क्या अपनों के षड्यंत्र से तहस-नहस हुई बड़ी विरासत: रोहिणी आचार्य?
सारांश
Key Takeaways
- परिवार में आंतरिक संघर्ष विरासत के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
- रोहिणी आचार्य ने अपने अनुभव साझा किए हैं।
- राजनीतिक स्थिरता आंतरिक एकता पर निर्भर करती है।
पटना, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने शनिवार को पार्टी और परिवार के भीतर चल रही सियासी उठापटक पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़ी विरासत को नष्ट करने के लिए बाहरी लोगों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि अपने ही लोग और कुछ षड्यंत्रकारी काफी होते हैं। उन्होंने संकेत करते हुए कहा कि जिस विरासत को बड़ी मेहनत और समर्पण से खड़ा किया गया, उसे नुकसान पहुंचाने में अपने लोग ही सबसे आगे रहते हैं।
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "बड़ी मेहनत से स्थापित की गई 'बड़ी विरासत' को तहस-नहस करने के लिए परायों की आवश्यकता नहीं होती, 'अपने' और अपनों के कुछ षड्यंत्रकारी 'नए बने अपने' ही पर्याप्त होते हैं। यह हैरान करने वाला है कि जिसकी वजह से पहचान होती है, उस पहचान को मिटाने में 'अपने' ही जुट जाते हैं।"
उन्होंने अपने पोस्ट में आगे लिखा, "जब विवेक पर पर्दा पड़ जाता है, और अहंकार सिर पर चढ़ जाता है, तब 'विनाशक' ही बुद्धि-विवेक छीन लेते हैं।"
इससे पहले, बिहार विधानसभा चुनाव में राजद की हार के बाद, रोहिणी आचार्य ने भाई तेजस्वी यादव और उनके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए परिवार छोड़ने और राजनीति से हटने की घोषणा की थी। उन्होंने खुद को अपमानित बताते हुए कहा था कि उनके ऊपर चप्पल फेंकी गई।
रोहिणी ने इस संबंध में एक्स पर लिखा, "एक बेटी, एक बहन, एक शादीशुदा महिला और एक मां के रूप में मुझे जलील किया गया, गंदी गालियां दी गईं, और मुझ पर चप्पल उठाई गई। मैंने अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया, और इस कारण मुझे बेइज्जती का सामना करना पड़ा। मैं मजबूरी में अपने माता-पिता और बहनों को छोड़कर आई, मुझे अनाथ बना दिया गया।"