यसभा से भी पारित हो चुका है, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। उनके अनुसार, चुनावी माहौल के कारण ही प्रधानमंत्री इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन जब तक इसे जमीन पर लागू नहीं किया जाएगा, तब तक यह सिर्फ एक प्रस्ताव ही बना रहेगा। उन्होंने मांग की कि इस बिल को जल्द से जल्द लागू किया जाए ताकि महिलाओं को राजनीति में अधिक अवसर मिल सकें और उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।