रवि किशन का अनोखा बयान: 'पत्नी के पैर छूना चाहिए', लोकसभा में विपक्ष को दी सलाह
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण पर चर्चा महत्वपूर्ण है।
- रवि किशन के बयान में व्यक्तिगत अनुभव छिपा है।
- सदन में हल्का-फुल्का माहौल देखने को मिला।
नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में महिला आरक्षण पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद रवि किशन ने अपने विशेष अंदाज में कहा कि 'हां, हम पत्नी के पैर छूते हैं'। उनकी इस बात पर सदन में उपस्थित सभी सदस्यों के साथ-साथ पीठासीन जगदंबिका पाल भी मुस्कुराने लगे।
रवि किशन ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा, 'आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा और मैं संविधान से जुड़े तीनों विधेयकों का समर्थन करता हूं। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक नए भारत के सपने को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। यह सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति का परिणाम है, जिसने नामुमकिन को मुमकिन बना दिया।'
इस दौरान उन्होंने महिला आरक्षण को चुनावी मुद्दा बताने पर विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा, 'ये कोई चुनावी मुद्दा नहीं है। विपक्ष महिला आरक्षण का विरोध कर रहा है।'
रवि किशन ने अपने बचपन और गरीबी के दिनों को भी याद करते हुए कहा, 'मेरे गांव में उस समय चूल्हा और शौचालय जैसी सुविधाएं नहीं थीं। मैंने महिलाओं के दर्द को देखा है। वे शौच के लिए शाम का इंतजार करती थीं। मैंने अपनी दादी की आंखों में भी तकलीफ देखी है।'
उन्होंने आगे कहा, 'जब पीएम मोदी आए, तो महिलाओं के उस दर्द का समाधान हुआ। देश जागरूक हुआ है और आज की महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में क्यों यह दरवाजे उन महिलाओं को रोक रहे हैं? 140 करोड़ की जनसंख्या में 70 करोड़ महिलाएं हैं।'
इस बीच सदन में हल्का-फुल्का माहौल तब बना जब पीठासीन जगदंबिका पाल ने मजाकिया अंदाज में कहा, 'आपका प्रचार तो आपकी पत्नी ही करती हैं।' इस पर रवि किशन ने उत्तर दिया, 'मेरे लाखों वोटों में एक बड़ा हिस्सा मेरी पत्नी का होता है।' उन्होंने आगे कहा, 'मुझे लाखों वोट मिलते हैं, मेरा 1.50 लाख वोट तो मेरी पत्नी लेकर आती हैं।'
इस पर जगदंबिका पाल ने कहा, 'तो, आप पत्नी के पैर छुएलां न?' इस पर रवि किशन गर्व से बोले, 'हां, हम पत्नी के पैर छुइलां। सबके छुए के चाहीं। विरोधी लोगन के बड़ा कष्ट भइया। क्यों नहीं छूना चाहिए। वही लक्ष्मी है, वही देवी है।' उन्होंने कहा, 'मेरे संघर्ष के दिनों में पत्नी ने मेरा साथ दिया, तो मैं क्यों नहीं उसका पैर छू लूं?'
जगदंबिका पाल ने कहा, 'अब आपकै काम बनि गइल। चलि गइल दूर-दूर तक संदेश महिलाओं के बीच, ऐसा कोई पत्नीव्रता है।'